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सोमवार विशेष: भगवान शिव की पूजा से कष्ट निवारण की मान्यता, जानें प्रमुख उपाय और विधि
धर्म डेस्क
शिवलिंग अभिषेक, बेलपत्र अर्पण और मंत्र जाप को लेकर देशभर में श्रद्धालुओं की आस्था; मंदिरों में बढ़ी भीड़
सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा को लेकर देशभर में श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था देखी जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार को विधि-विधान से शिव उपासना करने से मानसिक कष्टों में कमी और मनोकामनाओं की पूर्ति का विश्वास है। सुबह स्नान के बाद शिवलिंग पर जल, कच्चा दूध, शहद और बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा का व्यापक पालन किया जा रहा है।
धार्मिक आचार्यों के अनुसार सोमवार की पूजा का केंद्र शिवलिंग अभिषेक और मंत्र जाप है। श्रद्धालु 11 या 21 बेलपत्रों पर चंदन से “ॐ नमः शिवाय” लिखकर अर्पित करते हैं। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ सों सोमाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप विशेष फलदायी माना जाता है। शाम के समय शिवालय में घी का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।
मंदिर प्रबंधन समितियों के अनुसार सुबह के समय अभिषेक के लिए सबसे अधिक भीड़ उमड़ती है। कई स्थानों पर गंगाजल, दूध और पंचामृत से सामूहिक अभिषेक की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु दरिद्रता निवारण और पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना से पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
धार्मिक मान्यताओं में सफेद वस्तुओं के दान को भी सोमवार से जोड़ा जाता है। दूध, दही, चावल, चीनी और सफेद वस्त्र का दान चंद्रमा को बल देने वाला माना जाता है। वहीं आर्थिक संकट से मुक्ति के लिए शिवलिंग पर बेलपत्र के साथ अक्षत अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। विवाह और दांपत्य सुख की कामना करने वाले श्रद्धालु शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करते हैं।
आस्था से जुड़े अनुष्ठानों में कुछ सावधानियों पर भी बल दिया जाता है। पूजा में टूटे हुए चावल या खंडित बेलपत्र का उपयोग नहीं किया जाता। बेलपत्र को चिकना भाग नीचे की ओर रखकर अर्पित करने की परंपरा का पालन किया जाता है।
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