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एआर रहमान के बयान पर वहीदा रहमान की दो टूक: ‘छोटी बातों में न उलझें, यह देश हमारा है’
बालीवुड न्यूज़
सांप्रदायिक भेदभाव की आशंका पर जताई दूरी, कहा– काम में उतार-चढ़ाव समय और बदलाव का हिस्सा
प्रख्यात संगीतकार एआर रहमान के बॉलीवुड में कथित पक्षपात और सांप्रदायिक भेदभाव से जुड़े बयान पर अब दिग्गज अभिनेत्री वहीदा रहमान की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इस पूरे मुद्दे को तूल देने से बचते हुए संयमित और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही है। वहीदा रहमान ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसी छोटी-छोटी बातें हर देश में होती हैं और इन पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देने की बजाय शांति और संतोष के साथ जीवन जीना अधिक महत्वपूर्ण है।
एक मीडिया बातचीत में वहीदा रहमान ने कहा कि उन्होंने एआर रहमान के बयान के बारे में पढ़ा है, लेकिन वह ऐसे विषयों में ज्यादा उलझना पसंद नहीं करतीं। उनके मुताबिक, जब जीवन सामान्य रूप से ठीक चल रहा हो, तब विवादों और चर्चाओं पर ध्यान देना मानसिक शांति को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि यह तय करना भी मुश्किल होता है कि कौन-सी बात कितनी सच है और कितनी अफवाह, ऐसे में इन मुद्दों पर भरोसा करना या प्रतिक्रिया देना और भी जटिल हो जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि खासकर इस उम्र में वह किसी भी तरह के विवाद या बहस का हिस्सा नहीं बनना चाहतीं। वहीदा रहमान के शब्दों में, यह देश हम सभी का है और सबसे जरूरी है खुश रहना। उन्होंने इसे व्यक्तिगत शांति और संतुलन से जोड़ते हुए कहा कि जीवन में सुकून बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
वहीदा रहमान ने यह भी स्पष्ट किया कि एआर रहमान को कम काम मिलने की वजह को केवल भेदभाव से जोड़ना जरूरी नहीं है। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री की प्रकृति की ओर इशारा करते हुए कहा कि समय के साथ काम के अवसर बदलते रहते हैं। एक दौर के बाद इंडस्ट्री नई सोच, नए प्रयोग और अलग तरह की प्रस्तुतियों की मांग करने लगती है। ऐसे में कई बार बड़े और स्थापित नाम भी पीछे रह जाते हैं, जो स्वाभाविक प्रक्रिया है।
उनका कहना था कि हर कलाकार के करियर में उतार-चढ़ाव आते हैं और यह मान लेना गलत है कि जो व्यक्ति एक बार शीर्ष पर पहुंच गया, वह हमेशा वहीं बना रहेगा। बदलाव समय की सच्चाई है और इसे स्वीकार करना ही समझदारी है।
गौरतलब है कि एआर रहमान ने हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया इंटरव्यू में यह संकेत दिया था कि पिछले कुछ वर्षों में उन्हें बॉलीवुड में अपेक्षाकृत कम काम मिला है और इसके पीछे सत्ता संतुलन में बदलाव तथा संभावित सांप्रदायिक सोच भी एक कारण हो सकती है। उनके इस बयान के बाद फिल्म इंडस्ट्री में बहस तेज हो गई थी और कई कलाकारों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी थीं।
विवाद बढ़ने पर एआर रहमान ने भी सार्वजनिक रूप से सफाई देते हुए कहा था कि भारत उनके लिए प्रेरणा, घर और कर्मभूमि है तथा उनके शब्दों को गलत संदर्भ में लिया गया। वहीदा रहमान की प्रतिक्रिया को इस पूरे विवाद में संतुलन और परिपक्वता की आवाज के रूप में देखा जा रहा है, जो बहस के बजाय आत्ममंथन और शांति पर जोर देती है।
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प्रख्यात संगीतकार एआर रहमान के बॉलीवुड में कथित पक्षपात और सांप्रदायिक भेदभाव से जुड़े बयान पर अब दिग्गज अभिनेत्री वहीदा रहमान की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इस पूरे मुद्दे को तूल देने से बचते हुए संयमित और संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही है। वहीदा रहमान ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसी छोटी-छोटी बातें हर देश में होती हैं और इन पर जरूरत से ज्यादा ध्यान देने की बजाय शांति और संतोष के साथ जीवन जीना अधिक महत्वपूर्ण है।
एक मीडिया बातचीत में वहीदा रहमान ने कहा कि उन्होंने एआर रहमान के बयान के बारे में पढ़ा है, लेकिन वह ऐसे विषयों में ज्यादा उलझना पसंद नहीं करतीं। उनके मुताबिक, जब जीवन सामान्य रूप से ठीक चल रहा हो, तब विवादों और चर्चाओं पर ध्यान देना मानसिक शांति को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि यह तय करना भी मुश्किल होता है कि कौन-सी बात कितनी सच है और कितनी अफवाह, ऐसे में इन मुद्दों पर भरोसा करना या प्रतिक्रिया देना और भी जटिल हो जाता है।
उन्होंने आगे कहा कि खासकर इस उम्र में वह किसी भी तरह के विवाद या बहस का हिस्सा नहीं बनना चाहतीं। वहीदा रहमान के शब्दों में, यह देश हम सभी का है और सबसे जरूरी है खुश रहना। उन्होंने इसे व्यक्तिगत शांति और संतुलन से जोड़ते हुए कहा कि जीवन में सुकून बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
वहीदा रहमान ने यह भी स्पष्ट किया कि एआर रहमान को कम काम मिलने की वजह को केवल भेदभाव से जोड़ना जरूरी नहीं है। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री की प्रकृति की ओर इशारा करते हुए कहा कि समय के साथ काम के अवसर बदलते रहते हैं। एक दौर के बाद इंडस्ट्री नई सोच, नए प्रयोग और अलग तरह की प्रस्तुतियों की मांग करने लगती है। ऐसे में कई बार बड़े और स्थापित नाम भी पीछे रह जाते हैं, जो स्वाभाविक प्रक्रिया है।
उनका कहना था कि हर कलाकार के करियर में उतार-चढ़ाव आते हैं और यह मान लेना गलत है कि जो व्यक्ति एक बार शीर्ष पर पहुंच गया, वह हमेशा वहीं बना रहेगा। बदलाव समय की सच्चाई है और इसे स्वीकार करना ही समझदारी है।
गौरतलब है कि एआर रहमान ने हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया इंटरव्यू में यह संकेत दिया था कि पिछले कुछ वर्षों में उन्हें बॉलीवुड में अपेक्षाकृत कम काम मिला है और इसके पीछे सत्ता संतुलन में बदलाव तथा संभावित सांप्रदायिक सोच भी एक कारण हो सकती है। उनके इस बयान के बाद फिल्म इंडस्ट्री में बहस तेज हो गई थी और कई कलाकारों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी थीं।
विवाद बढ़ने पर एआर रहमान ने भी सार्वजनिक रूप से सफाई देते हुए कहा था कि भारत उनके लिए प्रेरणा, घर और कर्मभूमि है तथा उनके शब्दों को गलत संदर्भ में लिया गया। वहीदा रहमान की प्रतिक्रिया को इस पूरे विवाद में संतुलन और परिपक्वता की आवाज के रूप में देखा जा रहा है, जो बहस के बजाय आत्ममंथन और शांति पर जोर देती है।
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