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77 महीने के न्यूनतम स्तर पर रिटेल महंगाई: जून में घटकर 2.10% हुई, खाने-पीने की चीजें सस्ती होने से राहत
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देश में जून 2025 की खुदरा महंगाई (CPI) दर घटकर 2.10% पर आ गई है, जो पिछले 77 महीनों में सबसे कम है। इससे पहले जनवरी 2019 में रिटेल महंगाई दर 2.05% दर्ज की गई थी।
लगातार चौथे महीने खुदरा महंगाई रिजर्व बैंक (RBI) के 4% लक्ष्य से नीचे रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है।
खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में गिरावट मुख्य कारण
महंगाई दर में आई गिरावट की सबसे बड़ी वजह खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी रही है। मई 2025 में खाने-पीने की चीजों की महंगाई 0.99% थी, जो जून में माइनस 1.06% पर आ गई। यानी इस श्रेणी में औसतन वस्तुएं सस्ती हुई हैं।
ग्रामीण और शहरी महंगाई दोनों में गिरावट
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ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर मई की 2.59% से घटकर जून में 1.72% हो गई।
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वहीं शहरी इलाकों में यह 3.12% से घटकर 2.56% पर आ गई है।
RBI ने पहले ही जताया था अनुमान
RBI ने जून की मौद्रिक नीति समीक्षा में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई का अनुमान 4% से घटाकर 3.7% किया था। अप्रैल-जून तिमाही के लिए खुदरा महंगाई का संशोधित अनुमान 3.6% से घटाकर 2.9% किया गया था।
CPI कैसे तय करता है महंगाई?
खुदरा महंगाई को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के जरिए मापा जाता है। इसमें रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुएं जैसे खाद्य पदार्थ, कपड़े, आवास, ईंधन और अन्य सेवाएं शामिल होती हैं। CPI बास्केट में लगभग 300 आइटम्स की कीमतों को शामिल किया जाता है, जिसमें खाद्य वस्तुओं का योगदान करीब 50% होता है।
महंगाई घटने का अर्थ?
जब डिमांड के मुकाबले सप्लाई अधिक होती है या जरूरी चीजें सस्ती होती हैं, तो CPI घटता है। इससे आम आदमी के बजट को राहत मिलती है और बैंकिंग सिस्टम पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। लंबे समय तक कम महंगाई दर बने रहना RBI को ब्याज दरों में बदलाव के लिए प्रेरित कर सकता है।
प्रमुख बिंदु एक नजर में:
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जून CPI महंगाई: 2.10%
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मई CPI महंगाई: 2.82%
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खाद्य महंगाई: माइनस 1.06%
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ग्रामीण CPI: 1.72%
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शहरी CPI: 2.56%
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जनवरी 2019 के बाद सबसे कम स्तर
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RBI लक्ष्य: लगातार चौथे महीने 4% से नीचे
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77 महीने के न्यूनतम स्तर पर रिटेल महंगाई: जून में घटकर 2.10% हुई, खाने-पीने की चीजें सस्ती होने से राहत
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लगातार चौथे महीने खुदरा महंगाई रिजर्व बैंक (RBI) के 4% लक्ष्य से नीचे रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है।
खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में गिरावट मुख्य कारण
महंगाई दर में आई गिरावट की सबसे बड़ी वजह खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कमी रही है। मई 2025 में खाने-पीने की चीजों की महंगाई 0.99% थी, जो जून में माइनस 1.06% पर आ गई। यानी इस श्रेणी में औसतन वस्तुएं सस्ती हुई हैं।
ग्रामीण और शहरी महंगाई दोनों में गिरावट
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ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर मई की 2.59% से घटकर जून में 1.72% हो गई।
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वहीं शहरी इलाकों में यह 3.12% से घटकर 2.56% पर आ गई है।
RBI ने पहले ही जताया था अनुमान
RBI ने जून की मौद्रिक नीति समीक्षा में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई का अनुमान 4% से घटाकर 3.7% किया था। अप्रैल-जून तिमाही के लिए खुदरा महंगाई का संशोधित अनुमान 3.6% से घटाकर 2.9% किया गया था।
CPI कैसे तय करता है महंगाई?
खुदरा महंगाई को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के जरिए मापा जाता है। इसमें रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुएं जैसे खाद्य पदार्थ, कपड़े, आवास, ईंधन और अन्य सेवाएं शामिल होती हैं। CPI बास्केट में लगभग 300 आइटम्स की कीमतों को शामिल किया जाता है, जिसमें खाद्य वस्तुओं का योगदान करीब 50% होता है।
महंगाई घटने का अर्थ?
जब डिमांड के मुकाबले सप्लाई अधिक होती है या जरूरी चीजें सस्ती होती हैं, तो CPI घटता है। इससे आम आदमी के बजट को राहत मिलती है और बैंकिंग सिस्टम पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। लंबे समय तक कम महंगाई दर बने रहना RBI को ब्याज दरों में बदलाव के लिए प्रेरित कर सकता है।
प्रमुख बिंदु एक नजर में:
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जून CPI महंगाई: 2.10%
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मई CPI महंगाई: 2.82%
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खाद्य महंगाई: माइनस 1.06%
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ग्रामीण CPI: 1.72%
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शहरी CPI: 2.56%
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जनवरी 2019 के बाद सबसे कम स्तर
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RBI लक्ष्य: लगातार चौथे महीने 4% से नीचे
