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मिस वर्ल्ड: बिकिनी से शुरू हुआ था यह कॉम्पिटिशन, आज बन चुका है ग्लोबल आइकन
Bollywod
हैदराबाद में आज 31 मई को मिस वर्ल्ड 2025 का फाइनल इवेंट आयोजित हो रहा है। यह वही प्रतियोगिता है जिसकी शुरुआत 74 साल पहले केवल बिकिनी शोकेस के तौर पर हुई थी। न ब्यूटी स्कोर था, न ही कोई टैलेंट राउंड — बस टू-पीस स्विमवियर पहनकर स्टेज पर आना था। लेकिन समय के साथ इस पेजेंट ने न सिर्फ अपना स्वरूप बदला, बल्कि महिलाओं की पहचान, गरिमा और ग्लैमर को एक नई दिशा भी दी।
1951: जब सिर्फ बिकिनी पहनना ही थी 'क्वालिफिकेशन'
मिस वर्ल्ड की शुरुआत 1951 में ब्रिटेन में हुई थी। दरअसल, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन में "फेस्टिवल ऑफ ब्रिटेन" नाम से एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य लोगों को मनोरंजन और उत्सव का अनुभव देना था। अधिक भीड़ आकर्षित करने के लिए एक एंटरटेनमेंट कंपनी के पब्लिसिटी डायरेक्टर ने एक अनोखा विचार सुझाया — "बिकिनी कॉन्टेस्ट"।
इसी के तहत आयोजित हुआ 'फेस्टिवल बिकिनी कॉम्पिटिशन', जिसे बाद में ‘मिस वर्ल्ड’ नाम दिया गया।
पहली मिस वर्ल्ड बनीं थीं स्वीडन की किकी हाकनसन
इस पहले कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने वाली महिलाओं से किसी विशेष प्रतिभा या बौद्धिक परीक्षा की अपेक्षा नहीं थी। सिर्फ बिकिनी पहनकर स्टेज पर वॉक करना ही पर्याप्त था। इस आयोजन की पहली विजेता बनीं स्वीडन की किकी हाकनसन, जो आज भी इतिहास में इकलौती ऐसी मिस वर्ल्ड हैं जिन्होंने टू-पीस पहनकर ताज पहना।
बिकिनी पर बैन और विरोध के स्वर
हालांकि इस आयोजन को शुरुआत में काफी सराहना मिली, लेकिन जल्द ही यह विवादों में भी घिर गया। कई देशों — खासकर आयरलैंड और स्पेन — ने इस प्रतियोगिता में भाग लेने से इनकार कर दिया। इनका तर्क था कि महिलाओं को केवल उनके शरीर के आधार पर आंकना अस्वीकार्य है।
इस विरोध के बाद आयोजकों को नियमों में बदलाव करना पड़ा। बिकिनी की जगह वन-पीस बाथिंग सूट को अनिवार्य किया गया, और प्रतियोगिता में ब्यूटी के साथ-साथ टैलेंट, इंटेलिजेंस और सोशल अवेयरनेस को भी महत्व दिया गया।
मिस वर्ल्ड बनी ग्लोबल पहचान
समय के साथ मिस वर्ल्ड सिर्फ सौंदर्य प्रतियोगिता नहीं रही, बल्कि यह महिलाओं की सामाजिक भूमिका, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास का मंच बन गई। आज मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को कई राउंड से गुजरना होता है — जिसमें इंटरव्यू, टैलेंट शो, सोशल प्रोजेक्ट्स और सार्वजनिक भाषण शामिल होते हैं।
भारत की ओर से अब तक 6 महिलाएं मिस वर्ल्ड का खिताब जीत चुकी हैं, जिनमें रितु सिंह (1966), ऐश्वर्या राय (1994), युक्ता मुखी (1999), प्रियंका चोपड़ा (2000), मानुषी छिल्लर (2017) जैसी नामचीन हस्तियां शामिल हैं।
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मिस वर्ल्ड: बिकिनी से शुरू हुआ था यह कॉम्पिटिशन, आज बन चुका है ग्लोबल आइकन
Bollywod
1951: जब सिर्फ बिकिनी पहनना ही थी 'क्वालिफिकेशन'
मिस वर्ल्ड की शुरुआत 1951 में ब्रिटेन में हुई थी। दरअसल, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन में "फेस्टिवल ऑफ ब्रिटेन" नाम से एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसका उद्देश्य लोगों को मनोरंजन और उत्सव का अनुभव देना था। अधिक भीड़ आकर्षित करने के लिए एक एंटरटेनमेंट कंपनी के पब्लिसिटी डायरेक्टर ने एक अनोखा विचार सुझाया — "बिकिनी कॉन्टेस्ट"।
इसी के तहत आयोजित हुआ 'फेस्टिवल बिकिनी कॉम्पिटिशन', जिसे बाद में ‘मिस वर्ल्ड’ नाम दिया गया।
पहली मिस वर्ल्ड बनीं थीं स्वीडन की किकी हाकनसन
इस पहले कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने वाली महिलाओं से किसी विशेष प्रतिभा या बौद्धिक परीक्षा की अपेक्षा नहीं थी। सिर्फ बिकिनी पहनकर स्टेज पर वॉक करना ही पर्याप्त था। इस आयोजन की पहली विजेता बनीं स्वीडन की किकी हाकनसन, जो आज भी इतिहास में इकलौती ऐसी मिस वर्ल्ड हैं जिन्होंने टू-पीस पहनकर ताज पहना।
बिकिनी पर बैन और विरोध के स्वर
हालांकि इस आयोजन को शुरुआत में काफी सराहना मिली, लेकिन जल्द ही यह विवादों में भी घिर गया। कई देशों — खासकर आयरलैंड और स्पेन — ने इस प्रतियोगिता में भाग लेने से इनकार कर दिया। इनका तर्क था कि महिलाओं को केवल उनके शरीर के आधार पर आंकना अस्वीकार्य है।
इस विरोध के बाद आयोजकों को नियमों में बदलाव करना पड़ा। बिकिनी की जगह वन-पीस बाथिंग सूट को अनिवार्य किया गया, और प्रतियोगिता में ब्यूटी के साथ-साथ टैलेंट, इंटेलिजेंस और सोशल अवेयरनेस को भी महत्व दिया गया।
मिस वर्ल्ड बनी ग्लोबल पहचान
समय के साथ मिस वर्ल्ड सिर्फ सौंदर्य प्रतियोगिता नहीं रही, बल्कि यह महिलाओं की सामाजिक भूमिका, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास का मंच बन गई। आज मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को कई राउंड से गुजरना होता है — जिसमें इंटरव्यू, टैलेंट शो, सोशल प्रोजेक्ट्स और सार्वजनिक भाषण शामिल होते हैं।
भारत की ओर से अब तक 6 महिलाएं मिस वर्ल्ड का खिताब जीत चुकी हैं, जिनमें रितु सिंह (1966), ऐश्वर्या राय (1994), युक्ता मुखी (1999), प्रियंका चोपड़ा (2000), मानुषी छिल्लर (2017) जैसी नामचीन हस्तियां शामिल हैं।
