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लैपटॉप-डेस्कटॉप होंगे महंगे: इस साल कीमतों में 35% तक उछाल की आशंका
बिजनेस न्यूज
मेमोरी चिप, प्रोसेसर और GPU के दाम बढ़ने से बाजार पर असर; मार्च में 8-10% और बढ़ोतरी की संभावना, स्टूडेंट और बजट यूजर्स पर सबसे ज्यादा प्रभाव।
देश में आने वाले महीनों में लैपटॉप और डेस्कटॉप खरीदना पहले से कहीं ज्यादा महंगा हो सकता है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का अनुमान है कि प्रोसेसर, मेमोरी और ग्राफिक्स कार्ड जैसे प्रमुख कंपोनेंट्स की कीमतें बढ़ने के कारण इस साल कंप्यूटर की कीमतों में कुल मिलाकर 30 से 35 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा सकती है। इसके चलते कंप्यूटर बाजार की वृद्धि दर पर भी असर पड़ने की संभावना है।
मार्केट एनालिस्ट्स के मुताबिक, हाल के महीनों में कंप्यूटर के अहम पार्ट्स जैसे RAM, GPU और मेमोरी चिप्स की कीमतों में तेज उछाल आया है। इसी वजह से लैपटॉप और डेस्कटॉप की कीमतें अब तक लगभग 10 से 12 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। उद्योग से जुड़े विश्लेषकों का कहना है कि मार्च के दौरान ही कीमतों में 8 से 10 प्रतिशत तक और वृद्धि हो सकती है, जबकि आने वाले महीनों में यह बढ़ोतरी आगे भी जारी रहने की संभावना है।
इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। जिन लैपटॉप की कीमत पहले 30 हजार से 35 हजार रुपये के बीच होती थी, वे अब करीब 45 हजार रुपये तक पहुंचने लगे हैं। इससे खास तौर पर छात्रों, घरेलू उपयोगकर्ताओं और पहली बार कंप्यूटर खरीदने वाले लोगों के लिए नई डिवाइस खरीदना कठिन हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कंपोनेंट्स की कीमतों में तेजी के पीछे कई वैश्विक कारण हैं। टेक इंडस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसके चलते कंपनियां अपने प्रोडक्शन का बड़ा हिस्सा हाई-एंड सर्वर और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की ओर शिफ्ट कर रही हैं। इससे सामान्य लैपटॉप और डेस्कटॉप में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स की उपलब्धता कम हो रही है और कीमतें बढ़ रही हैं।
इसके अलावा एंट्री-लेवल प्रोसेसर की सीमित उपलब्धता ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सप्लाई चेन की यह स्थिति अगले कुछ तिमाहियों तक बनी रह सकती है।
भूराजनीतिक परिस्थितियां भी टेक बाजार को प्रभावित कर रही हैं। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता के कारण ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है। यदि यह स्थिति लंबी चली तो सेमीकंडक्टर निर्माण की लागत और बढ़ सकती है, जिससे चिप्स और कंप्यूटर उपकरणों की कीमतों में और वृद्धि संभव है।
गौरतलब है कि 2025 भारतीय पीसी बाजार के लिए रिकॉर्ड वर्ष रहा था। उद्योग के आंकड़ों के अनुसार पिछले साल लगभग 1.59 करोड़ यूनिट्स की शिपमेंट हुई थी, जो सालाना आधार पर 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि थी। हालांकि, इस साल बढ़ती कीमतों के कारण मांग में कमी आने की संभावना जताई जा रही है और बाजार की वृद्धि दर 7 से 8 प्रतिशत तक घट सकती है।
बढ़ती कीमतों के बीच कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नई रणनीतियां अपना रही हैं। टेक ब्रांड्स लैपटॉप के बेस कॉन्फिगरेशन में बदलाव कर रहे हैं और आसान फाइनेंस स्कीम, ईएमआई और प्रमोशनल ऑफर्स के जरिए बिक्री बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि अगर वैश्विक सप्लाई चेन में सुधार नहीं हुआ तो कंप्यूटर की कीमतों में राहत मिलने में समय लग सकता है। फिलहाल अनुमान है कि 2027 से पहले कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना कम है।
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