- Hindi News
- बिजनेस
- क्रेडिट कार्ड खो गया या चोरी हो गया? तुरंत करें ये काम, वरना मिनटों में हो सकता है बड़ा नुकसान
क्रेडिट कार्ड खो गया या चोरी हो गया? तुरंत करें ये काम, वरना मिनटों में हो सकता है बड़ा नुकसान
बिजनेस डेस्क
क्रेडिट कार्ड खो जाए या चोरी हो जाए तो तुरंत ब्लॉक करें, ट्रांजैक्शन चेक करें, बैंक में शिकायत दर्ज करें और FIR जरूर कराएं।
क्रेडिट कार्ड खो जाए या चोरी हो जाए तो इसे हल्के में लेना सबसे बड़ी गलती हो सकती है। आज के डिजिटल दौर में कार्ड सिर्फ प्लास्टिक का टुकड़ा नहीं, सीधे आपके बैंकिंग सिस्टम का रास्ता है। ऐसे में क्रेडिट कार्ड गायब होते ही पहला काम घबराना नहीं, बल्कि तुरंत एक्शन लेना है। जरा सी देरी आपके खाते, लिमिट और डिजिटल पहचान तीनों पर भारी पड़ सकती है। कई बार लोग कार्ड मिलने की उम्मीद में इंतजार करते रहते हैं, लेकिन यही चूक बाद में महंगी पड़ती है। क्रेडिट कार्ड खो गया है तो सबसे पहले उसे तुरंत ब्लॉक कराना जरूरी है। बैंक के मोबाइल ऐप, नेट बैंकिंग या कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके यह काम फौरन किया जा सकता है। जितनी जल्दी कार्ड ब्लॉक होगा, उतना कम रिस्क रहेगा। कई बैंक अस्थायी ब्लॉक का विकल्प भी देते हैं, लेकिन अगर कार्ड चोरी का शक है तो सीधे परमानेंट ब्लॉक ही बेहतर माना जाता है।
कार्ड ब्लॉक होने के बाद अगला जरूरी काम है अपने हर ट्रांजैक्शन पर नजर डालना। SMS, ईमेल अलर्ट और बैंक ऐप की हिस्ट्री तुरंत चेक करें। यह देखना जरूरी है कि कार्ड खोने के बाद कोई अनधिकृत भुगतान तो नहीं हुआ। शुरुआती जानकारी में कई बार छोटी रकम के ट्रांजैक्शन दिखते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यहीं से बड़ा फ्रॉड शुरू होता है। अगर कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक में डिस्प्यूट दर्ज करें। अधिकारियों के अनुसार ज्यादातर बैंकों में जीरो या लिमिटेड लायबिलिटी का प्रावधान होता है, लेकिन इसका फायदा तभी मिलता है जब ग्राहक समय पर शिकायत दर्ज कराए। बैंक को मौखिक नहीं, लिखित शिकायत देना ज्यादा सुरक्षित रहता है। शिकायत नंबर लेना जरूरी है, क्योंकि आगे विवाद की स्थिति में यही सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनता है। आखिरी बार कार्ड कहां इस्तेमाल किया था, यह भी याद करें और बैंक स्टेटमेंट से मिलान करें।
क्रेडिट कार्ड चोरी हुआ है तो सिर्फ कार्ड ब्लॉक कर देना काफी नहीं माना जाता। अपने सभी डिजिटल पेमेंट अकाउंट्स, UPI ऐप, ईमेल और बैंकिंग पासवर्ड भी तुरंत बदलें। कार्ड डिटेल लीक होने का मतलब सिर्फ एक कार्ड का खतरा नहीं, पूरी डिजिटल प्रोफाइल पर रिस्क हो सकता है। PIN बदलें, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें और सेव्ड कार्ड डिटेल्स हटाएं। इसके बाद नया कार्ड जरूर अप्लाई करें, ताकि नया नंबर और नया CVV जारी हो सके। बैंकिंग जानकार मानते हैं कि पुराना कार्ड बंद होने के बाद नया कार्ड लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। अगर मामला चोरी का है तो नजदीकी थाने में FIR दर्ज कराना भी जरूरी है। FIR की कॉपी बैंक विवाद, इंश्योरेंस क्लेम और किसी भी कानूनी जांच में काम आती है।
