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'100% शुद्ध' दावों पर CCPA की सख्ती, स्टोरिया और इंग्लिश ओवन पर ₹1-1 लाख जुर्माना
Digital Desk
भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए CCPA ने दोनों कंपनियों को पैकेजिंग, वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म से ‘100%’ शुद्धता संबंधी दावे हटाने के निर्देश दिए।
खाद्य उत्पादों के विज्ञापनों में ‘100% शुद्ध’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% आटा’ जैसे दावों पर केंद्र सरकार की उपभोक्ता संरक्षण एजेंसी ने सख्त रुख अपनाया है। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले विज्ञापनों के मामले में Storia Foods and Beverages Pvt. Ltd. और Mrs. Bectors Food Specialities Ltd. पर ₹1-1 लाख का जुर्माना लगाया है। साथ ही दोनों कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग, वेबसाइट और अन्य डिजिटल माध्यमों से ऐसे दावे तत्काल हटाने का निर्देश दिया गया है।
अथॉरिटी की जांच में पाया गया कि दोनों कंपनियों ने अपने उत्पादों की वास्तविक संरचना और विज्ञापनों में किए गए दावों के बीच स्पष्ट अंतर होने के बावजूद ‘100%’ शब्द का उपयोग किया। CCPA का मानना है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता और सामग्री के बारे में गलत धारणा बनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब खाद्य एवं पेय पदार्थ उद्योग में ‘नेचुरल’, ‘प्योर’ और ‘100%’ जैसे मार्केटिंग दावों के इस्तेमाल पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे शब्दों का प्रयोग तभी किया जाना चाहिए जब उत्पाद वास्तव में उस दावे पर खरा उतरता हो।
स्टोरिया के दावों पर सवाल
CCPA ने स्टोरिया के ‘100% टेंडर कोकोनट वाटर’ और अन्य जूस उत्पादों के विज्ञापनों की जांच की। जांच में पाया गया कि कथित नारियल पानी उत्पाद पूरी तरह प्राकृतिक नारियल पानी नहीं था, बल्कि उसमें पानी और लगभग 9.6 प्रतिशत नारियल पानी कंसंट्रेट का उपयोग किया गया था।
अथॉरिटी ने यह भी पाया कि उत्पाद में प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल किया गया था, जबकि पैकेजिंग और प्रचार सामग्री में ‘100% नेचुरल’ होने का दावा किया गया था। इसके अलावा ‘रिकॉन्स्टिट्यूटेड’ जैसे महत्वपूर्ण विवरण बेहद छोटे अक्षरों में लिखे गए थे, जिससे उपभोक्ताओं को वास्तविक जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं मिल रही थी।
इंग्लिश ओवन ब्रेड भी जांच के घेरे में
इंग्लिश ओवन ब्रांड के तहत बेची जा रही ब्रेड के विज्ञापनों में ‘100% आटा ब्रेड’, ‘100% होल व्हीट ब्रेड’ और ‘जीरो मैदा’ जैसे दावे किए गए थे। हालांकि जांच के दौरान कंपनी ने स्वीकार किया कि उत्पाद में लगभग 87 प्रतिशत होल व्हीट फ्लोर का उपयोग किया गया है।
CCPA ने कहा कि जब उत्पाद में आटे की मात्रा 100 प्रतिशत नहीं है तो ‘100% होल व्हीट’ जैसे दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं। अथॉरिटी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी विज्ञापन की व्याख्या सामान्य उपभोक्ता की समझ के आधार पर की जाएगी, न कि कंपनी द्वारा बाद में दी गई तकनीकी व्याख्याओं के आधार पर।
उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला खाद्य उद्योग के लिए महत्वपूर्ण संकेत है कि उत्पादों के प्रचार में पारदर्शिता और सटीक जानकारी देना अनिवार्य है। CCPA की इस कार्रवाई को उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और भ्रामक विज्ञापनों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आने वाले समय में अन्य कंपनियों के विज्ञापनों की भी जांच बढ़ सकती है, खासकर उन मामलों में जहां ‘100%’, ‘नेचुरल’ या ‘प्योर’ जैसे दावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उपभोक्ताओं को भी उत्पाद खरीदने से पहले पैकेजिंग पर दी गई सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी ध्यान से पढ़ने की सलाह दी जा रही है।
