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शम्मी कपूर: पढ़ाई छोड़ थिएटर से बॉलीवुड तक, और गीता बाली से हुई यादगार शादी
Bollywood news
21 अक्टूबर 1931 को जन्मे शम्मी कपूर बॉलीवुड के उन सुपरस्टार्स में शामिल हैं, जिनकी अदाकारी और डांस स्टाइल आज भी फिल्म प्रेमियों के दिलों में जिंदा है। ‘तुमसा नहीं देखा’, ‘दिल देकर देखो’, ‘जंगली’, ‘कॉलेज गर्ल’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’, ‘कश्मीर की कली’ और ‘जानवर’ जैसी फिल्मों से उन्होंने दर्शकों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई। इस साल उनकी 94वीं बर्थ एनिवर्सरी पर हम याद कर रहे हैं उनके सफर की खास बातें।
गीता बाली से रोमांटिक और फिल्मी शादी
शम्मी कपूर की गीता बाली से मुलाकात उनके डायरेक्टर दोस्त हरि वालिया ने फिल्म ‘कॉफी हाउस’ (1957) की शूटिंग के दौरान करवाई। इसके बाद ‘रंगीन रातें’ (1956) में गीता का कैमियो हुआ। शूटिंग के दौरान दोनों के बीच प्यार हो गया और शम्मी ने तय किया कि शादी सिर्फ गीता से ही होगी।
23 अगस्त 1955 को शाम गीता ने शम्मी से शादी के लिए हां कह दी, लेकिन शर्त थी कि शादी तुरंत होगी। शम्मी और हरि वालिया रातभर इंतजार करते रहे। अगले दिन सुबह 4-5 बजे बाण गंगा मंदिर में शम्मी कपूर और गीता बाली की शादी संपन्न हुई।
शादी का एक फिल्मी पल तब आया जब मांग भरने के लिए सिंदूर नहीं था। शम्मी ने अपने पर्स से लिपस्टिक निकाली और उसी से गीता की मांग भर दी। इस तरह उनकी शादी ने बॉलीवुड इतिहास में एक यादगार और रोमांटिक कहानी के तौर पर जगह बनाई।
शम्मी कपूर न केवल बॉलीवुड के डांसिंग स्टार थे, बल्कि उनके जीवन की कहानी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। पढ़ाई छोड़कर जूनियर आर्टिस्ट से स्टार बनने का सफर और गीता बाली से फिल्मी अंदाज में शादी, उनके जीवन की यादगार घटनाओं में शामिल हैं। आज भी फिल्म प्रेमी उनके गानों और डांस मूव्स को याद कर उनके स्टाइल और अदाकारी का जश्न मनाते हैं।
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शम्मी कपूर: पढ़ाई छोड़ थिएटर से बॉलीवुड तक, और गीता बाली से हुई यादगार शादी
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गीता बाली से रोमांटिक और फिल्मी शादी
शम्मी कपूर की गीता बाली से मुलाकात उनके डायरेक्टर दोस्त हरि वालिया ने फिल्म ‘कॉफी हाउस’ (1957) की शूटिंग के दौरान करवाई। इसके बाद ‘रंगीन रातें’ (1956) में गीता का कैमियो हुआ। शूटिंग के दौरान दोनों के बीच प्यार हो गया और शम्मी ने तय किया कि शादी सिर्फ गीता से ही होगी।
23 अगस्त 1955 को शाम गीता ने शम्मी से शादी के लिए हां कह दी, लेकिन शर्त थी कि शादी तुरंत होगी। शम्मी और हरि वालिया रातभर इंतजार करते रहे। अगले दिन सुबह 4-5 बजे बाण गंगा मंदिर में शम्मी कपूर और गीता बाली की शादी संपन्न हुई।
शादी का एक फिल्मी पल तब आया जब मांग भरने के लिए सिंदूर नहीं था। शम्मी ने अपने पर्स से लिपस्टिक निकाली और उसी से गीता की मांग भर दी। इस तरह उनकी शादी ने बॉलीवुड इतिहास में एक यादगार और रोमांटिक कहानी के तौर पर जगह बनाई।
शम्मी कपूर न केवल बॉलीवुड के डांसिंग स्टार थे, बल्कि उनके जीवन की कहानी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। पढ़ाई छोड़कर जूनियर आर्टिस्ट से स्टार बनने का सफर और गीता बाली से फिल्मी अंदाज में शादी, उनके जीवन की यादगार घटनाओं में शामिल हैं। आज भी फिल्म प्रेमी उनके गानों और डांस मूव्स को याद कर उनके स्टाइल और अदाकारी का जश्न मनाते हैं।
