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राकेश बेदी बोले- सोशल मीडिया ने बढ़ाई फिल्मों की पहुंच और असर
बालीवुड डेस्क
‘धुरंधर’ में जमीम जमाली के किरदार को मिल रही तारीफ, अभिनेता ने पुराने दौर और आज की इंडस्ट्री का अंतर बताया
अभिनेता राकेश बेदी इन दिनों अपनी हालिया फिल्म ‘धुरंधर’ में निभाए गए जमीम जमाली के किरदार को लेकर चर्चा में हैं। उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इसी बीच एक इवेंट में बातचीत के दौरान राकेश बेदी ने न सिर्फ अपनी भूमिका पर बात की, बल्कि यह भी बताया कि कैसे सोशल मीडिया ने फिल्मों की पहुंच और लोकप्रियता को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने अपने लंबे करियर के अनुभवों को साझा करते हुए पुराने और नए दौर की तुलना भी की। राकेश बेदी ने कहा कि पहले के समय में फिल्मों की जानकारी लोगों तक बहुत सीमित माध्यमों से पहुंचती थी। एक पोस्टर, दीवारों पर लगे होर्डिंग्स या अखबारों के विज्ञापन ही लोगों को बताते थे कि कोई नई फिल्म रिलीज होने वाली है। उस दौर में दर्शकों का जुड़ाव धीरे-धीरे बनता था और प्रचार का दायरा भी सीमित होता था। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और एक क्लिक में करोड़ों लोगों तक फिल्म की जानकारी पहुंच जाती है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने फिल्मों के प्रमोशन और रिस्पॉन्स को कई गुना बढ़ा दिया है। इंस्टाग्राम, ट्विटर और अन्य प्लेटफॉर्म्स के जरिए किसी भी फिल्म की चर्चा कुछ ही सेकंड में दुनिया भर में फैल जाती है। राकेश बेदी के मुताबिक ‘धुरंधर’ जैसी फिल्में इसी नए डिजिटल दौर में रिलीज हो रही हैं, जहां दर्शकों की प्रतिक्रिया पहले के मुकाबले कई गुना तेज और व्यापक हो चुकी है। इवेंट के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि उनकी फिल्म ‘चश्मे बद्दूर’ और टीवी शो ‘ये जो है जिंदगी’ के समय भी उन्हें दर्शकों का काफी प्यार मिला था, लेकिन उस समय और आज के समय में सबसे बड़ा अंतर पैमाने का है। पहले जो सराहना सीमित दायरे में मिलती थी, वह अब सोशल मीडिया के कारण लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि आज सफलता का स्तर पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गया है।
राकेश बेदी ने अपने फिल्मी सफर को याद करते हुए यह भी बताया कि जब उन्होंने इंडस्ट्री में कदम रखा था, तब कास्टिंग को लेकर काफी सख्त नियम थे। हीरो के लिए लंबा और आकर्षक होना जरूरी माना जाता था, जबकि खलनायक के लिए अलग तरह की छवि तय होती थी। ऐसे में उनके जैसे कलाकारों के लिए जगह बनाना आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि उस समय इंडस्ट्री काफी “स्टैंडर्डाइज्ड” थी, जहां हर किरदार के लिए एक तय ढांचा होता था। उन्होंने आगे बताया कि ऐसे माहौल में कॉमेडी ही एक ऐसा रास्ता था, जिसने उन्हें इंडस्ट्री में पहचान दिलाई। राकेश बेदी के अनुसार उन्होंने कभी कॉमेडी को मजबूरी के तौर पर नहीं किया, बल्कि उन्हें हमेशा हास्य पसंद रहा है। इसी वजह से उन्होंने इस शैली को अपनाया और धीरे-धीरे यह उनकी पहचान बन गई।
‘धुरंधर’ में उनके किरदार को मिल रही सराहना पर उन्होंने खुशी जताई और कहा कि यह उनके लिए एक नई तरह की दूसरी पारी जैसा है। सोशल मीडिया के दौर में दर्शकों की प्रतिक्रिया तुरंत मिलती है, जिससे कलाकारों को अपने काम का सीधा असर समझ आता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह बदलाव इंडस्ट्री के लिए सकारात्मक है क्योंकि इससे नए और पुराने दोनों तरह के कलाकारों को एक बड़ा मंच मिल रहा है। राकेश बेदी का मानना है कि बदलते समय के साथ इंडस्ट्री भी तेजी से विकसित हुई है। जहां पहले फिल्मों की पहचान धीरे-धीरे बनती थी, वहीं अब एक अच्छा प्रदर्शन तुरंत वायरल हो सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चाहे माध्यम बदल जाए, लेकिन दर्शकों का प्यार हमेशा कलाकारों के लिए सबसे बड़ी ताकत रहता है।
