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मेक इन इंडिया के 10 साल हुए पूरे, अब है 100 बिलियन डॉलर FDI आकर्षित करने की योजना, क्या मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर होगा मालामाल?
BUSINEES NEWS
भारत सरकार ने "मेक इन इंडिया" कार्यक्रम के तहत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. DPIIT सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने बताया कि सरकार ने आगामी वर्षों में वार्षिक 100 बिलियन डॉलर FDI आकर्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
भारत सरकार ने "मेक इन इंडिया" कार्यक्रम के तहत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. DPIIT सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने बताया कि सरकार ने आगामी वर्षों में वार्षिक 100 बिलियन डॉलर FDI आकर्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
वर्तमान में भारत में हर साल 70-80 बिलियन डॉलर का FDI आ रहा है जिसे बढ़ाकर 100 बिलियन डॉलर करने की योजना है. "मेक इन इंडिया" पहल के 10 साल पूरे होने पर भाटिया ने यह जानकारी दी.
इस पहल का उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश को आकर्षित करना, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना है. भाटिया ने कहा कि इस कार्यक्रम ने मैन्युफैक्चरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, और निर्यात में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं. उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना, FDI सुधार, और बुनियादी ढांचे के विकास जैसी नीतियों ने घरेलू और विदेशी निवेश को सफलतापूर्वक आकर्षित किया है.
हालांकि रोजगार सृजन और छोटे एवं मध्यम उद्यमों (SME) की वृद्धि में चुनौतियाँ बनी हुई हैं, लेकिन इस पहल ने पिछले दशक में भारत की औद्योगिक क्षमता और निर्यात प्रतिस्पर्धा को काफी बढ़ाया है. पिछले 10 वर्षों में 667.4 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आया, जबकि 2004-14 की तुलना में यह आंकड़ा 304.1 बिलियन डॉलर था. 2014-24 के बीच मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में FDI इक्विटी प्रवाह 165 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया, जो कि 2004-14 की तुलना में 69 प्रतिशत अधिक है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना की सफलता को लेकर कहा कि आज 99 प्रतिशत मोबाइल फोन भारत में निर्मित होते हैं और भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन गया है. उन्होंने बताया कि 2014 में केवल दो मोबाइल निर्माण इकाइयाँ थीं, जो आज बढ़कर 200 से अधिक हो गई हैं. मोबाइल निर्यात में भी 1,556 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.2 ट्रिलियन रुपये तक का अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है, जो कि 7,500 प्रतिशत है.
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भारत सरकार ने "मेक इन इंडिया" कार्यक्रम के तहत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. DPIIT सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने बताया कि सरकार ने आगामी वर्षों में वार्षिक 100 बिलियन डॉलर FDI आकर्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
वर्तमान में भारत में हर साल 70-80 बिलियन डॉलर का FDI आ रहा है जिसे बढ़ाकर 100 बिलियन डॉलर करने की योजना है. "मेक इन इंडिया" पहल के 10 साल पूरे होने पर भाटिया ने यह जानकारी दी.
इस पहल का उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश को आकर्षित करना, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना है. भाटिया ने कहा कि इस कार्यक्रम ने मैन्युफैक्चरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर, रक्षा, और निर्यात में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं. उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना, FDI सुधार, और बुनियादी ढांचे के विकास जैसी नीतियों ने घरेलू और विदेशी निवेश को सफलतापूर्वक आकर्षित किया है.
हालांकि रोजगार सृजन और छोटे एवं मध्यम उद्यमों (SME) की वृद्धि में चुनौतियाँ बनी हुई हैं, लेकिन इस पहल ने पिछले दशक में भारत की औद्योगिक क्षमता और निर्यात प्रतिस्पर्धा को काफी बढ़ाया है. पिछले 10 वर्षों में 667.4 बिलियन डॉलर का विदेशी निवेश आया, जबकि 2004-14 की तुलना में यह आंकड़ा 304.1 बिलियन डॉलर था. 2014-24 के बीच मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में FDI इक्विटी प्रवाह 165 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया, जो कि 2004-14 की तुलना में 69 प्रतिशत अधिक है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना की सफलता को लेकर कहा कि आज 99 प्रतिशत मोबाइल फोन भारत में निर्मित होते हैं और भारत अब विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन गया है. उन्होंने बताया कि 2014 में केवल दो मोबाइल निर्माण इकाइयाँ थीं, जो आज बढ़कर 200 से अधिक हो गई हैं. मोबाइल निर्यात में भी 1,556 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.2 ट्रिलियन रुपये तक का अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है, जो कि 7,500 प्रतिशत है.
