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कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन विवाद पर उर्वशी रौतेला की प्रतिक्रिया, बोलीं- परंपराओं की मर्यादा का ध्यान जरूरी
बालीवुड न्यूज़
उर्वशी ने कहा कि पहनावे के आधार पर किसी महिला को आंकना सही नहीं, लेकिन रचनात्मक स्वतंत्रता के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं का भी सम्मान होना चाहिए
रक्षाबंधन से जुड़े एक विज्ञापन को लेकर शुरू हुए विवाद पर अभिनेत्री उर्वशी रौतेला ने अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि किसी महिला के कपड़ों को देखकर उसके चरित्र या व्यक्तित्व का आकलन नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन विज्ञापन या किसी रचनात्मक प्रस्तुति में भारतीय संस्कृति और संवेदनशील परंपराओं का ध्यान रखना भी जरूरी है। यह प्रतिक्रिया कृति सेनन के एक ज्वेलरी विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर हुई आलोचना के बीच सामने आई है।
न्यूज एजेंसी IANS से बातचीत में उर्वशी ने कहा कि रचनात्मकता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जब किसी सामग्री का संबंध ऐसे त्योहार से हो जिसे करोड़ों लोग धार्मिक और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण मानते हैं, तब उसकी प्रस्तुति को लेकर अतिरिक्त संवेदनशीलता बरतनी चाहिए।
उर्वशी के मुताबिक रक्षाबंधन केवल एक सामान्य अवसर नहीं, बल्कि भारतीय परिवारों और भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा विशेष त्योहार है। इसलिए इससे संबंधित विज्ञापन तैयार करते समय उसकी सांस्कृतिक भावना को समझना जरूरी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी महिला के पहनावे पर टिप्पणी करना नहीं है, बल्कि विज्ञापन की विषयवस्तु और त्योहार की गरिमा के बीच संतुलन की बात करना है।
दरअसल, ज्वेलरी ब्रांड GIVA के रक्षाबंधन कैंपेन में कृति सेनन के पहनावे को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों के एक वर्ग ने आपत्ति जताई थी। विज्ञापन में उनके इंडो-वेस्टर्न लुक को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विवाद बढ़ने के बाद संबंधित विज्ञापन को हटा दिया गया।
इस पूरे मामले ने विज्ञापन जगत में रचनात्मक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने विज्ञापन की प्रस्तुति का समर्थन किया, जबकि दूसरे वर्ग ने त्योहार की पारंपरिक भावना को ध्यान में रखने की बात कही।
उर्वशी ने अपनी प्रतिक्रिया में इसी संतुलन पर जोर दिया। उनका कहना है कि आधुनिक सोच और रचनात्मक प्रयोग जरूरी हैं, लेकिन भारतीय त्योहारों और परंपराओं से जुड़े विषयों पर काम करते समय उनकी भावनात्मक और सांस्कृतिक अहमियत को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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