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भारत फिर बना क्रिप्टो अपनाने में विश्व का नंबर-1, चैनालिसिस रिपोर्ट-2025 का खुलासा
Business news
भारत ने एक बार फिर दुनिया को चौंकाते हुए लगातार तीसरे साल भी ग्लोबल क्रिप्टो एडॉप्शन इंडेक्स में पहला स्थान हासिल किया है।
चैनालिसिस रिपोर्ट-2025 के अनुसार भारत क्रिप्टो को अपनाने में सबसे आगे है। यह साफ दिखाता है कि भारतीय समाज अब क्रिप्टोकरेंसी को सिर्फ निवेश ही नहीं, बल्कि तकनीकी अवसर और भविष्य की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा मानने लगा है।
रिपोर्ट की मुख्य बातें
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रेगुलेशन की मांग: 93% लोग चाहते हैं कि भारत में क्रिप्टो को लेकर स्पष्ट नियम और कानून बनें।
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टैक्सेशन सबसे बड़ी बाधा: 84% लोगों का कहना है कि 30% टैक्स अनुचित है और इससे निवेश प्रभावित हो रहा है।
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स्पष्ट नीति का असर: 90% मानते हैं कि यदि टैक्स और नीतियां संतुलित हों तो निवेश तेजी से बढ़ेगा।
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धन निर्माण प्राथमिकता: 64% निवेशक क्रिप्टो को दीर्घकालिक संपत्ति मानकर निवेश कर रहे हैं।
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राजनीतिक महत्व: 91% लोगों ने कहा कि क्रिप्टो नीति उनके वोटिंग फैसले को प्रभावित कर सकती है।
निवेशकों की सोच
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मध्यम आय वर्ग (15-20 लाख रुपये सालाना) क्रिप्टो में सबसे ज्यादा भरोसा दिखा रहा है।
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उच्च आय वर्ग (30-35 लाख रुपये सालाना) कम से कम नियम चाहता है ताकि निवेश की स्वतंत्रता बनी रहे।
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दिल्ली, तमिलनाडु, यूपी और झारखंड में क्रिप्टो की स्वीकार्यता सबसे अधिक है।
शिक्षा और जागरूकता
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77% लोग मानते हैं कि कॉलेजों में क्रिप्टो और ब्लॉकचेन की शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए।
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44% भारतीय क्रिप्टो की जानकारी YouTube से ले रहे हैं, जबकि पारंपरिक मीडिया पर भरोसा करने वालों की संख्या कम है।
कराधान सुधार की मांग
रिपोर्ट का कहना है कि क्रिप्टो पर 30% टैक्स और 1% टीडीएस जैसे प्रावधान अपनाने में सबसे बड़ी बाधा हैं। यदि टैक्सेशन को इक्विटी बाजारों जैसा संतुलित किया जाए, तो भारत दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टो और वेब3 हब बन सकता है।
बड़ा संदेश
भारत का लगातार तीसरे साल नंबर-1 रहना सिर्फ निवेश का पैमाना नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि देश का युवा वर्ग और निवेशक नई तकनीक को भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मान रहे हैं। अब जरूरत है स्पष्ट नीतियों, संतुलित टैक्स और शिक्षा की, ताकि भारत डिजिटल क्रांति का असली नेतृत्व कर सके।
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भारत फिर बना क्रिप्टो अपनाने में विश्व का नंबर-1, चैनालिसिस रिपोर्ट-2025 का खुलासा
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चैनालिसिस रिपोर्ट-2025 के अनुसार भारत क्रिप्टो को अपनाने में सबसे आगे है। यह साफ दिखाता है कि भारतीय समाज अब क्रिप्टोकरेंसी को सिर्फ निवेश ही नहीं, बल्कि तकनीकी अवसर और भविष्य की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा मानने लगा है।
रिपोर्ट की मुख्य बातें
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रेगुलेशन की मांग: 93% लोग चाहते हैं कि भारत में क्रिप्टो को लेकर स्पष्ट नियम और कानून बनें।
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टैक्सेशन सबसे बड़ी बाधा: 84% लोगों का कहना है कि 30% टैक्स अनुचित है और इससे निवेश प्रभावित हो रहा है।
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स्पष्ट नीति का असर: 90% मानते हैं कि यदि टैक्स और नीतियां संतुलित हों तो निवेश तेजी से बढ़ेगा।
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धन निर्माण प्राथमिकता: 64% निवेशक क्रिप्टो को दीर्घकालिक संपत्ति मानकर निवेश कर रहे हैं।
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राजनीतिक महत्व: 91% लोगों ने कहा कि क्रिप्टो नीति उनके वोटिंग फैसले को प्रभावित कर सकती है।
निवेशकों की सोच
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मध्यम आय वर्ग (15-20 लाख रुपये सालाना) क्रिप्टो में सबसे ज्यादा भरोसा दिखा रहा है।
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उच्च आय वर्ग (30-35 लाख रुपये सालाना) कम से कम नियम चाहता है ताकि निवेश की स्वतंत्रता बनी रहे।
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दिल्ली, तमिलनाडु, यूपी और झारखंड में क्रिप्टो की स्वीकार्यता सबसे अधिक है।
शिक्षा और जागरूकता
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77% लोग मानते हैं कि कॉलेजों में क्रिप्टो और ब्लॉकचेन की शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए।
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44% भारतीय क्रिप्टो की जानकारी YouTube से ले रहे हैं, जबकि पारंपरिक मीडिया पर भरोसा करने वालों की संख्या कम है।
कराधान सुधार की मांग
रिपोर्ट का कहना है कि क्रिप्टो पर 30% टैक्स और 1% टीडीएस जैसे प्रावधान अपनाने में सबसे बड़ी बाधा हैं। यदि टैक्सेशन को इक्विटी बाजारों जैसा संतुलित किया जाए, तो भारत दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टो और वेब3 हब बन सकता है।
बड़ा संदेश
भारत का लगातार तीसरे साल नंबर-1 रहना सिर्फ निवेश का पैमाना नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि देश का युवा वर्ग और निवेशक नई तकनीक को भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मान रहे हैं। अब जरूरत है स्पष्ट नीतियों, संतुलित टैक्स और शिक्षा की, ताकि भारत डिजिटल क्रांति का असली नेतृत्व कर सके।
