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61 लाख SIP खाते हो गए बंद, क्या आपको भी अपना कर देना चाहिए; एक्सपर्ट से समझिए
Business News
मार्केट की उठा-पटक के बीच जनवरी में 61 लाख लोगों ने SIP के जरिए निवेश करना बंद कर दिया है. काफी संख्या में लोगों का भरोसा म्यूचुअल फंडों से भी उठ रहा है. ऐसे में अगर आप भी सोच रहे हैं कि क्या करें, SIP चालू रखें या बंद कर दें, तो आपकी इन बातों का जवाब आपको खबर में मिल जाएगा. आइए एक्सपर्ट के जरिए समझते हैं.
भारतीय शेयर बाजार में पिछले एक महीने से भारी गिरावट देखने का मिली है. बाजार में लगातार उठा पटक के पीछे डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ की धमकियों के बाद विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली माना जा रहा है. विदेशी दोस्तों के साथ न देने से मार्केट सुस्त पड़ गया है. हालांकि, मंगलवार को शेयर मार्केट में थोड़ी तेजी देखी गई. दलाल स्ट्रीट के लाल होने से निवेशकों के हजारों करोड़ रुपये डूब गए हैं. इसी बीच 61 लाख लोगों ने अपने SIP को पॉज कर दिया है और कुछ लोग इसे लेकर दुविधा में हैं. आइए आपको बताते हैं कि एसआईपी और म्यूचुअल फंड में निवेश को लेकर एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं.
अक्सर ऐसा कहा जाता है कि शेयर मार्केट में निवेश के मुकाबले म्यूचुअल फंड में निवेश करना सेफ होता है, जो कि काफी हद तक सही भी है. लेकिन इन मार्केट ने ऐसी चाल चली है कि म्यूचुअल फंड से भी लोगों का भरोसा उठता जा रहा है. खासतौर पर स्मॉल कैप फंड और मिड कैप फंड में निवेश करने वाले निवेशकों ने मार्केट मोड़ लिया है. मुड़ मोड़ लिया ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जनवरी 2025 में SIP स्टॉपेज रेशियो में बढ़ोतरी देखने को मिली है. एसआईपी बंद करने वाले लोगों की संख्या में 82.73% की बढ़ोतरी हुई है. जो कि बीते सालों की तुलना में सबसे अधिक है. एसआईपी के जरिए निवेश करने वालों की तुलना में एसआईपी बंद करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. जनवरी में SIP बंद करने वालों की संख्या 61.33 लाख दर्ज की गई है जो कि दिसंबर में 44.90 लाख की तुलना में ज्यादा है.
एसआईपी पर क्या है क्या बोल रहे हैं एक्सपर्ट
बाजार में बिकवाली के बीच मार्केट छोड़ कर जा रहे निवेशकों को व्हाइटओक कैपिटल एएमसी के सीईओ आशीष सोमैया ने ईटी से कहा कि अस्थिरता औसत रिटर्न को बेहतर बनाने में मदद करती है. समय का सही होना महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी भी स्तर की सटीकता के साथ लगातार हाई और लो का अनुमान लगा पाना संभव नहीं है. हालांकि, उन्होंने वे एसआईपी (सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) का सुझाव दिया है.
वहीं, Edelweiss Mutual Fund की एमडी और सीईओ राधिका गुप्ता ने ईटी को बताया कि मंदी के दौरान निवेश करना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है, एसआईपी का असली फायदा लंबी अवधि में देखने को मिलता है. उनका मानना है कि इतिहास बताता है कि बाजार में गिरावट के दौरान निवेशित रहने से मजबूत रिकवरी होती है. मंदी के दौरान एसआईपी छोड़ने का मतलब है कम कीमतों पर यूनिट खरीदने से चूकना, जिससे भविष्य में लाभ कम हो जाता है. इसलिए, वे निवेशकों को सलाह देती हैं कि वे एसआईपी को लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल गोल के साथ जोड़ें.
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61 लाख SIP खाते हो गए बंद, क्या आपको भी अपना कर देना चाहिए; एक्सपर्ट से समझिए
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भारतीय शेयर बाजार में पिछले एक महीने से भारी गिरावट देखने का मिली है. बाजार में लगातार उठा पटक के पीछे डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ की धमकियों के बाद विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली माना जा रहा है. विदेशी दोस्तों के साथ न देने से मार्केट सुस्त पड़ गया है. हालांकि, मंगलवार को शेयर मार्केट में थोड़ी तेजी देखी गई. दलाल स्ट्रीट के लाल होने से निवेशकों के हजारों करोड़ रुपये डूब गए हैं. इसी बीच 61 लाख लोगों ने अपने SIP को पॉज कर दिया है और कुछ लोग इसे लेकर दुविधा में हैं. आइए आपको बताते हैं कि एसआईपी और म्यूचुअल फंड में निवेश को लेकर एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं.
अक्सर ऐसा कहा जाता है कि शेयर मार्केट में निवेश के मुकाबले म्यूचुअल फंड में निवेश करना सेफ होता है, जो कि काफी हद तक सही भी है. लेकिन इन मार्केट ने ऐसी चाल चली है कि म्यूचुअल फंड से भी लोगों का भरोसा उठता जा रहा है. खासतौर पर स्मॉल कैप फंड और मिड कैप फंड में निवेश करने वाले निवेशकों ने मार्केट मोड़ लिया है. मुड़ मोड़ लिया ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जनवरी 2025 में SIP स्टॉपेज रेशियो में बढ़ोतरी देखने को मिली है. एसआईपी बंद करने वाले लोगों की संख्या में 82.73% की बढ़ोतरी हुई है. जो कि बीते सालों की तुलना में सबसे अधिक है. एसआईपी के जरिए निवेश करने वालों की तुलना में एसआईपी बंद करने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. जनवरी में SIP बंद करने वालों की संख्या 61.33 लाख दर्ज की गई है जो कि दिसंबर में 44.90 लाख की तुलना में ज्यादा है.
एसआईपी पर क्या है क्या बोल रहे हैं एक्सपर्ट
बाजार में बिकवाली के बीच मार्केट छोड़ कर जा रहे निवेशकों को व्हाइटओक कैपिटल एएमसी के सीईओ आशीष सोमैया ने ईटी से कहा कि अस्थिरता औसत रिटर्न को बेहतर बनाने में मदद करती है. समय का सही होना महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी भी स्तर की सटीकता के साथ लगातार हाई और लो का अनुमान लगा पाना संभव नहीं है. हालांकि, उन्होंने वे एसआईपी (सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) का सुझाव दिया है.
वहीं, Edelweiss Mutual Fund की एमडी और सीईओ राधिका गुप्ता ने ईटी को बताया कि मंदी के दौरान निवेश करना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है, एसआईपी का असली फायदा लंबी अवधि में देखने को मिलता है. उनका मानना है कि इतिहास बताता है कि बाजार में गिरावट के दौरान निवेशित रहने से मजबूत रिकवरी होती है. मंदी के दौरान एसआईपी छोड़ने का मतलब है कम कीमतों पर यूनिट खरीदने से चूकना, जिससे भविष्य में लाभ कम हो जाता है. इसलिए, वे निवेशकों को सलाह देती हैं कि वे एसआईपी को लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल गोल के साथ जोड़ें.
