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देसी बाजार में पीई फर्मों का दांव, वित्तीय और उपभोक्ता क्षेत्र में हुए ज्यादातर सौदे
BUSINESS NEWS
प्राइवेट इक्विटी सौदों में दो साल तक गिरावट रहने के बाद 2024 के पहले 9 महीनों में देश में ऐसे सौदे 8.9 फीसदी बढ़ गए।
प्राइवेट इक्विटी सौदों में दो साल तक गिरावट रहने के बाद 2024 के पहले 9 महीनों में देश में ऐसे सौदे 8.9 फीसदी बढ़ गए। इस दौरान कुल 24.2 अरब डॉलर के सौदे किए गए, जबकि 2023 के पहले 9 महीनों में 22.23 अरब डॉलर के सौदे ही हुए थे। इस साल अभी तक सबसे अधिक 6.3 अरब डॉलर के सौदे वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में हुए हैं, जो कुल सौदों के 26 फीसदी हैं।
इसके बाद प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 5 अरब डॉलर के सौदे किए गए। मंदी या आर्थिक सुस्ती से बेअसर रहने वाला (नॉन-साइक्लिकल) उपभोक्ता क्षेत्र 4.3 अरब डॉलर के सौदों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। आर्थिक स्थितियों के मुताबिक बढ़ने या ठहरने वाले साइक्लिकल उपभोक्ता क्षेत्र (जैसे वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल आदि) में 3.5 अरब डॉलर के सौदे किए गए।
पिछले हफ्ते ईक्यूटी ने इंडोस्टार होम फाइनैंस में 1,750 करोड़ रुपये में 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की योजना की घोषणा की थी। मई में वारबर्ग पिनकस ने 4,630 करोड़ रुपये में श्रीराम हाउसिंग फाइनैंस का अधिग्रहण किया था। अगस्त में सीवीसी एडवाइजर्स ने आवास फाइनैंसर्स का अधिग्रहण कर केदार कैपिटल और पार्टनर्स ग्रुप को इससे बाहर निकलने का मौका दिया।
प्राइवेट इक्विटी (पीई) गतिविधियों में तेजी इन क्षेत्रों के लिए उत्साहजनक है क्योंकि इनका लक्ष्य भारत में अरबों डॉलर निवेश करने का है। साथ ही वे अपना पिछला निवेश कंपनियों से सफलतापूर्वक निकाल रहे हैं। शेयर बाजार की रिकॉर्ड ऊंचाई देखकर कई पीई फर्में बल्क सौदों और आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के जरिये शेयर बेचकर कंपनियों में पहले किया गया निवेश निकाल रही हैं।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार पीई फर्मों ने इस साल जनवरी से सितंबर तक रिकॉर्ड 859 सौदे किए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 701 सौदे किए गए थे। 2023 के पहले 9 महीनों में पीई सौदे 2022 की समान अवधि की तुलना में 46.6 फीसदी घट गए थे। 2021 के पहले 9 महीनों में पीई फर्मों ने 55.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड सौदे किए थे, जिनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिटेल और दूरसंचार इकाई के साथ किए गए सौदे प्रमुख थे।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार इस साल मई में सिकोया कैपिटल ने वाल्टन स्ट्रीट इंडिया में 1.5 अरब डॉलर का निवेश किया था, जो 2024 में अभी तक का सबसे बड़ा पीई सौदा है। दूसरा बड़ा सौदा एडवेंट इंटरनैशनल का था, जिसने कोहैन्स लाइफसाइंसेज में 1 अरब डॉलर का निवेश निकाला था।
पीई अधिकारी मान रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था वृद्धि की राह पर है और उद्योग कई अरब डॉलर के सौदों के लिए तैयार है।
एक पीई फर्म के प्रमुख ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘अरबों डॉलर के सौदों पर अभी बातचीत चल रही है और साल खत्म होते-होते इनकी घोषणा की जा सकती है। कुछ बड़ी पीई फर्में लक्षित कंपनी में बहुलांश हिस्सेदारी चाह रही हैं ताकि उन्हें कंपनी में बदलाव करने और प्रबंधन में वैश्विक विशेषज्ञता लाने की सहूलियत मिल सके तथा अगले कुछ वर्षों में उसे 6 से 7 गुना कीमत पर बेच सकें।’