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राकेश बेदी बोले- सोशल मीडिया ने बढ़ाई फिल्मों की पहुंच और असर
बालीवुड डेस्क
अभिनेता राकेश बेदी इन दिनों अपनी हालिया फिल्म ‘धुरंधर’ में निभाए गए जमीम जमाली के किरदार को लेकर चर्चा में हैं। उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इसी बीच एक इवेंट में बातचीत के दौरान राकेश बेदी ने न सिर्फ अपनी भूमिका पर बात की, बल्कि यह भी बताया कि कैसे सोशल मीडिया ने फिल्मों की पहुंच और लोकप्रियता को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने अपने लंबे करियर के अनुभवों को साझा करते हुए पुराने और नए दौर की तुलना भी की। राकेश बेदी ने कहा कि पहले के समय में फिल्मों की जानकारी लोगों तक बहुत सीमित माध्यमों से पहुंचती थी। एक पोस्टर, दीवारों पर लगे होर्डिंग्स या अखबारों के विज्ञापन ही लोगों को बताते थे कि कोई नई फिल्म रिलीज होने वाली है। उस दौर में दर्शकों का जुड़ाव धीरे-धीरे बनता था और प्रचार का दायरा भी सीमित होता था। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और एक क्लिक में करोड़ों लोगों तक फिल्म की जानकारी पहुंच जाती है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने फिल्मों के प्रमोशन और रिस्पॉन्स को कई गुना बढ़ा दिया है। इंस्टाग्राम, ट्विटर और अन्य प्लेटफॉर्म्स के जरिए किसी भी फिल्म की चर्चा कुछ ही सेकंड में दुनिया भर में फैल जाती है। राकेश बेदी के मुताबिक ‘धुरंधर’ जैसी फिल्में इसी नए डिजिटल दौर में रिलीज हो रही हैं, जहां दर्शकों की प्रतिक्रिया पहले के मुकाबले कई गुना तेज और व्यापक हो चुकी है। इवेंट के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि उनकी फिल्म ‘चश्मे बद्दूर’ और टीवी शो ‘ये जो है जिंदगी’ के समय भी उन्हें दर्शकों का काफी प्यार मिला था, लेकिन उस समय और आज के समय में सबसे बड़ा अंतर पैमाने का है। पहले जो सराहना सीमित दायरे में मिलती थी, वह अब सोशल मीडिया के कारण लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि आज सफलता का स्तर पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गया है।
राकेश बेदी ने अपने फिल्मी सफर को याद करते हुए यह भी बताया कि जब उन्होंने इंडस्ट्री में कदम रखा था, तब कास्टिंग को लेकर काफी सख्त नियम थे। हीरो के लिए लंबा और आकर्षक होना जरूरी माना जाता था, जबकि खलनायक के लिए अलग तरह की छवि तय होती थी। ऐसे में उनके जैसे कलाकारों के लिए जगह बनाना आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि उस समय इंडस्ट्री काफी “स्टैंडर्डाइज्ड” थी, जहां हर किरदार के लिए एक तय ढांचा होता था। उन्होंने आगे बताया कि ऐसे माहौल में कॉमेडी ही एक ऐसा रास्ता था, जिसने उन्हें इंडस्ट्री में पहचान दिलाई। राकेश बेदी के अनुसार उन्होंने कभी कॉमेडी को मजबूरी के तौर पर नहीं किया, बल्कि उन्हें हमेशा हास्य पसंद रहा है। इसी वजह से उन्होंने इस शैली को अपनाया और धीरे-धीरे यह उनकी पहचान बन गई।
‘धुरंधर’ में उनके किरदार को मिल रही सराहना पर उन्होंने खुशी जताई और कहा कि यह उनके लिए एक नई तरह की दूसरी पारी जैसा है। सोशल मीडिया के दौर में दर्शकों की प्रतिक्रिया तुरंत मिलती है, जिससे कलाकारों को अपने काम का सीधा असर समझ आता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह बदलाव इंडस्ट्री के लिए सकारात्मक है क्योंकि इससे नए और पुराने दोनों तरह के कलाकारों को एक बड़ा मंच मिल रहा है। राकेश बेदी का मानना है कि बदलते समय के साथ इंडस्ट्री भी तेजी से विकसित हुई है। जहां पहले फिल्मों की पहचान धीरे-धीरे बनती थी, वहीं अब एक अच्छा प्रदर्शन तुरंत वायरल हो सकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चाहे माध्यम बदल जाए, लेकिन दर्शकों का प्यार हमेशा कलाकारों के लिए सबसे बड़ी ताकत रहता है।
