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6 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंची महंगाई, सरकार के फैसलों का दिखा असर
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देश की आम जनता के लिए राहत भरी खबर है।
मार्च महीने में रिटेल महंगाई दर घटकर 3.34% रह गई है, जो पिछले 6 वर्षों का सबसे निचला स्तर है। वित्त मंत्रालय ने इस गिरावट का श्रेय सरकार की नीतिगत फैसलों और आरबीआई की मौद्रिक नीति को दिया है।
महंगाई में गिरावट: क्या कहते हैं आंकड़े?
वित्त वर्ष 2025 की शुरुआत में ही महंगाई में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई फरवरी में जहां 3.61% थी, वहीं मार्च में यह गिरकर 3.34% पर आ गई। एक साल पहले, यानी मार्च 2024 में यही आंकड़ा 4.85% था। यानी साल भर में महंगाई दर में करीब 1.5% की गिरावट देखी गई है।
सरकार और आरबीआई की नीतियों ने निभाई बड़ी भूमिका
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह गिरावट कोई संयोग नहीं, बल्कि नीतिगत फैसलों का परिणाम है। मंत्रालय के अनुसार:
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आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी ने महंगाई नियंत्रण में अहम भूमिका निभाई।
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सरकार ने खाद्य आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखी, जिससे मांग और आपूर्ति में संतुलन बना रहा।
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खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट और उच्च आधार प्रभाव के कारण भी CPI में गिरावट दर्ज की गई।
RBI गवर्नर का बयान: आने वाले समय में और राहत संभव
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक में बताया कि महंगाई में कमी का ट्रेंड जारी है। उन्होंने कहा कि यह गिरावट मुख्य रूप से फूड प्राइस में आई नरमी की वजह से है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वित्त वर्ष 2026 में महंगाई दर और नीचे जा सकती है।
क्या मतलब है आम आदमी के लिए?
महंगाई दर में इस गिरावट से रोजमर्रा के जीवन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है:
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खाद्य पदार्थ और आवश्यक वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं।
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ब्याज दरों में स्थिरता आने की संभावना बढ़ेगी।
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उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बल मिलेगा।
नीतिगत स्थिरता से मिला महंगाई पर काबू
देश में महंगाई दर का 6 साल के निचले स्तर पर पहुंचना भारत की मजबूत आर्थिक रणनीति का संकेत है। सरकार और आरबीआई की समन्वित कोशिशों से यह संभव हुआ है। यदि यही रुख जारी रहा, तो देश की जनता को आने वाले महीनों में और राहत मिलने की उम्मीद है।
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6 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंची महंगाई, सरकार के फैसलों का दिखा असर
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मार्च महीने में रिटेल महंगाई दर घटकर 3.34% रह गई है, जो पिछले 6 वर्षों का सबसे निचला स्तर है। वित्त मंत्रालय ने इस गिरावट का श्रेय सरकार की नीतिगत फैसलों और आरबीआई की मौद्रिक नीति को दिया है।
महंगाई में गिरावट: क्या कहते हैं आंकड़े?
वित्त वर्ष 2025 की शुरुआत में ही महंगाई में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई फरवरी में जहां 3.61% थी, वहीं मार्च में यह गिरकर 3.34% पर आ गई। एक साल पहले, यानी मार्च 2024 में यही आंकड़ा 4.85% था। यानी साल भर में महंगाई दर में करीब 1.5% की गिरावट देखी गई है।
सरकार और आरबीआई की नीतियों ने निभाई बड़ी भूमिका
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह गिरावट कोई संयोग नहीं, बल्कि नीतिगत फैसलों का परिणाम है। मंत्रालय के अनुसार:
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आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी ने महंगाई नियंत्रण में अहम भूमिका निभाई।
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सरकार ने खाद्य आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखी, जिससे मांग और आपूर्ति में संतुलन बना रहा।
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खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट और उच्च आधार प्रभाव के कारण भी CPI में गिरावट दर्ज की गई।
RBI गवर्नर का बयान: आने वाले समय में और राहत संभव
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक में बताया कि महंगाई में कमी का ट्रेंड जारी है। उन्होंने कहा कि यह गिरावट मुख्य रूप से फूड प्राइस में आई नरमी की वजह से है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वित्त वर्ष 2026 में महंगाई दर और नीचे जा सकती है।
क्या मतलब है आम आदमी के लिए?
महंगाई दर में इस गिरावट से रोजमर्रा के जीवन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है:
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खाद्य पदार्थ और आवश्यक वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं।
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ब्याज दरों में स्थिरता आने की संभावना बढ़ेगी।
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उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बल मिलेगा।
नीतिगत स्थिरता से मिला महंगाई पर काबू
देश में महंगाई दर का 6 साल के निचले स्तर पर पहुंचना भारत की मजबूत आर्थिक रणनीति का संकेत है। सरकार और आरबीआई की समन्वित कोशिशों से यह संभव हुआ है। यदि यही रुख जारी रहा, तो देश की जनता को आने वाले महीनों में और राहत मिलने की उम्मीद है।
