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शेयर बाजार में दबाव: सेंसेक्स 200 अंक फिसला, निफ्टी 26,200 के नीचे
बिजनेस न्यूज
वैश्विक बाजारों में तेजी के बावजूद घरेलू शेयर बाजार दबाव में, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और सेक्टोरल कमजोरी बनी वजह
भारतीय शेयर बाजार में आज गिरावट का माहौल देखने को मिला। कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स 200 अंक से अधिक लुढ़ककर करीब 85,200 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी लगभग 50 अंक फिसलकर 26,200 के आसपास बना रहा। बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव ऑटोमोबाइल और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में रही बिकवाली का रहा।
बीएसई सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में ऑटो कंपनियों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के स्टॉक्स में गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मांग को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण एनर्जी शेयर कमजोर रहे, वहीं ऑटो सेक्टर में ऊंचे वैल्यूएशन और मुनाफावसूली ने निवेशकों को सतर्क कर दिया।
गिरावट ऐसे समय आई है, जब वैश्विक बाजारों से मिले संकेत अपेक्षाकृत सकारात्मक रहे। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई और हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए। अमेरिका में भी डाउ जोंस में बीते कारोबारी सत्र में बढ़त रही थी। इसके बावजूद घरेलू बाजार इन संकेतों का फायदा नहीं उठा सका।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है। 5 जनवरी को FIIs ने करीब 3,268 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। दिसंबर 2025 में भी FIIs ने 34 हजार करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की थी। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की ओर से लगातार खरीदारी बाजार को बड़े स्तर पर टूटने से बचा रही है।
इस बीच, अडाणी एंटरप्राइजेज के पब्लिक बॉन्ड इश्यू के खुलने की खबर भी निवेशकों के बीच चर्चा में रही। हालांकि इसका तत्काल असर इक्विटी बाजार की चाल पर सीमित ही दिखा। बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि निवेशक फिलहाल ब्याज दरों, वैश्विक आर्थिक संकेतों और कॉर्पोरेट नतीजों को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं।
एक दिन पहले यानी 5 जनवरी को भी बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी। तब सेंसेक्स 322 अंक टूटकर 85,439 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 78 अंक गिरकर 26,250 के स्तर पर बंद हुआ था। लगातार दूसरे दिन आई कमजोरी से यह संकेत मिल रहा है कि बाजार में अल्पकालिक दबाव बना रह सकता है।
आगे के सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और चुनिंदा सेक्टर्स के प्रदर्शन पर बनी रहेगी। विशेषज्ञों की सलाह है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच लंबी अवधि के निवेशक जल्दबाजी से बचें और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही ध्यान दें।
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भारतीय शेयर बाजार में आज गिरावट का माहौल देखने को मिला। कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स 200 अंक से अधिक लुढ़ककर करीब 85,200 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी लगभग 50 अंक फिसलकर 26,200 के आसपास बना रहा। बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव ऑटोमोबाइल और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में रही बिकवाली का रहा।
बीएसई सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में ऑटो कंपनियों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के स्टॉक्स में गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मांग को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण एनर्जी शेयर कमजोर रहे, वहीं ऑटो सेक्टर में ऊंचे वैल्यूएशन और मुनाफावसूली ने निवेशकों को सतर्क कर दिया।
गिरावट ऐसे समय आई है, जब वैश्विक बाजारों से मिले संकेत अपेक्षाकृत सकारात्मक रहे। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई और हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स मजबूती के साथ कारोबार करते नजर आए। अमेरिका में भी डाउ जोंस में बीते कारोबारी सत्र में बढ़त रही थी। इसके बावजूद घरेलू बाजार इन संकेतों का फायदा नहीं उठा सका।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है। 5 जनवरी को FIIs ने करीब 3,268 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। दिसंबर 2025 में भी FIIs ने 34 हजार करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की थी। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की ओर से लगातार खरीदारी बाजार को बड़े स्तर पर टूटने से बचा रही है।
इस बीच, अडाणी एंटरप्राइजेज के पब्लिक बॉन्ड इश्यू के खुलने की खबर भी निवेशकों के बीच चर्चा में रही। हालांकि इसका तत्काल असर इक्विटी बाजार की चाल पर सीमित ही दिखा। बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि निवेशक फिलहाल ब्याज दरों, वैश्विक आर्थिक संकेतों और कॉर्पोरेट नतीजों को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं।
एक दिन पहले यानी 5 जनवरी को भी बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी। तब सेंसेक्स 322 अंक टूटकर 85,439 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 78 अंक गिरकर 26,250 के स्तर पर बंद हुआ था। लगातार दूसरे दिन आई कमजोरी से यह संकेत मिल रहा है कि बाजार में अल्पकालिक दबाव बना रह सकता है।
आगे के सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और चुनिंदा सेक्टर्स के प्रदर्शन पर बनी रहेगी। विशेषज्ञों की सलाह है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच लंबी अवधि के निवेशक जल्दबाजी से बचें और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही ध्यान दें।
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