मिडिल ईस्ट में जंग तेज: इजरायल का आरोप, ईरान ने क्लस्टर बमों से किया हमला, 300 मिसाइलों से दहला तेल-अवीव

अंतर्राष्ट्रीय न्यूज

By Rohit.P
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ईरान-इज़रायल युद्ध के बीच क्लस्टर बमों के इस्तेमाल का बड़ा दावा। इज़रायल के अनुसार 300 मिसाइल हमलों में कई क्लस्टर वारहेड शामिल, क्षेत्रीय तनाव और ऊर्जा संकट बढ़ा।

मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच इज़रायल डिफेंस फोर्सेस ने ईरान पर एक गंभीर आरोप लगाया है। इज़रायली सेना का कहना है कि ईरान की ओर से दागी जा रही कुछ बैलिस्टिक मिसाइलों में क्लस्टर बम वारहेड लगाए जा रहे हैं। यह दावा ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव लगातार तेज होता जा रहा है और पूरे क्षेत्र में तनाव का स्तर बढ़ता जा रहा है।

इज़रायली सेना के मुताबिक अब तक ईरान की ओर से तेल-अवीव समेत कई शहरों की दिशा में लगभग 300 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी जा चुकी हैं। सेना का आरोप है कि इन मिसाइलों में से कम से कम आधी मिसाइलों में क्लस्टर वारहेड का उपयोग किया गया, जिससे बड़े इलाके में व्यापक नुकसान की आशंका पैदा हो जाती है।

क्लस्टर बम क्या होते हैं और क्यों विवादित हैं

क्लस्टर बम ऐसे हथियार होते हैं जिनका वारहेड हवा में फटकर कई छोटे-छोटे विस्फोटकों में बंट जाता है। इन्हें सब-म्यूनिशन कहा जाता है। जब वारहेड हवा में फटता है तो ये छोटे बम बड़ी संख्या में अलग-अलग दिशाओं में फैल जाते हैं और जमीन पर गिरकर विस्फोट करते हैं। कई बार ये बिना फटे भी रह जाते हैं, जो बाद में भी लोगों के लिए खतरा बने रहते हैं।

सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार क्लस्टर हथियारों का प्रभाव क्षेत्र काफी बड़ा होता है और ये कई किलोमीटर के इलाके में अनियंत्रित तरीके से फैल सकते हैं। यही वजह है कि इनके इस्तेमाल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी विवाद रहा है। 2008 में क्लस्टर म्यूनिशन कन्वेंशन के तहत ऐसे हथियारों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया था, हालांकि कई बड़े देश इस समझौते के हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं।

येरुशलम के पास खुले क्षेत्र में हुआ विस्फोट

इज़रायली सेना ने बताया कि मंगलवार को दागी गई अधिकांश मिसाइलों को वायु रक्षा प्रणाली ने हवा में ही रोक लिया। इसके बावजूद एक बड़ी वारहेड वाली मिसाइल येरुशलम के पास बेइत शेमेश क्षेत्र के बाहर खुले इलाके में गिरकर फट गई। सेना का दावा है कि इस मिसाइल में क्लस्टर बम वारहेड का इस्तेमाल किया गया था।

हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने आसपास के क्षेत्रों में जांच और तलाशी अभियान शुरू कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे हथियारों के कारण लंबे समय तक सुरक्षा खतरा बना रह सकता है।

ईरानी हमलों में इज़रायल में हताहत

इज़रायल के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दो हजार से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। कई शहरों में इमारतों और बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।

यह स्थिति तब बनी जब अमेरिका और इज़रायल की ओर से ईरान के ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई शुरू की गई, जिसके बाद ईरान ने जवाबी हमले के तौर पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की श्रृंखला शुरू कर दी।

लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर कार्रवाई

इज़रायली सेना ने यह भी कहा है कि उसने लेबनान में हिजबुल्लाह से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाते हुए कई हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में कथित तौर पर अल-क़र्ड अल-हसन एसोसिएशन की संपत्तियों और भंडारण स्थलों को निशाना बनाया गया।

इज़रायल का दावा है कि इन ठिकानों का इस्तेमाल हथियार खरीदने और संगठन से जुड़े लोगों को आर्थिक सहायता देने के लिए किया जाता था। सेना का कहना है कि यह अभियान हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

हिजबुल्लाह कमांडर की मौत का दावा

इज़रायली सेना ने लेबनान के ज्वाया क्षेत्र में हिजबुल्लाह के एक वरिष्ठ कमांडर को मार गिराने का भी दावा किया है। सेना के अनुसार ‘नस्सर यूनिट’ के कमांडर हसन सलामेह को सटीक हमले में निशाना बनाया गया।

इज़रायल का कहना है कि यह कमांडर संगठन के भीतर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल रहा था और उसकी गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानी जा रही थीं।

ईरान के जवाबी हमले और क्षेत्रीय तनाव

इस संघर्ष का असर पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन के जरिए अमेरिकी सैन्य अड्डों, दूतावासों और कई खाड़ी देशों के ऊर्जा और नागरिक ढांचे को भी निशाना बनाने की कोशिश की है।

संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन जैसे देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ सकता है।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर

इस युद्ध का सबसे बड़ा प्रभाव ऊर्जा आपूर्ति पर देखने को मिल रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।

यदि इस क्षेत्र में आवाजाही बाधित होती है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

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