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सेंसेक्स 200 अंक से ज्यादा लुढ़का, निफ्टी में 100 अंकों की गिरावट; IT और ऑटो शेयरों पर दबाव
बिजनेस न्यूज
वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी, निवेशक सतर्क
भारतीय शेयर बाजार में, 8 जनवरी को कारोबार के दौरान कमजोरी बनी रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 200 अंकों से अधिक गिरकर 84,700 के आसपास कारोबार करता देखा गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी करीब 100 अंक लुढ़ककर 26,050 के स्तर पर आ गया। बाजार पर दबाव का मुख्य कारण IT, ऑटोमोबाइल और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में आई व्यापक बिकवाली रही।
कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों में सतर्कता दिखी। पिछले कुछ सत्रों की तेजी के बाद मुनाफावसूली का रुझान हावी रहा, वहीं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से स्पष्ट दिशा न मिलने के कारण घरेलू बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति कमजोर रही। IT कंपनियों के शेयरों पर वैश्विक टेक सेक्टर की चाल का असर दिखा, जबकि ऑटो शेयरों में लागत और मांग को लेकर चिंताओं ने दबाव बढ़ाया।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों का असर
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचारों के बीच एशियाई बाजारों में कारोबार मिश्रित रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया, जबकि जापान का निक्केई और हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग लाल निशान में रहे। चीन के शंघाई कंपोजिट में मामूली मजबूती देखने को मिली। इन उतार-चढ़ाव भरे संकेतों ने भारतीय बाजार की दिशा तय करने में निवेशकों को असमंजस में रखा।
अमेरिकी बाजारों में भी पिछला सत्र पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहा। डाउ जोंस में गिरावट दर्ज की गई, जबकि नैस्डेक में सीमित तेजी और S&P 500 में हल्की कमजोरी देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों और आर्थिक आंकड़ों को लेकर बनी अनिश्चितता का असर उभरते बाजारों पर भी पड़ रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली, घरेलू निवेशकों का भरोसा
सरकारी अपडेट और बाजार के आंकड़ों के अनुसार, हालिया सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शेयरों की बिकवाली जारी रखी है। 7 जनवरी को FIIs ने करीब 1,669 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 2,992 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा दिया।
पिछले दो महीनों के आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशकों की निकासी के बावजूद घरेलू निवेशकों ने लगातार बाजार में भरोसा बनाए रखा है। नवंबर और दिसंबर में DIIs की मजबूत खरीदारी ने बड़ी गिरावट को रोकने में अहम भूमिका निभाई है।
IPO से जुड़ी हलचल
इसी बीच निवेशकों की नजर भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के प्रस्तावित आईपीओ पर भी बनी हुई है। कोल इंडिया की इस सहायक कंपनी का सार्वजनिक निर्गम 9 जनवरी से खुलेगा और 13 जनवरी तक निवेश के लिए उपलब्ध रहेगा। कंपनी इस इश्यू के जरिए 1,071 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने की योजना बना रही है।
पिछले सत्र की कमजोरी का असर
इससे पहले मंगलवार को भी बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 102 अंक फिसलकर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी में भी मामूली कमजोरी दर्ज की गई थी। लगातार दूसरे दिन गिरावट से संकेत मिलते हैं कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।बाजार जानकारों के मुताबिक, आने वाले दिनों में वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और प्रमुख कंपनियों के नतीजों पर बाजार की नजर रहेगी।
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सेंसेक्स 200 अंक से ज्यादा लुढ़का, निफ्टी में 100 अंकों की गिरावट; IT और ऑटो शेयरों पर दबाव
बिजनेस न्यूज
भारतीय शेयर बाजार में, 8 जनवरी को कारोबार के दौरान कमजोरी बनी रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 200 अंकों से अधिक गिरकर 84,700 के आसपास कारोबार करता देखा गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी करीब 100 अंक लुढ़ककर 26,050 के स्तर पर आ गया। बाजार पर दबाव का मुख्य कारण IT, ऑटोमोबाइल और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में आई व्यापक बिकवाली रही।
कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों में सतर्कता दिखी। पिछले कुछ सत्रों की तेजी के बाद मुनाफावसूली का रुझान हावी रहा, वहीं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से स्पष्ट दिशा न मिलने के कारण घरेलू बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति कमजोर रही। IT कंपनियों के शेयरों पर वैश्विक टेक सेक्टर की चाल का असर दिखा, जबकि ऑटो शेयरों में लागत और मांग को लेकर चिंताओं ने दबाव बढ़ाया।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों का असर
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचारों के बीच एशियाई बाजारों में कारोबार मिश्रित रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया, जबकि जापान का निक्केई और हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग लाल निशान में रहे। चीन के शंघाई कंपोजिट में मामूली मजबूती देखने को मिली। इन उतार-चढ़ाव भरे संकेतों ने भारतीय बाजार की दिशा तय करने में निवेशकों को असमंजस में रखा।
अमेरिकी बाजारों में भी पिछला सत्र पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहा। डाउ जोंस में गिरावट दर्ज की गई, जबकि नैस्डेक में सीमित तेजी और S&P 500 में हल्की कमजोरी देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों और आर्थिक आंकड़ों को लेकर बनी अनिश्चितता का असर उभरते बाजारों पर भी पड़ रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली, घरेलू निवेशकों का भरोसा
सरकारी अपडेट और बाजार के आंकड़ों के अनुसार, हालिया सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शेयरों की बिकवाली जारी रखी है। 7 जनवरी को FIIs ने करीब 1,669 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 2,992 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा दिया।
पिछले दो महीनों के आंकड़े बताते हैं कि विदेशी निवेशकों की निकासी के बावजूद घरेलू निवेशकों ने लगातार बाजार में भरोसा बनाए रखा है। नवंबर और दिसंबर में DIIs की मजबूत खरीदारी ने बड़ी गिरावट को रोकने में अहम भूमिका निभाई है।
IPO से जुड़ी हलचल
इसी बीच निवेशकों की नजर भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के प्रस्तावित आईपीओ पर भी बनी हुई है। कोल इंडिया की इस सहायक कंपनी का सार्वजनिक निर्गम 9 जनवरी से खुलेगा और 13 जनवरी तक निवेश के लिए उपलब्ध रहेगा। कंपनी इस इश्यू के जरिए 1,071 करोड़ रुपये से अधिक जुटाने की योजना बना रही है।
पिछले सत्र की कमजोरी का असर
इससे पहले मंगलवार को भी बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 102 अंक फिसलकर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी में भी मामूली कमजोरी दर्ज की गई थी। लगातार दूसरे दिन गिरावट से संकेत मिलते हैं कि निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।बाजार जानकारों के मुताबिक, आने वाले दिनों में वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और प्रमुख कंपनियों के नतीजों पर बाजार की नजर रहेगी।
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