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
क्रेडिट कार्ड खो गया या चोरी हो गया? तुरंत करें ये काम, वरना मिनटों में हो सकता है बड़ा नुकसान
बिजनेस डेस्क
क्रेडिट कार्ड खो जाए या चोरी हो जाए तो इसे हल्के में लेना सबसे बड़ी गलती हो सकती है। आज के डिजिटल दौर में कार्ड सिर्फ प्लास्टिक का टुकड़ा नहीं, सीधे आपके बैंकिंग सिस्टम का रास्ता है। ऐसे में क्रेडिट कार्ड गायब होते ही पहला काम घबराना नहीं, बल्कि तुरंत एक्शन लेना है। जरा सी देरी आपके खाते, लिमिट और डिजिटल पहचान तीनों पर भारी पड़ सकती है। कई बार लोग कार्ड मिलने की उम्मीद में इंतजार करते रहते हैं, लेकिन यही चूक बाद में महंगी पड़ती है। क्रेडिट कार्ड खो गया है तो सबसे पहले उसे तुरंत ब्लॉक कराना जरूरी है। बैंक के मोबाइल ऐप, नेट बैंकिंग या कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके यह काम फौरन किया जा सकता है। जितनी जल्दी कार्ड ब्लॉक होगा, उतना कम रिस्क रहेगा। कई बैंक अस्थायी ब्लॉक का विकल्प भी देते हैं, लेकिन अगर कार्ड चोरी का शक है तो सीधे परमानेंट ब्लॉक ही बेहतर माना जाता है।
कार्ड ब्लॉक होने के बाद अगला जरूरी काम है अपने हर ट्रांजैक्शन पर नजर डालना। SMS, ईमेल अलर्ट और बैंक ऐप की हिस्ट्री तुरंत चेक करें। यह देखना जरूरी है कि कार्ड खोने के बाद कोई अनधिकृत भुगतान तो नहीं हुआ। शुरुआती जानकारी में कई बार छोटी रकम के ट्रांजैक्शन दिखते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यहीं से बड़ा फ्रॉड शुरू होता है। अगर कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक में डिस्प्यूट दर्ज करें। अधिकारियों के अनुसार ज्यादातर बैंकों में जीरो या लिमिटेड लायबिलिटी का प्रावधान होता है, लेकिन इसका फायदा तभी मिलता है जब ग्राहक समय पर शिकायत दर्ज कराए। बैंक को मौखिक नहीं, लिखित शिकायत देना ज्यादा सुरक्षित रहता है। शिकायत नंबर लेना जरूरी है, क्योंकि आगे विवाद की स्थिति में यही सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनता है। आखिरी बार कार्ड कहां इस्तेमाल किया था, यह भी याद करें और बैंक स्टेटमेंट से मिलान करें।
क्रेडिट कार्ड चोरी हुआ है तो सिर्फ कार्ड ब्लॉक कर देना काफी नहीं माना जाता। अपने सभी डिजिटल पेमेंट अकाउंट्स, UPI ऐप, ईमेल और बैंकिंग पासवर्ड भी तुरंत बदलें। कार्ड डिटेल लीक होने का मतलब सिर्फ एक कार्ड का खतरा नहीं, पूरी डिजिटल प्रोफाइल पर रिस्क हो सकता है। PIN बदलें, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें और सेव्ड कार्ड डिटेल्स हटाएं। इसके बाद नया कार्ड जरूर अप्लाई करें, ताकि नया नंबर और नया CVV जारी हो सके। बैंकिंग जानकार मानते हैं कि पुराना कार्ड बंद होने के बाद नया कार्ड लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। अगर मामला चोरी का है तो नजदीकी थाने में FIR दर्ज कराना भी जरूरी है। FIR की कॉपी बैंक विवाद, इंश्योरेंस क्लेम और किसी भी कानूनी जांच में काम आती है।
