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स्पेन से पोलैंड तक बढ़ी भारत की आर्थिक पकड़, यूरोप में तेजी से उछला भारतीय निर्यात
Business News
अमेरिका भले ही भारतीय उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दे रहा हो, लेकिन यूरोप के कई बड़े देश भारत के लिए नए भरोसेमंद बाजार बनकर उभर रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि स्पेन, जर्मनी, बेल्जियम और पोलैंड जैसे देशों में भारतीय निर्यात में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है।
सबसे तेज़ उछाल स्पेन में देखने को मिला है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से नवंबर के बीच भारत से स्पेन को किया गया निर्यात 56 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 4.7 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले साल इसी अवधि में लगभग 3 अरब डॉलर था। इसके साथ ही भारत के कुल निर्यात में स्पेन की हिस्सेदारी बढ़कर 2.4 प्रतिशत हो गई है, जो यूरोपीय देशों में सबसे बड़ी छलांग मानी जा रही है।
जर्मनी में भी भारतीय उत्पादों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। इसी अवधि में जर्मनी को भारत का निर्यात 9.3 प्रतिशत बढ़कर 7.5 अरब डॉलर के आसपास पहुंच गया। भारत के कुल निर्यात में जर्मनी की हिस्सेदारी अब करीब 2.6 प्रतिशत हो चुकी है, जो स्थिर और भरोसेमंद व्यापारिक रिश्तों की ओर इशारा करती है।
बेल्जियम को भारत का निर्यात भी बढ़त के रास्ते पर है और यह 4.4 अरब डॉलर के स्तर को पार कर चुका है। वहीं, पोलैंड में भी भारतीय निर्यात में करीब 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे यह साफ होता है कि भारत केवल पारंपरिक बाजारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नए यूरोपीय देशों में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहा है।
संतुलित हो रही है भारत की यूरोप रणनीति
स्पेन में तेज़ बढ़ोतरी, जर्मनी में स्थिर मांग और बेल्जियम-पोलैंड जैसे देशों में निरंतर विस्तार यह दिखाता है कि भारत की निर्यात रणनीति अब ज्यादा संतुलित और विविध हो रही है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चल रही बातचीत से आने वाले समय में व्यापार को और रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
यूरोपीय संघ बना भारत का सबसे बड़ा साझेदार
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 136 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। इसमें भारत का निर्यात लगभग 76 अरब डॉलर रहा। यूरोपीय संघ अब भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता लागू होता है, तो कपड़ा, दवाइयां, स्टील, पेट्रोलियम उत्पाद और इलेक्ट्रिकल उपकरण जैसे भारतीय उत्पाद यूरोपीय बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे।
