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अमेरिका-ईरान तनाव से शेयर बाजार में तेज गिरावट, सेंसेक्स 1000 अंक टूटा
बिजनेस न्यूज
तेल कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितता का असर; निफ्टी 24,900 के आसपास, रियल्टी और ऑटो शेयरों में भारी बिकवाली
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के प्रभाव से भारतीय शेयर बाजार में आज तेज गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1,000 अंक से अधिक टूटकर 80,000 के स्तर के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी 50 में लगभग 300 अंकों की गिरावट के साथ यह 24,900 के करीब पहुंच गया। बाजार में व्यापक बिकवाली के बीच रियल्टी और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव देखा गया।
विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी गिरावट का प्रमुख कारण रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 10% उछलकर 79 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जिससे ऊर्जा आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
ऊर्जा कीमतों में उछाल का असर निवेशकों के रुख पर भी दिखाई दिया। सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से वायदा बाजार में सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि भू-राजनीतिक जोखिम लंबे समय तक बने रहने पर कीमती धातुओं में निवेश प्रवाह जारी रह सकता है।
वैश्विक संकेत भी कमजोर रहे। एशियाई बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जबकि अमेरिकी बाजारों ने पिछले कारोबारी सत्र में मिश्रित रुख दिखाया था। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता का सीधा प्रभाव उभरते बाजारों पर पड़ता है, जिससे विदेशी निवेश प्रवाह प्रभावित होता है।
निवेशक गतिविधियों के आंकड़े भी बाजार दबाव की पुष्टि करते हैं। हाल के सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बिकवाली का रुख अपनाया, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी कर गिरावट को सीमित करने का प्रयास किया। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक जोखिम बढ़ने पर विदेशी निवेशक आमतौर पर सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं।
क्षेत्रीय स्तर पर ऑटो, ऊर्जा और बैंकिंग शेयरों में गिरावट से व्यापक बाजार भावना प्रभावित हुई। ऊंची ईंधन लागत से कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ने की आशंका निवेशकों की चिंता का प्रमुख कारण बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की दिशा निकट अवधि में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, तेल कीमतों और निवेश प्रवाह पर निर्भर रहेगी। यदि वैश्विक तनाव कम होता है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है, हालांकि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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