किराए की इनकम पर टैक्स के बोझ से हैं परेशान? तब ऐसे हल्का करें वजन

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रेंटल इनकम पर टैक्सेशन को समझकर सही ढंग से कर प्रबंधन किया जा सकता है. स्टैंडर्ड डिडक्शन, म्युनिसिपल टैक्स कटौती, को-ओनरशिप बेनिफिट्स और होम लोन छूट जैसी नीतियां प्रॉपर्टी मालिकों को टैक्स बचाने में मदद कर सकती हैं.

रेंटल इनकम, चाहे वह रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी से आए या कमर्शियल प्रॉपर्टी से, एक स्थिर और प्रभावी आय स्रोत हो सकता है. कई निवेशक अतिरिक्त आय और संपत्ति पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए रियल एस्टेट में निवेश करते हैं. सरकार भी किराए से होने वाली आय पर कई टैक्स लाभ प्रदान करती है, जिनका सही तरीके से उपयोग करने पर कर योग्य आय को कम किया जा सकता है. हालांकि, टैक्सेशन के नियमों को समझना और उनका सही अनुपालन करना जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित पेनल्टी से बचा जा सके.

रेंटल इनकम पर टैक्सेशन नियम और कटौती

इनकम टैक्स एक्ट के अनुसार, रेंटल इनकम “इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी” के तहत आती है. यह कुछ कटौतियों (deductions) के साथ आती है, जिनका उपयोग करदाता अपनी कर देयता (tax liability) को कम करने के लिए कर सकते हैं.

स्टैंडर्ड डिडक्शन

सेक्शन 24A के तहत, किराए से प्राप्त नेट एनुअल वैल्यू पर 30% की स्टैंडर्ड कटौती दी जाती है. यह प्रॉपर्टी के मरम्मत और रखरखाव की लागत को कवर करने के लिए दी जाती है और टैक्स देनदारी को कम करने में मदद करती है.

म्युनिसिपल टैक्स

यदि कोई प्रॉपर्टी मालिक म्युनिसिपल टैक्स (जैसे संपत्ति कर) का भुगतान करता है, तो इसे किराए से प्राप्त सकल आय से घटाया जा सकता है. हालांकि, किरायेदार द्वारा भुगतान किए गए टैक्स इस कटौती के अंतर्गत नहीं आते हैं.

वैकेंसी पीरियड

अगर कोई प्रॉपर्टी पूरे वित्तीय वर्ष में खाली रही हो या उसका किराया उम्मीद से कम मिला हो, तो कम हुए किराए को ग्रॉस एनुअल वैल्यू में समायोजित किया जा सकता है, जिससे टैक्स देनदारी घट जाती है.

को-ओनरशिप

अगर कोई प्रॉपर्टी एक से अधिक मालिकों के नाम पर है, तो प्रत्येक मालिक अपने हिस्से की रेंटल इनकम पर अलग-अलग टैक्स रिटर्न फाइल कर सकता है. इससे ओवरऑल टैक्स लायबिलिटी कम हो सकती है. उदाहरण के लिए, यदि पति-पत्नी संयुक्त रूप से एक प्रॉपर्टी के मालिक हैं और उसे किराए पर देते हैं, तो वे अपनी-अपनी हिस्सेदारी के अनुसार टैक्स भर सकते हैं.

सेक्शन 80C के तहत छूट

यदि किसी व्यक्ति ने किराए पर दी गई संपत्ति के लिए होम लोन लिया है, तो वह 1,50,000 रुपये तक की कटौती का दावा सेक्शन 80C के तहत कर सकता है.

डेप्रिसिएशन

यदि कोई प्रॉपर्टी किसी व्यवसाय का हिस्सा है (जैसे किराए पर दी गई दुकान या ऑफिस), तो टैक्सेबल इनकम को कम करने के लिए डेप्रिसिएशन का दावा किया जा सकता है. हालांकि, यह लाभ व्यक्तिगत रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर लागू नहीं होता.

रेंटल इनकम पर टैक्सेशन को समझकर सही ढंग से कर प्रबंधन किया जा सकता है. स्टैंडर्ड डिडक्शन, म्युनिसिपल टैक्स कटौती, को-ओनरशिप बेनिफिट्स और होम लोन छूट जैसी नीतियां प्रॉपर्टी मालिकों को टैक्स बचाने में मदद कर सकती हैं. सही योजना और टैक्स नियमों का पालन कर, कोई भी प्रॉपर्टी इन्वेस्टर अपनी रेंटल इनकम से अधिकतम लाभ उठा सकता है.

