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सुधा चंद्रन का स्पष्ट संदेश: जीवन के आख़िरी पल तक मंच और कैमरे से जुड़ी रहूंगी
बॉलीवुड न्यूज
वरिष्ठ अभिनेत्री बोलीं—काम ही मेरी पहचान, अंतिम सांस तक अभिनय और नृत्य जारी रखने की इच्छा
मुंबई। फिल्म और टेलीविजन जगत की जानी-मानी अभिनेत्री और शास्त्रीय नृत्यांगना सुधा चंद्रन ने अपने करियर और जीवन को लेकर एक बार फिर स्पष्ट विचार रखे हैं। हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वह अंतिम सांस तक काम करना चाहती हैं और चाहती हैं कि जब भी इस दुनिया से विदा लें, तब भी वह एक कलाकार के रूप में ही याद की जाएं।
सुधा चंद्रन ने कहा कि अभिनय और नृत्य उनके लिए सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उनका सपना है कि जब उनका समय आए, तब भी वह मंच और कैमरे से जुड़ी हों। उन्होंने इसे अपने भीतर की आग और जुनून से जोड़ा, जो आज भी उतना ही जीवित है जितना करियर की शुरुआत में था।
इंटरव्यू के दौरान जब उनसे इंडस्ट्री में भेदभाव को लेकर सवाल किया गया, तो सुधा चंद्रन का जवाब साफ और आत्मविश्वास से भरा था। उन्होंने कहा कि अपने लंबे करियर में उन्होंने कभी यह महसूस नहीं किया कि उनके साथ किसी तरह का भेदभाव हुआ हो। उनके मुताबिक, उन्हें दर्शकों और इंडस्ट्री से हमेशा सम्मान और अपनापन मिला है, जिसने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
अभिनेत्री ने यह भी स्वीकार किया कि वह आज भी टीवी और सिनेमा के नए किरदारों को देखकर खुद को उनसे जोड़ लेती हैं। उनका कहना था कि हर मजबूत किरदार उन्हें आकर्षित करता है और कई बार वह सोचती हैं कि काश वह भूमिका उन्हें निभाने को मिलती। यह भावना उनके भीतर के कलाकार को लगातार सक्रिय रखती है।
सुधा चंद्रन का जीवन संघर्ष और साहस की मिसाल रहा है। किशोरावस्था में हुए एक गंभीर हादसे के बाद उन्होंने न केवल जीवन में वापसी की, बल्कि कृत्रिम पैर के सहारे भरतनाट्यम जैसे कठिन नृत्य में भी पहचान बनाई। इस सफर ने उन्हें मानसिक रूप से और मजबूत बनाया, जिसका असर आज भी उनके विचारों में झलकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कलाकार के लिए काम से जुड़ा रहना केवल रोज़गार नहीं, बल्कि अस्तित्व का सवाल होता है। उनके अनुसार, जब तक शरीर और मन साथ दे, तब तक रचनात्मक काम करते रहना चाहिए। यही सोच उन्हें आज भी सक्रिय रखे हुए है।
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मुंबई। फिल्म और टेलीविजन जगत की जानी-मानी अभिनेत्री और शास्त्रीय नृत्यांगना सुधा चंद्रन ने अपने करियर और जीवन को लेकर एक बार फिर स्पष्ट विचार रखे हैं। हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वह अंतिम सांस तक काम करना चाहती हैं और चाहती हैं कि जब भी इस दुनिया से विदा लें, तब भी वह एक कलाकार के रूप में ही याद की जाएं।
सुधा चंद्रन ने कहा कि अभिनय और नृत्य उनके लिए सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उनका सपना है कि जब उनका समय आए, तब भी वह मंच और कैमरे से जुड़ी हों। उन्होंने इसे अपने भीतर की आग और जुनून से जोड़ा, जो आज भी उतना ही जीवित है जितना करियर की शुरुआत में था।
इंटरव्यू के दौरान जब उनसे इंडस्ट्री में भेदभाव को लेकर सवाल किया गया, तो सुधा चंद्रन का जवाब साफ और आत्मविश्वास से भरा था। उन्होंने कहा कि अपने लंबे करियर में उन्होंने कभी यह महसूस नहीं किया कि उनके साथ किसी तरह का भेदभाव हुआ हो। उनके मुताबिक, उन्हें दर्शकों और इंडस्ट्री से हमेशा सम्मान और अपनापन मिला है, जिसने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
अभिनेत्री ने यह भी स्वीकार किया कि वह आज भी टीवी और सिनेमा के नए किरदारों को देखकर खुद को उनसे जोड़ लेती हैं। उनका कहना था कि हर मजबूत किरदार उन्हें आकर्षित करता है और कई बार वह सोचती हैं कि काश वह भूमिका उन्हें निभाने को मिलती। यह भावना उनके भीतर के कलाकार को लगातार सक्रिय रखती है।
सुधा चंद्रन का जीवन संघर्ष और साहस की मिसाल रहा है। किशोरावस्था में हुए एक गंभीर हादसे के बाद उन्होंने न केवल जीवन में वापसी की, बल्कि कृत्रिम पैर के सहारे भरतनाट्यम जैसे कठिन नृत्य में भी पहचान बनाई। इस सफर ने उन्हें मानसिक रूप से और मजबूत बनाया, जिसका असर आज भी उनके विचारों में झलकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कलाकार के लिए काम से जुड़ा रहना केवल रोज़गार नहीं, बल्कि अस्तित्व का सवाल होता है। उनके अनुसार, जब तक शरीर और मन साथ दे, तब तक रचनात्मक काम करते रहना चाहिए। यही सोच उन्हें आज भी सक्रिय रखे हुए है।
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