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चीन के दबदबे से परेशान भारत, रेयर अर्थ मैग्नेट्स में आत्मनिर्भरता की चुनौती
digital desk
इलेक्ट्रिक वाहनों और क्लीन एनर्जी के बढ़ते बाजार में चीन की आपूर्ति प्रभुत्व से भारत को विकल्प तलाशना जरूरी
इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी स्टोरेज और क्लीन एनर्जी तकनीक की बढ़ती मांग के बीच, रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Elements) की आपूर्ति पर चीन का दबदबा अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन खनिज खनन और रिफाइनिंग में क्रमशः 70% और 90% हिस्सेदारी रखता है और इसे रणनीतिक लाभ के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। भारत अपनी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और तकनीकी उद्योग के लिए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
चीन का प्रभुत्व और वैश्विक स्थिति
रेयर अर्थ एलिमेंट्स 17 धातुओं का समूह हैं, जिनका उपयोग मोबाइल, कंप्यूटर, फ्लैटस्क्रीन टीवी, इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों, बैटरी, लेजर, रडार और गाइडेंस सिस्टम में किया जाता है। चीन ने सरकारी समर्थन के साथ अपने रिफाइनिंग उद्योग को मजबूत किया, जिससे अन्य देशों के लिए इस पर निर्भरता तोड़ना चुनौतीपूर्ण हो गया। सितंबर 2024 से अप्रैल 2025 के बीच चीन ने इन खनिजों के निर्यात पर पाबंदी लगाई थी, जिससे अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश भी परेशान हुए।
भारत की स्थिति और चुनौती
भारत के पास रेयर अर्थ एलिमेंट्स का पर्याप्त भंडार है, लेकिन देश की रेयर अर्थ मैग्नेट्स बनाने की क्षमता सीमित है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% हिस्सा आयात करता है, जिसमें बड़ी मात्रा चीन से आती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अगले तीन से पांच वर्षों में पूरी घरेलू वैल्यू चेन तैयार करनी होगी, जिसमें माइनिंग, प्रोसेसिंग और मैग्नेट निर्माण शामिल हैं।
सरकार और उद्योग की तैयारी
केंद्रीय सरकार ने हाल ही में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स के उत्पादन को बढ़ावा देने की योजनाओं पर काम शुरू किया है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के जरिए प्रोडक्शन क्लस्टर और प्रोसेसिंग फैसिलिटी विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि वित्तीय और नीति-सपोर्ट के बिना भारत चीन की आपूर्ति पर निर्भरता कम नहीं कर पाएगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और भविष्य
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों, सोलर सेल और बैटरी स्टोरेज की मांग लगातार बढ़ेगी। अमेरिका ने भी दो साल के भीतर ऊर्जा खनिज क्षेत्र में चीन की पकड़ कम करने की रणनीति बनाई है। भारत के लिए यह न केवल आर्थिक अवसर बल्कि सुरक्षा और तकनीकी स्वायत्तता की चुनौती भी है।
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