96 पर नहीं रुका रुपया! डॉलर की रफ्तार ने बाजार में मचाई हलचल

बिजनेस डेस्क

By Rohit.P
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Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार सातवें दिन गिरा। जानिए गिरावट की वजह, वैश्विक असर और इसका आम जनता पर प्रभाव।

Rupee vs Dollar: रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होता जा रहा है, और मंगलवार, 19 मई को शुरुआती कारोबार में स्थिति में कोई खास सुधार नजर नहीं आया। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 18 पैसे टूटकर 96.38 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। यह गिरावट ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उथल-पुथल और डॉलर की मजबूती जैसे कारण सामने आ रहे हैं। रुपया-डॉलर के इस उतार-चढ़ाव ने बाजार में बेचैनी बढ़ा दी है, खासकर जब कि भारतीय मुद्रा लगातार सातवें कारोबारी सत्र में दबाव में है।

इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में सोमवार को भी रुपया 96.20 प्रति डॉलर पर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब बंद हुआ था। कारोबारियों का कहना है कि पिछले हफ्ते में करेंसी लगभग 2.2 प्रतिशत तक कमजोर हो चुकी है और सितंबर के बाद से इसमें 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई है। बाजार में इस वक्त ये चर्चाएं भी चल रही हैं कि मौजूदा हालात में रुपये की दिशा अभी साफ नहीं है और अस्थिरता बनी रह सकती है। सुबह ट्रेडिंग फ्लोर पर हल्की घबराहट का माहौल था, खासकर विदेशी निवेश और तेल कीमतों को लेकर।

फॉरेक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपये पर दबाव की एक बड़ी वजह ग्लोबल अनिश्चितता है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती, अमेरिकी बॉंड यील्ड में वृद्धि और भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों को सुरक्षित संपत्तियों की ओर मोड़ दिया है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भी भारत के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जैसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में कोई बाधा आती है, तो ये भारत के आयात बिल को और बढ़ा सकती है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है, और यही वजह है कि रुपया दबाव में है।

कुछ एक्सपर्ट्स ने यह भी संकेत दिए हैं कि USD/INR का स्तर धीरे-धीरे 97 की ओर बढ़ सकता है, हालांकि बीच में कुछ तकनीकी सपोर्ट ज़ोन भी हैं जिस पर बाजार की नजर बनी हुई है। डॉलर इंडेक्स में हल्की गिरावट जरूर देखी गई है, लेकिन ये रुपये को मजबूत करने के लिए काफी नहीं है। दूसरी तरफ, ब्रेंट क्रूड में भी मामूली गिरावट हुई है, लेकिन वैश्विक स्तर पर कीमतें अब भी ऊंची बनी हुई हैं। बाजार की चाल फिलहाल मिली-जुली संकेत दे रही है, इसी वजह से निवेशक कोई बड़ा दांव लगाने से कतरा रहे हैं।

घरेलू शेयर बाजार में इसके उलट माहौल थोड़ा अलग था। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी रही, जिससे ये संकेत मिला कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) को अभी भी भारतीय इक्विटी बाजार में रुचि है। आंकड़ों के मुताबिक हाल के दिनों में FIIs ने हजारों करोड़ रुपये की खरीदारी की है, जिससे बाजार को कुछ सपोर्ट मिला है। हालांकि, रुपये की कमजोरी इस सकारात्मकता पर थोड़ा असर डाल रही है।

इस बीच, सरकार की ओर से ऊर्जा नीति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से तेल खरीद जारी रखेगा। वैश्विक प्रतिबंधों और राजनीतिक दबावों के बीच ये रुख बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दूसरी ओर, राहत की बात ये है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार फिर से बढ़ा है, और हाल के आंकड़ों के अनुसार इसमें अरबों डॉलर की बढ़ोतरी देखी गई है। इससे आर्थिक मोर्चे पर कुछ स्थिरता जरूर मिलती है, लेकिन रुपये पर दबाव फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा है।

