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आम आदमी को लगेगा झटका! आने वाले दिनों में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
बिजनेस डेस्क
पेट्रोल कीमत बढ़ने के संकेत, चुनाव बाद पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, जानें कारण और असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारत में ईंधन कीमतों को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। विदेशी ब्रोकरेज रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू बाजार में कीमतें अभी स्थिर रखी गई हैं, लेकिन कंपनियां लगातार नुकसान झेल रही हैं।
चुनाव के बाद बढ़ सकते हैं दाम
जानकारों का कहना है कि पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद तेल कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। अभी तक कीमतों को स्थिर रखने का कारण राजनीतिक संवेदनशीलता माना जा रहा है, लेकिन बाजार दबाव बढ़ने के साथ ही राहत ज्यादा दिन तक जारी रहना मुश्किल दिख रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव
पिछले डेढ़ महीने में कच्चे तेल के दाम में भारी उछाल देखा गया है। फरवरी के अंत में जहां कीमत लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं मार्च के मध्य तक यह 120 डॉलर तक पहुंच गई। फिलहाल इसमें कुछ गिरावट आई है, लेकिन कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है।
तेल कंपनियों को भारी नुकसान
कच्चे तेल की महंगाई के कारण तेल विपणन कंपनियों को हर लीटर पेट्रोल पर करीब 18 रुपए और डीजल पर 35 रुपए तक का नुकसान हो रहा है। पहले यह घाटा और अधिक था, लेकिन सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद इसमें कुछ कमी आई है। इसके बावजूद कंपनियां रोजाना हजारों करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं।
आयात पर निर्भरता बढ़ा रही दबाव
भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसमें बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व और रूस से आता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में कीमतों में बदलाव का असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। बढ़ती कीमतों से चालू खाता घाटा भी बढ़ने की आशंका है।
सरकारी राजस्व पर असर
ईंधन पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी से सरकार को मिलने वाला राजस्व लगातार घट रहा है। कुछ वर्षों पहले जहां इसका योगदान काफी ज्यादा था, अब यह कम होकर सीमित स्तर पर आ गया है। अगर सरकार और कटौती करती है, तो राजस्व पर और दबाव बढ़ सकता है, जबकि कंपनियों का घाटा पूरी तरह खत्म होना भी मुश्किल है।
वैश्विक स्तर पर बढ़े दाम
भारत ही नहीं, बल्कि कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई जा चुकी हैं। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें लंबे समय बाद फिर ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका में भी ईंधन महंगा हो चुका है, जिससे साफ है कि यह एक वैश्विक ट्रेंड बन चुका है।
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आम आदमी को लगेगा झटका! आने वाले दिनों में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
बिजनेस डेस्क
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारत में ईंधन कीमतों को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। विदेशी ब्रोकरेज रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू बाजार में कीमतें अभी स्थिर रखी गई हैं, लेकिन कंपनियां लगातार नुकसान झेल रही हैं।
चुनाव के बाद बढ़ सकते हैं दाम
जानकारों का कहना है कि पश्चिम बंगाल सहित पांच राज्यों में चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद तेल कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। अभी तक कीमतों को स्थिर रखने का कारण राजनीतिक संवेदनशीलता माना जा रहा है, लेकिन बाजार दबाव बढ़ने के साथ ही राहत ज्यादा दिन तक जारी रहना मुश्किल दिख रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव
पिछले डेढ़ महीने में कच्चे तेल के दाम में भारी उछाल देखा गया है। फरवरी के अंत में जहां कीमत लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं मार्च के मध्य तक यह 120 डॉलर तक पहुंच गई। फिलहाल इसमें कुछ गिरावट आई है, लेकिन कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ रहा है।
तेल कंपनियों को भारी नुकसान
कच्चे तेल की महंगाई के कारण तेल विपणन कंपनियों को हर लीटर पेट्रोल पर करीब 18 रुपए और डीजल पर 35 रुपए तक का नुकसान हो रहा है। पहले यह घाटा और अधिक था, लेकिन सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद इसमें कुछ कमी आई है। इसके बावजूद कंपनियां रोजाना हजारों करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं।
आयात पर निर्भरता बढ़ा रही दबाव
भारत अपनी कुल जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसमें बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व और रूस से आता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में कीमतों में बदलाव का असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। बढ़ती कीमतों से चालू खाता घाटा भी बढ़ने की आशंका है।
सरकारी राजस्व पर असर
ईंधन पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी से सरकार को मिलने वाला राजस्व लगातार घट रहा है। कुछ वर्षों पहले जहां इसका योगदान काफी ज्यादा था, अब यह कम होकर सीमित स्तर पर आ गया है। अगर सरकार और कटौती करती है, तो राजस्व पर और दबाव बढ़ सकता है, जबकि कंपनियों का घाटा पूरी तरह खत्म होना भी मुश्किल है।
वैश्विक स्तर पर बढ़े दाम
भारत ही नहीं, बल्कि कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई जा चुकी हैं। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें लंबे समय बाद फिर ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका में भी ईंधन महंगा हो चुका है, जिससे साफ है कि यह एक वैश्विक ट्रेंड बन चुका है।