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'100% शुद्ध' दावों पर CCPA की सख्ती, स्टोरिया और इंग्लिश ओवन पर ₹1-1 लाख जुर्माना
Digital Desk
खाद्य उत्पादों के विज्ञापनों में ‘100% शुद्ध’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% आटा’ जैसे दावों पर केंद्र सरकार की उपभोक्ता संरक्षण एजेंसी ने सख्त रुख अपनाया है। सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले विज्ञापनों के मामले में Storia Foods and Beverages Pvt. Ltd. और Mrs. Bectors Food Specialities Ltd. पर ₹1-1 लाख का जुर्माना लगाया है। साथ ही दोनों कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग, वेबसाइट और अन्य डिजिटल माध्यमों से ऐसे दावे तत्काल हटाने का निर्देश दिया गया है।
अथॉरिटी की जांच में पाया गया कि दोनों कंपनियों ने अपने उत्पादों की वास्तविक संरचना और विज्ञापनों में किए गए दावों के बीच स्पष्ट अंतर होने के बावजूद ‘100%’ शब्द का उपयोग किया। CCPA का मानना है कि ऐसे दावे उपभोक्ताओं को उत्पाद की गुणवत्ता और सामग्री के बारे में गलत धारणा बनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब खाद्य एवं पेय पदार्थ उद्योग में ‘नेचुरल’, ‘प्योर’ और ‘100%’ जैसे मार्केटिंग दावों के इस्तेमाल पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे शब्दों का प्रयोग तभी किया जाना चाहिए जब उत्पाद वास्तव में उस दावे पर खरा उतरता हो।
स्टोरिया के दावों पर सवाल
CCPA ने स्टोरिया के ‘100% टेंडर कोकोनट वाटर’ और अन्य जूस उत्पादों के विज्ञापनों की जांच की। जांच में पाया गया कि कथित नारियल पानी उत्पाद पूरी तरह प्राकृतिक नारियल पानी नहीं था, बल्कि उसमें पानी और लगभग 9.6 प्रतिशत नारियल पानी कंसंट्रेट का उपयोग किया गया था।
अथॉरिटी ने यह भी पाया कि उत्पाद में प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल किया गया था, जबकि पैकेजिंग और प्रचार सामग्री में ‘100% नेचुरल’ होने का दावा किया गया था। इसके अलावा ‘रिकॉन्स्टिट्यूटेड’ जैसे महत्वपूर्ण विवरण बेहद छोटे अक्षरों में लिखे गए थे, जिससे उपभोक्ताओं को वास्तविक जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं मिल रही थी।
इंग्लिश ओवन ब्रेड भी जांच के घेरे में
इंग्लिश ओवन ब्रांड के तहत बेची जा रही ब्रेड के विज्ञापनों में ‘100% आटा ब्रेड’, ‘100% होल व्हीट ब्रेड’ और ‘जीरो मैदा’ जैसे दावे किए गए थे। हालांकि जांच के दौरान कंपनी ने स्वीकार किया कि उत्पाद में लगभग 87 प्रतिशत होल व्हीट फ्लोर का उपयोग किया गया है।
CCPA ने कहा कि जब उत्पाद में आटे की मात्रा 100 प्रतिशत नहीं है तो ‘100% होल व्हीट’ जैसे दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं। अथॉरिटी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी विज्ञापन की व्याख्या सामान्य उपभोक्ता की समझ के आधार पर की जाएगी, न कि कंपनी द्वारा बाद में दी गई तकनीकी व्याख्याओं के आधार पर।
उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला खाद्य उद्योग के लिए महत्वपूर्ण संकेत है कि उत्पादों के प्रचार में पारदर्शिता और सटीक जानकारी देना अनिवार्य है। CCPA की इस कार्रवाई को उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और भ्रामक विज्ञापनों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आने वाले समय में अन्य कंपनियों के विज्ञापनों की भी जांच बढ़ सकती है, खासकर उन मामलों में जहां ‘100%’, ‘नेचुरल’ या ‘प्योर’ जैसे दावों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उपभोक्ताओं को भी उत्पाद खरीदने से पहले पैकेजिंग पर दी गई सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी ध्यान से पढ़ने की सलाह दी जा रही है।
