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काजोल ने ठुकरा दी थी शाहरुख खान की ये फिल्म, जीते 6 फिल्मफेयर और 2 नेशनल अवॉर्ड
Bollywood
बॉलीवुड की लोकप्रिय जोड़ी काजोल और शाहरुख खान ने साथ में कई सफल फिल्मों का रिकॉर्ड बनाया है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि काजोल ने अपने करियर के पीक दौर में शाहरुख की एक महत्वपूर्ण फिल्म को करने से इनकार कर दिया था।
यह फिल्म आगे चलकर 6 फिल्मफेयर अवॉर्ड और 2 नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली ‘दिल से’ (1998) थी, जिसे निर्देशक मणि रत्नम ने बनाया था।
कौन, क्या, कब, कहाँ:
यह मामला 1998 में रिलीज हुई फिल्म दिल से का है। काजोल को फिल्म के लिए संपर्क किया गया था, लेकिन व्यस्त शेड्यूल और डेट्स न मिलने के कारण उन्होंने इस ऑफर को ठुकरा दिया। बाद में मेकर्स ने मनीषा कोइराला को शाहरुख खान के अपोजिट साइन किया और प्रीति ज़िंटा को बॉलीवुड डेब्यू का मौका मिला।
फिल्म से काजोल का अलग होना क्यों महत्वपूर्ण:
काजोल और शाहरुख खान की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री 90 के दशक की सबसे सफल जोड़ियों में रही है। ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘कुछ कुछ होता है’ और ‘कभी खुशी कभी ग़म’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के बाद दर्शकों की उम्मीदें इस स्टार जोड़ी से हमेशा ऊंची रहीं। ऐसे में ‘दिल से’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा न बन पाना काजोल के करियर का दिलचस्प अध्याय माना जाता है।
फिल्म के प्रदर्शन ने कैसे बदली तस्वीर:
करीब 10 करोड़ रुपये में बनी इस रोमांटिक थ्रिलर ने विश्वभर में 29 करोड़ रुपये की कमाई की और 1998 की 13वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म बनी। कहानी पूर्वोत्तर भारत की पृष्ठभूमि पर आधारित थी जिसने फिल्म को एक अलग पहचान दिलाई।
फिल्म का संगीत भी बड़ी सफलता साबित हुआ। ए.आर. रहमान के साउंडट्रैक ने देश ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खूब तारीफ बटोरी। ‘छैया-छैया’ जैसी लोकप्रिय धुनों ने फिल्म की लोकप्रियता को और बढ़ाया।
अवॉर्ड्स की लंबी सूची:
‘दिल से’ ने 6 फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते—
-
बेस्ट फीमेल डेब्यू (प्रीति ज़िंटा)
-
बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर
-
बेस्ट लिरिसिस्ट
-
बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर
-
बेस्ट कोरियोग्राफी
-
बेस्ट सिनेमैटोग्राफी
इसके साथ ही फिल्म ने बेस्ट ऑडियोग्राफी और बेस्ट सिनेमैटोग्राफी के 2 नेशनल अवॉर्ड भी अपने नाम किए। यह फिल्म बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी चयनित हुई और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय सिनेमा की उपस्थिति दर्ज कराती रही।
अब आगे क्या:
फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि ‘दिल से’ जैसी फिल्मों ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाई। वहीं काजोल और शाहरुख की जोड़ी आज भी दर्शकों की पसंदीदा बनी हुई है। यह कहानी एक बार फिर याद दिलाती है कि बॉलीवुड के इतिहास में कई बड़े निर्णय पल भर में पूरे करियर की दिशा बदल सकते हैं।
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काजोल ने ठुकरा दी थी शाहरुख खान की ये फिल्म, जीते 6 फिल्मफेयर और 2 नेशनल अवॉर्ड
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यह फिल्म आगे चलकर 6 फिल्मफेयर अवॉर्ड और 2 नेशनल अवॉर्ड जीतने वाली ‘दिल से’ (1998) थी, जिसे निर्देशक मणि रत्नम ने बनाया था।
कौन, क्या, कब, कहाँ:
यह मामला 1998 में रिलीज हुई फिल्म दिल से का है। काजोल को फिल्म के लिए संपर्क किया गया था, लेकिन व्यस्त शेड्यूल और डेट्स न मिलने के कारण उन्होंने इस ऑफर को ठुकरा दिया। बाद में मेकर्स ने मनीषा कोइराला को शाहरुख खान के अपोजिट साइन किया और प्रीति ज़िंटा को बॉलीवुड डेब्यू का मौका मिला।
फिल्म से काजोल का अलग होना क्यों महत्वपूर्ण:
काजोल और शाहरुख खान की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री 90 के दशक की सबसे सफल जोड़ियों में रही है। ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘कुछ कुछ होता है’ और ‘कभी खुशी कभी ग़म’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के बाद दर्शकों की उम्मीदें इस स्टार जोड़ी से हमेशा ऊंची रहीं। ऐसे में ‘दिल से’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा न बन पाना काजोल के करियर का दिलचस्प अध्याय माना जाता है।
फिल्म के प्रदर्शन ने कैसे बदली तस्वीर:
करीब 10 करोड़ रुपये में बनी इस रोमांटिक थ्रिलर ने विश्वभर में 29 करोड़ रुपये की कमाई की और 1998 की 13वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म बनी। कहानी पूर्वोत्तर भारत की पृष्ठभूमि पर आधारित थी जिसने फिल्म को एक अलग पहचान दिलाई।
फिल्म का संगीत भी बड़ी सफलता साबित हुआ। ए.आर. रहमान के साउंडट्रैक ने देश ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खूब तारीफ बटोरी। ‘छैया-छैया’ जैसी लोकप्रिय धुनों ने फिल्म की लोकप्रियता को और बढ़ाया।
अवॉर्ड्स की लंबी सूची:
‘दिल से’ ने 6 फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते—
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बेस्ट फीमेल डेब्यू (प्रीति ज़िंटा)
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बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर
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बेस्ट लिरिसिस्ट
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बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर
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बेस्ट कोरियोग्राफी
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बेस्ट सिनेमैटोग्राफी
इसके साथ ही फिल्म ने बेस्ट ऑडियोग्राफी और बेस्ट सिनेमैटोग्राफी के 2 नेशनल अवॉर्ड भी अपने नाम किए। यह फिल्म बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी चयनित हुई और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय सिनेमा की उपस्थिति दर्ज कराती रही।
अब आगे क्या:
फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि ‘दिल से’ जैसी फिल्मों ने भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाई। वहीं काजोल और शाहरुख की जोड़ी आज भी दर्शकों की पसंदीदा बनी हुई है। यह कहानी एक बार फिर याद दिलाती है कि बॉलीवुड के इतिहास में कई बड़े निर्णय पल भर में पूरे करियर की दिशा बदल सकते हैं।
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