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रेलवे के नॉन-वेज मेन्यू पर NHRC सख्त, हलाल-झटका विवाद में तीन मंत्रालयों से नई रिपोर्ट तलब
नेशनल न्यूज
रेल में परोसे जा रहे मांस की कटिंग पद्धति को लेकर उठे धार्मिक स्वतंत्रता और पारदर्शिता के सवाल, आयोग ने यात्रियों की पसंद और समान अवसरों को बताया मूल अधिकार
भारतीय रेल में परोसे जाने वाले नॉन-वेज भोजन को लेकर उठे विवाद पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने रेलवे बोर्ड, खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और पर्यटन मंत्रालय से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामला रेल और आईआरसीटीसी के माध्यम से केवल हलाल पद्धति से तैयार मांस परोसने के आरोपों से जुड़ा है, जिसे लेकर धार्मिक स्वतंत्रता, यात्रियों की पसंद और रोजगार के अवसरों पर असर पड़ने की बात कही गई है।
यह कार्रवाई 21 नवंबर 2025 को दर्ज एक शिकायत के आधार पर की गई है, जिस पर 5 जनवरी 2026 को आयोग में सुनवाई हुई थी। शिकायत में कहा गया कि रेल यात्रियों को यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती कि परोसा जा रहा मांस हलाल है या झटका, जबकि यह कई समुदायों के लिए आस्था और आहार से जुड़ा संवेदनशील विषय है।
आयोग का कहना है कि यात्रियों को भोजन से जुड़ी पूरी जानकारी मिलना उनका अधिकार है। यदि किसी सार्वजनिक सेवा में केवल एक ही धार्मिक पद्धति से तैयार भोजन उपलब्ध कराया जाता है, तो यह समानता और विकल्प की भावना के खिलाफ हो सकता है। NHRC ने यह भी रेखांकित किया कि ऐसी व्यवस्था से उन समुदायों के रोजगार प्रभावित हो सकते हैं, जो पारंपरिक रूप से झटका पद्धति से जुड़े रहे हैं।
इससे पहले रेलवे की कैटरिंग इकाई आईआरसीटीसी ने आयोग को सौंपी रिपोर्ट में दावा किया था कि उसके पास हलाल प्रमाणन को अनिवार्य करने की कोई नीति नहीं है और वह केवल FSSAI के मानकों का पालन करती है। हालांकि, आयोग ने इस रिपोर्ट को अधूरी बताते हुए कहा कि इसमें ठेकेदारों की स्थिति, भोजन की पद्धति और यात्रियों को दी जा रही सूचना का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
NHRC ने रेलवे बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह सभी ट्रेनों, स्टेशनों, रेलवे होटलों और फूड प्लाज़ा में भोजन आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों की सूची प्रस्तुत करे। साथ ही यह भी बताया जाए कि कौन-सा ठेकेदार हलाल, झटका या दोनों प्रकार का मांस परोस रहा है और यात्रियों को इसकी जानकारी किस तरह दी जाती है।
आयोग ने सिख रहत मर्यादा का उल्लेख करते हुए कहा कि अमृतधारी सिखों के लिए मुस्लिम तरीके से काटे गए जानवर का मांस वर्जित है। ऐसे में सूचना का अभाव उनकी धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है।
इसके अलावा, FSSAI को अपने खाद्य मानकों में मांस कटिंग पद्धति से जुड़े प्रावधानों को शामिल करने पर रिपोर्ट देने को कहा गया है। पर्यटन मंत्रालय से भी होटल रेटिंग और वर्गीकरण में इस जानकारी के खुलासे को अनिवार्य करने की संभावनाओं पर जवाब मांगा गया है।
NHRC ने स्पष्ट किया है कि यह मामला किसी एक समुदाय के पक्ष या विरोध का नहीं, बल्कि पारदर्शिता, समानता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा है। आयोग की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि सार्वजनिक परिवहन और आतिथ्य सेवाओं में भोजन संबंधी जानकारी को लेकर क्या नए दिशानिर्देश लागू किए जाएं।
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भारतीय रेल में परोसे जाने वाले नॉन-वेज भोजन को लेकर उठे विवाद पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने रेलवे बोर्ड, खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और पर्यटन मंत्रालय से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामला रेल और आईआरसीटीसी के माध्यम से केवल हलाल पद्धति से तैयार मांस परोसने के आरोपों से जुड़ा है, जिसे लेकर धार्मिक स्वतंत्रता, यात्रियों की पसंद और रोजगार के अवसरों पर असर पड़ने की बात कही गई है।
यह कार्रवाई 21 नवंबर 2025 को दर्ज एक शिकायत के आधार पर की गई है, जिस पर 5 जनवरी 2026 को आयोग में सुनवाई हुई थी। शिकायत में कहा गया कि रेल यात्रियों को यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती कि परोसा जा रहा मांस हलाल है या झटका, जबकि यह कई समुदायों के लिए आस्था और आहार से जुड़ा संवेदनशील विषय है।
आयोग का कहना है कि यात्रियों को भोजन से जुड़ी पूरी जानकारी मिलना उनका अधिकार है। यदि किसी सार्वजनिक सेवा में केवल एक ही धार्मिक पद्धति से तैयार भोजन उपलब्ध कराया जाता है, तो यह समानता और विकल्प की भावना के खिलाफ हो सकता है। NHRC ने यह भी रेखांकित किया कि ऐसी व्यवस्था से उन समुदायों के रोजगार प्रभावित हो सकते हैं, जो पारंपरिक रूप से झटका पद्धति से जुड़े रहे हैं।
इससे पहले रेलवे की कैटरिंग इकाई आईआरसीटीसी ने आयोग को सौंपी रिपोर्ट में दावा किया था कि उसके पास हलाल प्रमाणन को अनिवार्य करने की कोई नीति नहीं है और वह केवल FSSAI के मानकों का पालन करती है। हालांकि, आयोग ने इस रिपोर्ट को अधूरी बताते हुए कहा कि इसमें ठेकेदारों की स्थिति, भोजन की पद्धति और यात्रियों को दी जा रही सूचना का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
NHRC ने रेलवे बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह सभी ट्रेनों, स्टेशनों, रेलवे होटलों और फूड प्लाज़ा में भोजन आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों की सूची प्रस्तुत करे। साथ ही यह भी बताया जाए कि कौन-सा ठेकेदार हलाल, झटका या दोनों प्रकार का मांस परोस रहा है और यात्रियों को इसकी जानकारी किस तरह दी जाती है।
आयोग ने सिख रहत मर्यादा का उल्लेख करते हुए कहा कि अमृतधारी सिखों के लिए मुस्लिम तरीके से काटे गए जानवर का मांस वर्जित है। ऐसे में सूचना का अभाव उनकी धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है।
इसके अलावा, FSSAI को अपने खाद्य मानकों में मांस कटिंग पद्धति से जुड़े प्रावधानों को शामिल करने पर रिपोर्ट देने को कहा गया है। पर्यटन मंत्रालय से भी होटल रेटिंग और वर्गीकरण में इस जानकारी के खुलासे को अनिवार्य करने की संभावनाओं पर जवाब मांगा गया है।
NHRC ने स्पष्ट किया है कि यह मामला किसी एक समुदाय के पक्ष या विरोध का नहीं, बल्कि पारदर्शिता, समानता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा है। आयोग की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि सार्वजनिक परिवहन और आतिथ्य सेवाओं में भोजन संबंधी जानकारी को लेकर क्या नए दिशानिर्देश लागू किए जाएं।
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