अमेरिका में उठी आंधी में ढहा भारतीय शेयर बाजार, निवेशकों के डूबे ₹3 लाख करोड़

Business News

19 दिसंबर को बाजार में भारी गिरावट आई है. Sensex 1.20% की गिरावट के साथ बंद हुआ. बुधवार को सेंसेक्स 80,182.20 पर बंद हुआ था. यह दिन के निचले स्तर 79,020.08 तक पहुंच गया. निफ्टी भी 329 अंक गिरकर 23,870.30 पर पहुंच गया.

शेयर बाजार में मचा कोहराम थमने का नाम नही ले रहा है. बुधावार के बाद आज लगातर दुसरे दिन बाजार में भारी गिरावट देखने को मिला. Sensex 1.20% की गिरावट के साथ बंद हुआ. बुधवार को सेंसेक्स 80,182.20 पर बंद हुआ था. यह दिन के निचले स्तर 79,020.08 तक पहुंच गया. निफ्टी भी 329 अंक गिरकर 23,870.30 पर पहुंच गया. बाजार ने कुछ नुकसान की भरपाई की और अंत में सेंसेक्स 964 अंक गिरकर 79,218.05 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 247 अंक गिरकर 23,951.70 पर बंद हुआ.

सिर्फ तीन कंपनियां हरे निशान में बंद हुए

सेंसेक्स में सिर्फ तीन स्टॉक पहला सन फार्मा, दुसरा पावरग्रिड और तीसरा HUL हरे निशान में बंद हुए. बाकी सभी 27 स्टॉक लाल निशान में बंद हुए. बजाज फिनसर्व 2.50 फीसदी की गिरावट के साथ टॉप लूजर स्टॉक रहा. इस दिन छोटे और मंझले-कैप शेयरों ने बड़े शेयरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया. BSE मिडकैप इंडेक्स में 0.30 फीसदी की गिरावट आई. वहीं, BSE स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.28 फीसदी की गिरावट आई.

इतनी कंपनियों पर लगा अपर सर्किट

आज यानि गुरुवार को BSE में 4,095 स्टॉक्स में ट्रेड हुआ. इसमें कुल 1,684 स्टॉक्स हरे निशान में बंद हुए. वहीं 2,311 स्टॉक जबरदस्त गिरावट के साथ बंद हुए. 221 कंपनियों के शेयर एक साल के टॉप लेवल पर पहुंच गए. 56 स्टॉक एक साल के सबसे निचले स्तर पर रहे. 333 कंपनियों के स्टॉक अपर सर्किट में बंद हुए. वहीं, 225 लोअर सर्किट में बंद हुए.

बाजार में गिरावट के कई कारण

BSE पर लिस्टेड कंपनियों का टोटल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹452.6 लाख करोड़ से घटकर ₹450 लाख करोड़ हो गया. इससे निवेशकों को एक दिन में करीब ₹3 लाख करोड़ का नुकसान हुआ. पिछले चार दिनों में निवेशकों को ₹9 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है. आखिर शेयर बाजार में इतनी गिरावट क्यों देखने को मिल रही है. एक्सपर्ट के मुताबिक इस गिरावट के कई कारण है. आइए इसे एक-एक करके समझते है.

US Fed का असर

भारतीय बाजार में इस गिरावट का सबसे बड़ा और अहम कारण US Fed को मना जा रहा है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 18 दिसंबर को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 4.25-4.50 फीसदी कर दिया. उसने अगले कुछ सालों में ब्याज दर में धीमी कटौती का संकेत दिया. इससे बाजार का रुख नकारात्मक हो गया. फेड के इस फैसले के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट आई. साथ ही डॉलर की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई. यही कारण है कि दुनियाभर के शेयर बाजारों पर दबाव पड़ा. इसके चपेट में भारतीय शेयर बाजार भी आ गया.

विदेशी पूंजी का बाहर जाना और रुपये की गिरावट

विदेशी पूंजी का बाहर जाना और रुपये में लगातार बढ़ते गिरावट को भी इसका कारण माना जा रहा है. विदेशी इन्वेस्टर्स (FIIs) द्वारा भारतीय शेयरों की लगातार बिक्री भी बाजार में गिरावट का कारण बनी. पिछले तीन दिनों में FIIs ने ₹8,000 करोड़ से अधिक के भारतीय शेयर बेचे है. इससे बाजार में भारी दबाव पड़ा है.

दुसरी तरफ भारतीय रुपया 85.3 प्रति डॉलर के निचले स्तर पर पहुंच गया है. इससे बाजार में और दबाव पड़ा है. कमजोर रुपये से इंपोर्ट की गई चीजें महंगी हो जाती हैं. इससे महंगाई बढ़ती है और इसका असर बाजार पर पड़ता है.

कमजोर कंपनी आय

भारतीय कंपनियों की पहली और दूसरी तिमाही की इनकम कमजोर रही है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि तीसरी तीमाही को भूल जाइए. आय में सुधार केवल चौथी तिमाही से ही देखने को मिल सकता है. अगर कंपनियों की आय में तेज सुधार नहीं होता है, तो शेयर बाजार की प्रदर्शन कमजोर रह सकता है. भारत के व्यापार घाटे में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो गई है. नवंबर 2024 में व्यापार घाटा $37.84 बिलियन तक पहुंच गया है.