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23 Mar 2025 By दैनिक जागरण

किराए की इनकम पर टैक्स के बोझ से हैं परेशान? तब ऐसे हल्का करें वजन

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रेंटल इनकम, चाहे वह रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी से आए या कमर्शियल प्रॉपर्टी से, एक स्थिर और प्रभावी आय स्रोत हो सकता है. कई निवेशक अतिरिक्त आय और संपत्ति पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिए रियल एस्टेट में निवेश करते हैं. सरकार भी किराए से होने वाली आय पर कई टैक्स लाभ प्रदान करती है, जिनका सही तरीके से उपयोग करने पर कर योग्य आय को कम किया जा सकता है. हालांकि, टैक्सेशन के नियमों को समझना और उनका सही अनुपालन करना जरूरी है, ताकि किसी भी संभावित पेनल्टी से बचा जा सके.

रेंटल इनकम पर टैक्सेशन नियम और कटौती

इनकम टैक्स एक्ट के अनुसार, रेंटल इनकम “इनकम फ्रॉम हाउस प्रॉपर्टी” के तहत आती है. यह कुछ कटौतियों (deductions) के साथ आती है, जिनका उपयोग करदाता अपनी कर देयता (tax liability) को कम करने के लिए कर सकते हैं.

स्टैंडर्ड डिडक्शन

सेक्शन 24A के तहत, किराए से प्राप्त नेट एनुअल वैल्यू पर 30% की स्टैंडर्ड कटौती दी जाती है. यह प्रॉपर्टी के मरम्मत और रखरखाव की लागत को कवर करने के लिए दी जाती है और टैक्स देनदारी को कम करने में मदद करती है.

म्युनिसिपल टैक्स

यदि कोई प्रॉपर्टी मालिक म्युनिसिपल टैक्स (जैसे संपत्ति कर) का भुगतान करता है, तो इसे किराए से प्राप्त सकल आय से घटाया जा सकता है. हालांकि, किरायेदार द्वारा भुगतान किए गए टैक्स इस कटौती के अंतर्गत नहीं आते हैं.

वैकेंसी पीरियड

अगर कोई प्रॉपर्टी पूरे वित्तीय वर्ष में खाली रही हो या उसका किराया उम्मीद से कम मिला हो, तो कम हुए किराए को ग्रॉस एनुअल वैल्यू में समायोजित किया जा सकता है, जिससे टैक्स देनदारी घट जाती है.

को-ओनरशिप

अगर कोई प्रॉपर्टी एक से अधिक मालिकों के नाम पर है, तो प्रत्येक मालिक अपने हिस्से की रेंटल इनकम पर अलग-अलग टैक्स रिटर्न फाइल कर सकता है. इससे ओवरऑल टैक्स लायबिलिटी कम हो सकती है. उदाहरण के लिए, यदि पति-पत्नी संयुक्त रूप से एक प्रॉपर्टी के मालिक हैं और उसे किराए पर देते हैं, तो वे अपनी-अपनी हिस्सेदारी के अनुसार टैक्स भर सकते हैं.

सेक्शन 80C के तहत छूट

यदि किसी व्यक्ति ने किराए पर दी गई संपत्ति के लिए होम लोन लिया है, तो वह 1,50,000 रुपये तक की कटौती का दावा सेक्शन 80C के तहत कर सकता है.

डेप्रिसिएशन

यदि कोई प्रॉपर्टी किसी व्यवसाय का हिस्सा है (जैसे किराए पर दी गई दुकान या ऑफिस), तो टैक्सेबल इनकम को कम करने के लिए डेप्रिसिएशन का दावा किया जा सकता है. हालांकि, यह लाभ व्यक्तिगत रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर लागू नहीं होता.

रेंटल इनकम पर टैक्सेशन को समझकर सही ढंग से कर प्रबंधन किया जा सकता है. स्टैंडर्ड डिडक्शन, म्युनिसिपल टैक्स कटौती, को-ओनरशिप बेनिफिट्स और होम लोन छूट जैसी नीतियां प्रॉपर्टी मालिकों को टैक्स बचाने में मदद कर सकती हैं. सही योजना और टैक्स नियमों का पालन कर, कोई भी प्रॉपर्टी इन्वेस्टर अपनी रेंटल इनकम से अधिकतम लाभ उठा सकता है.

https://www.dainikjagranmpcg.com/business/if-you-are-troubled-by-tax-burden-on-rental-income/article-15062

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