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19 May 2026 By Rohit.P

96 पर नहीं रुका रुपया! डॉलर की रफ्तार ने बाजार में मचाई हलचल

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Rupee vs Dollar: रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होता जा रहा है, और मंगलवार, 19 मई को शुरुआती कारोबार में स्थिति में कोई खास सुधार नजर नहीं आया। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 18 पैसे टूटकर 96.38 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। यह गिरावट ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उथल-पुथल और डॉलर की मजबूती जैसे कारण सामने आ रहे हैं। रुपया-डॉलर के इस उतार-चढ़ाव ने बाजार में बेचैनी बढ़ा दी है, खासकर जब कि भारतीय मुद्रा लगातार सातवें कारोबारी सत्र में दबाव में है।

इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में सोमवार को भी रुपया 96.20 प्रति डॉलर पर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब बंद हुआ था। कारोबारियों का कहना है कि पिछले हफ्ते में करेंसी लगभग 2.2 प्रतिशत तक कमजोर हो चुकी है और सितंबर के बाद से इसमें 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई है। बाजार में इस वक्त ये चर्चाएं भी चल रही हैं कि मौजूदा हालात में रुपये की दिशा अभी साफ नहीं है और अस्थिरता बनी रह सकती है। सुबह ट्रेडिंग फ्लोर पर हल्की घबराहट का माहौल था, खासकर विदेशी निवेश और तेल कीमतों को लेकर।

फॉरेक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपये पर दबाव की एक बड़ी वजह ग्लोबल अनिश्चितता है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती, अमेरिकी बॉंड यील्ड में वृद्धि और भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों को सुरक्षित संपत्तियों की ओर मोड़ दिया है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भी भारत के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जैसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में कोई बाधा आती है, तो ये भारत के आयात बिल को और बढ़ा सकती है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है, और यही वजह है कि रुपया दबाव में है।

कुछ एक्सपर्ट्स ने यह भी संकेत दिए हैं कि USD/INR का स्तर धीरे-धीरे 97 की ओर बढ़ सकता है, हालांकि बीच में कुछ तकनीकी सपोर्ट ज़ोन भी हैं जिस पर बाजार की नजर बनी हुई है। डॉलर इंडेक्स में हल्की गिरावट जरूर देखी गई है, लेकिन ये रुपये को मजबूत करने के लिए काफी नहीं है। दूसरी तरफ, ब्रेंट क्रूड में भी मामूली गिरावट हुई है, लेकिन वैश्विक स्तर पर कीमतें अब भी ऊंची बनी हुई हैं। बाजार की चाल फिलहाल मिली-जुली संकेत दे रही है, इसी वजह से निवेशक कोई बड़ा दांव लगाने से कतरा रहे हैं।

घरेलू शेयर बाजार में इसके उलट माहौल थोड़ा अलग था। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी रही, जिससे ये संकेत मिला कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) को अभी भी भारतीय इक्विटी बाजार में रुचि है। आंकड़ों के मुताबिक हाल के दिनों में FIIs ने हजारों करोड़ रुपये की खरीदारी की है, जिससे बाजार को कुछ सपोर्ट मिला है। हालांकि, रुपये की कमजोरी इस सकारात्मकता पर थोड़ा असर डाल रही है।

इस बीच, सरकार की ओर से ऊर्जा नीति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से तेल खरीद जारी रखेगा। वैश्विक प्रतिबंधों और राजनीतिक दबावों के बीच ये रुख बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दूसरी ओर, राहत की बात ये है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार फिर से बढ़ा है, और हाल के आंकड़ों के अनुसार इसमें अरबों डॉलर की बढ़ोतरी देखी गई है। इससे आर्थिक मोर्चे पर कुछ स्थिरता जरूर मिलती है, लेकिन रुपये पर दबाव फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-did-not-stop-at-96-dollar-movement-created-stir/article-53764

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