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19 Dec 2024 By दैनिक जागरण

अमेरिका में उठी आंधी में ढहा भारतीय शेयर बाजार, निवेशकों के डूबे ₹3 लाख करोड़

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शेयर बाजार में मचा कोहराम थमने का नाम नही ले रहा है. बुधावार के बाद आज लगातर दुसरे दिन बाजार में भारी गिरावट देखने को मिला. Sensex 1.20% की गिरावट के साथ बंद हुआ. बुधवार को सेंसेक्स 80,182.20 पर बंद हुआ था. यह दिन के निचले स्तर 79,020.08 तक पहुंच गया. निफ्टी भी 329 अंक गिरकर 23,870.30 पर पहुंच गया. बाजार ने कुछ नुकसान की भरपाई की और अंत में सेंसेक्स 964 अंक गिरकर 79,218.05 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 247 अंक गिरकर 23,951.70 पर बंद हुआ.

सिर्फ तीन कंपनियां हरे निशान में बंद हुए

सेंसेक्स में सिर्फ तीन स्टॉक पहला सन फार्मा, दुसरा पावरग्रिड और तीसरा HUL हरे निशान में बंद हुए. बाकी सभी 27 स्टॉक लाल निशान में बंद हुए. बजाज फिनसर्व 2.50 फीसदी की गिरावट के साथ टॉप लूजर स्टॉक रहा. इस दिन छोटे और मंझले-कैप शेयरों ने बड़े शेयरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया. BSE मिडकैप इंडेक्स में 0.30 फीसदी की गिरावट आई. वहीं, BSE स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.28 फीसदी की गिरावट आई.

इतनी कंपनियों पर लगा अपर सर्किट

आज यानि गुरुवार को BSE में 4,095 स्टॉक्स में ट्रेड हुआ. इसमें कुल 1,684 स्टॉक्स हरे निशान में बंद हुए. वहीं 2,311 स्टॉक जबरदस्त गिरावट के साथ बंद हुए. 221 कंपनियों के शेयर एक साल के टॉप लेवल पर पहुंच गए. 56 स्टॉक एक साल के सबसे निचले स्तर पर रहे. 333 कंपनियों के स्टॉक अपर सर्किट में बंद हुए. वहीं, 225 लोअर सर्किट में बंद हुए.

बाजार में गिरावट के कई कारण

BSE पर लिस्टेड कंपनियों का टोटल मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹452.6 लाख करोड़ से घटकर ₹450 लाख करोड़ हो गया. इससे निवेशकों को एक दिन में करीब ₹3 लाख करोड़ का नुकसान हुआ. पिछले चार दिनों में निवेशकों को ₹9 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है. आखिर शेयर बाजार में इतनी गिरावट क्यों देखने को मिल रही है. एक्सपर्ट के मुताबिक इस गिरावट के कई कारण है. आइए इसे एक-एक करके समझते है.

US Fed का असर

भारतीय बाजार में इस गिरावट का सबसे बड़ा और अहम कारण US Fed को मना जा रहा है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने 18 दिसंबर को अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाकर 4.25-4.50 फीसदी कर दिया. उसने अगले कुछ सालों में ब्याज दर में धीमी कटौती का संकेत दिया. इससे बाजार का रुख नकारात्मक हो गया. फेड के इस फैसले के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट आई. साथ ही डॉलर की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई. यही कारण है कि दुनियाभर के शेयर बाजारों पर दबाव पड़ा. इसके चपेट में भारतीय शेयर बाजार भी आ गया.

विदेशी पूंजी का बाहर जाना और रुपये की गिरावट

विदेशी पूंजी का बाहर जाना और रुपये में लगातार बढ़ते गिरावट को भी इसका कारण माना जा रहा है. विदेशी इन्वेस्टर्स (FIIs) द्वारा भारतीय शेयरों की लगातार बिक्री भी बाजार में गिरावट का कारण बनी. पिछले तीन दिनों में FIIs ने ₹8,000 करोड़ से अधिक के भारतीय शेयर बेचे है. इससे बाजार में भारी दबाव पड़ा है.

दुसरी तरफ भारतीय रुपया 85.3 प्रति डॉलर के निचले स्तर पर पहुंच गया है. इससे बाजार में और दबाव पड़ा है. कमजोर रुपये से इंपोर्ट की गई चीजें महंगी हो जाती हैं. इससे महंगाई बढ़ती है और इसका असर बाजार पर पड़ता है.

कमजोर कंपनी आय

भारतीय कंपनियों की पहली और दूसरी तिमाही की इनकम कमजोर रही है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि तीसरी तीमाही को भूल जाइए. आय में सुधार केवल चौथी तिमाही से ही देखने को मिल सकता है. अगर कंपनियों की आय में तेज सुधार नहीं होता है, तो शेयर बाजार की प्रदर्शन कमजोर रह सकता है. भारत के व्यापार घाटे में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हो गई है. नवंबर 2024 में व्यापार घाटा $37.84 बिलियन तक पहुंच गया है.

https://www.dainikjagranmpcg.com/business/indian-stock-market-collapsed-due-to-storm-in-america-investors/article-5816

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