होर्मुज बंद नहीं, फिर भी महंगे हो सकते हैं पेट्रोल-डीजल; सोना उछलने के संकेत

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ईरान ने जलमार्ग बंद करने से किया इनकार, लेकिन मध्य पूर्व तनाव से कच्चे तेल पर दबाव; भारत पर संभावित असर

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की आशंकाओं पर विराम लगा है। अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि फिलहाल जलमार्ग बंद करने की कोई योजना नहीं है। इसके बावजूद ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है और विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें निकट अवधि में 4–5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं।

ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर जोखिम बना हुआ है। यदि सप्लाई बाधित होती है या शिपिंग लागत बढ़ती है, तो ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच सकता है। ऐसे परिदृश्य में दिल्ली में पेट्रोल लगभग 100 रुपये प्रति लीटर और डीजल 92 रुपये प्रति लीटर के आसपास जा सकता है। भारत अपनी तेल आवश्यकता का बड़ा हिस्सा आयात करता है और आयातित कच्चे तेल का महत्वपूर्ण भाग इसी समुद्री मार्ग से आता है।

बाजार विशेषज्ञों ने तीन प्रमुख कारण बताए हैं जिनसे कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। पहला, क्षेत्र में टैंकरों पर हमलों का जोखिम, जिससे शिपिंग कंपनियां मार्ग से दूरी बना सकती हैं। दूसरा, युद्ध जैसे हालात में ‘वॉर रिस्क’ बीमा और मालभाड़ा बढ़ना, जिसका सीधा असर आयात लागत पर पड़ता है। तीसरा, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के कारण निवेशकों का रक्षात्मक रुख, जिससे कमोडिटी कीमतों में तेजी आती है।

कीमत निर्धारण के घरेलू ढांचे पर भी नजर है। भारत में खुदरा ईंधन मूल्य सरकारी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों और विनिमय दर के आधार पर संशोधित करती हैं, जबकि अंतिम उपभोक्ता मूल्य पर कर संरचना का बड़ा प्रभाव रहता है। असाधारण परिस्थितियों में सरकार करों में समायोजन या कंपनियों से मूल्य स्थिर रखने का आग्रह कर सकती है, ताकि महंगाई का दबाव सीमित रहे।

सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव के चलते कीमती धातुओं में तेजी के संकेत मिल रहे हैं। कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि अनिश्चितता बनी रहने पर सोना ऊंचे स्तरों की ओर बढ़ सकता है, जबकि चांदी में भी मजबूती संभव है। इसी तरह शेयर बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव और चुनिंदा क्षेत्रों—ऑटोमोबाइल, बैंकिंग व एफएमसीजी—पर दबाव की आशंका जताई जा रही है।

रणनीतिक स्तर पर सरकार आपूर्ति विविधीकरण और भंडारण पर फोकस बढ़ा रही है। जरूरत पड़ने पर भारत सरकार रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से आपूर्ति बढ़ाने और वैकल्पिक स्रोतों से आयात तेज करने के विकल्प पर विचार कर सकती है। वैश्विक आपूर्ति शृंखला की स्थिरता के लिए अन्य उत्पादक देशों के साथ समन्वय भी अहम माना जा रहा है।

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