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FY27 में रफ्तार पकड़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था, नॉमिनल GDP ग्रोथ 11% तक पहुंचने के संकेत
Business News
भारतीय अर्थव्यवस्था आने वाले वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में और मजबूती के साथ आगे बढ़ सकती है। SBI म्यूचुअल फंड की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, FY27 में भारत की नॉमिनल GDP ग्रोथ करीब 11 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि रियल GDP ग्रोथ लगभग 7.2 प्रतिशत रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू खपत, बैंकिंग सेक्टर में बेहतर क्रेडिट ग्रोथ और सरकार व रिजर्व बैंक की ओर से मिल रहा नीतिगत समर्थन आर्थिक विस्तार को नई ऊर्जा देगा।
घरेलू मांग और क्रेडिट ग्रोथ बनेंगे ग्रोथ के इंजन
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में घरेलू खपत की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है। शहरी इलाकों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी खर्च धीरे-धीरे सुधरने के संकेत मिल रहे हैं। इसके साथ ही बैंक क्रेडिट में निरंतर सुधार से निवेश गतिविधियों को बल मिलने की उम्मीद है। SBI म्यूचुअल फंड का मानना है कि संरचनात्मक सुधारों और वैल्यू-एडेड व प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग से मध्यम अवधि में ग्रोथ ट्रेंड सकारात्मक बना रहेगा।
FY26 में भी मजबूत रहा प्रदर्शन
रिपोर्ट में बताया गया है कि FY26 की पहली छमाही के दौरान भारत की रियल GDP ग्रोथ औसतन 8 प्रतिशत के आसपास रही, जबकि नॉमिनल ग्रोथ करीब 8.8 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि नॉमिनल ग्रोथ की रफ्तार थोड़ी धीमी रही, लेकिन घरेलू मांग ने आर्थिक गतिविधियों को संतुलित बनाए रखा।
आगे चलकर FY27 में महंगाई के घटकर करीब 4 प्रतिशत तक आने की संभावना जताई गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर किसी बड़े झटके के बिना RBI ब्याज दरों में बड़े बदलाव से बच सकता है।
RBI की नीतियां और वैश्विक कारक
रिपोर्ट के मुताबिक, रिजर्व बैंक ने हाल के महीनों में बाजार में तरलता बनाए रखने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। इनमें सरकारी बॉन्ड की बड़े पैमाने पर खरीद और डॉलर-रुपया स्वैप जैसे उपाय शामिल हैं। इन नीतिगत फैसलों से वित्तीय बाजारों को स्थिरता मिली है और आगे भी इसका सकारात्मक असर दिख सकता है।
ग्रामीण खर्च, व्यापार समझौते और चुनौतियां
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर आउटलुक फिलहाल सतर्क लेकिन सकारात्मक बताया गया है। कम होती महंगाई और सरकारी कल्याण योजनाएं कमजोर खरीफ फसल के असर को काफी हद तक संतुलित कर सकती हैं। इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौता भी विकास को सहारा दे सकता है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा भारतीय उद्योगों के लिए चुनौती बनी रह सकती है। FY27 में राजकोषीय घाटा घटकर GDP के 4.2 प्रतिशत तक आने की संभावना है, जबकि सरकारी बॉन्ड की आपूर्ति बढ़कर करीब 29 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जिससे बाजार में दबाव थोड़ा बढ़ सकता है।
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FY27 में रफ्तार पकड़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था, नॉमिनल GDP ग्रोथ 11% तक पहुंचने के संकेत
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घरेलू मांग और क्रेडिट ग्रोथ बनेंगे ग्रोथ के इंजन
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में घरेलू खपत की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है। शहरी इलाकों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी खर्च धीरे-धीरे सुधरने के संकेत मिल रहे हैं। इसके साथ ही बैंक क्रेडिट में निरंतर सुधार से निवेश गतिविधियों को बल मिलने की उम्मीद है। SBI म्यूचुअल फंड का मानना है कि संरचनात्मक सुधारों और वैल्यू-एडेड व प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग से मध्यम अवधि में ग्रोथ ट्रेंड सकारात्मक बना रहेगा।
FY26 में भी मजबूत रहा प्रदर्शन
रिपोर्ट में बताया गया है कि FY26 की पहली छमाही के दौरान भारत की रियल GDP ग्रोथ औसतन 8 प्रतिशत के आसपास रही, जबकि नॉमिनल ग्रोथ करीब 8.8 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि नॉमिनल ग्रोथ की रफ्तार थोड़ी धीमी रही, लेकिन घरेलू मांग ने आर्थिक गतिविधियों को संतुलित बनाए रखा।
आगे चलकर FY27 में महंगाई के घटकर करीब 4 प्रतिशत तक आने की संभावना जताई गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर किसी बड़े झटके के बिना RBI ब्याज दरों में बड़े बदलाव से बच सकता है।
RBI की नीतियां और वैश्विक कारक
रिपोर्ट के मुताबिक, रिजर्व बैंक ने हाल के महीनों में बाजार में तरलता बनाए रखने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। इनमें सरकारी बॉन्ड की बड़े पैमाने पर खरीद और डॉलर-रुपया स्वैप जैसे उपाय शामिल हैं। इन नीतिगत फैसलों से वित्तीय बाजारों को स्थिरता मिली है और आगे भी इसका सकारात्मक असर दिख सकता है।
ग्रामीण खर्च, व्यापार समझौते और चुनौतियां
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर आउटलुक फिलहाल सतर्क लेकिन सकारात्मक बताया गया है। कम होती महंगाई और सरकारी कल्याण योजनाएं कमजोर खरीफ फसल के असर को काफी हद तक संतुलित कर सकती हैं। इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौता भी विकास को सहारा दे सकता है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा भारतीय उद्योगों के लिए चुनौती बनी रह सकती है। FY27 में राजकोषीय घाटा घटकर GDP के 4.2 प्रतिशत तक आने की संभावना है, जबकि सरकारी बॉन्ड की आपूर्ति बढ़कर करीब 29 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जिससे बाजार में दबाव थोड़ा बढ़ सकता है।