तकरीबन सभी प्रमुख पीई फर्में आने वाले महीनों में भारत में निवेश बढ़ाने की योजना बना चुकी हैं।
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प्राइवेट इक्विटी सौदों में दो साल तक गिरावट रहने के बाद 2024 के पहले 9 महीनों में देश में ऐसे सौदे 8.9 फीसदी बढ़ गए। इस दौरान कुल 24.2 अरब डॉलर के सौदे किए गए, जबकि 2023 के पहले 9 महीनों में 22.23 अरब डॉलर के सौदे ही हुए थे। इस साल अभी तक सबसे अधिक 6.3 अरब डॉलर के सौदे वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में हुए हैं, जो कुल सौदों के 26 फीसदी हैं।
इसके बाद प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 5 अरब डॉलर के सौदे किए गए। मंदी या आर्थिक सुस्ती से बेअसर रहने वाला (नॉन-साइक्लिकल) उपभोक्ता क्षेत्र 4.3 अरब डॉलर के सौदों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। आर्थिक स्थितियों के मुताबिक बढ़ने या ठहरने वाले साइक्लिकल उपभोक्ता क्षेत्र (जैसे वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल आदि) में 3.5 अरब डॉलर के सौदे किए गए।
पिछले हफ्ते ईक्यूटी ने इंडोस्टार होम फाइनैंस में 1,750 करोड़ रुपये में 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की योजना की घोषणा की थी। मई में वारबर्ग पिनकस ने 4,630 करोड़ रुपये में श्रीराम हाउसिंग फाइनैंस का अधिग्रहण किया था। अगस्त में सीवीसी एडवाइजर्स ने आवास फाइनैंसर्स का अधिग्रहण कर केदार कैपिटल और पार्टनर्स ग्रुप को इससे बाहर निकलने का मौका दिया।
प्राइवेट इक्विटी (पीई) गतिविधियों में तेजी इन क्षेत्रों के लिए उत्साहजनक है क्योंकि इनका लक्ष्य भारत में अरबों डॉलर निवेश करने का है। साथ ही वे अपना पिछला निवेश कंपनियों से सफलतापूर्वक निकाल रहे हैं। शेयर बाजार की रिकॉर्ड ऊंचाई देखकर कई पीई फर्में बल्क सौदों और आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के जरिये शेयर बेचकर कंपनियों में पहले किया गया निवेश निकाल रही हैं।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार पीई फर्मों ने इस साल जनवरी से सितंबर तक रिकॉर्ड 859 सौदे किए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 701 सौदे किए गए थे। 2023 के पहले 9 महीनों में पीई सौदे 2022 की समान अवधि की तुलना में 46.6 फीसदी घट गए थे। 2021 के पहले 9 महीनों में पीई फर्मों ने 55.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड सौदे किए थे, जिनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिटेल और दूरसंचार इकाई के साथ किए गए सौदे प्रमुख थे।
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार इस साल मई में सिकोया कैपिटल ने वाल्टन स्ट्रीट इंडिया में 1.5 अरब डॉलर का निवेश किया था, जो 2024 में अभी तक का सबसे बड़ा पीई सौदा है। दूसरा बड़ा सौदा एडवेंट इंटरनैशनल का था, जिसने कोहैन्स लाइफसाइंसेज में 1 अरब डॉलर का निवेश निकाला था।
पीई अधिकारी मान रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था वृद्धि की राह पर है और उद्योग कई अरब डॉलर के सौदों के लिए तैयार है।
एक पीई फर्म के प्रमुख ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया, ‘अरबों डॉलर के सौदों पर अभी बातचीत चल रही है और साल खत्म होते-होते इनकी घोषणा की जा सकती है। कुछ बड़ी पीई फर्में लक्षित कंपनी में बहुलांश हिस्सेदारी चाह रही हैं ताकि उन्हें कंपनी में बदलाव करने और प्रबंधन में वैश्विक विशेषज्ञता लाने की सहूलियत मिल सके तथा अगले कुछ वर्षों में उसे 6 से 7 गुना कीमत पर बेच सकें।’
तकरीबन सभी प्रमुख पीई फर्में आने वाले महीनों में भारत में निवेश बढ़ाने की योजना बना चुकी हैं।
