- Hindi News
- बिजनेस
- 2 GW की कैपेसिटी! ग्रीन एनर्जी की दौड़ में वेदांता सबसे आगे, Hindalco, JSW, NALCO तक को पीछे छोड़ा
2 GW की कैपेसिटी! ग्रीन एनर्जी की दौड़ में वेदांता सबसे आगे, Hindalco, JSW, NALCO तक को पीछे छोड़ा
Digital Desk
वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने X (https://x.com/AnilAgarwal_Ved/status/2090310490589471201?s=20) पर एक पोस्ट में अपने समकक्ष समूहों के बीच रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में वेदांता की अग्रणी स्थिति पर प्रकाश डाला है। वेदांता के पास अब अपने विभिन्न कारोबारों में करीब 2 GW की स्थापित और अनुबंधित रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता है।
अक्षय ऊर्जा दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा, “वेदांता में हमें इस बात पर बहुत गर्व है कि हमने एल्युमिनियम, जिंक और अपने अन्य प्लांट्स में रिन्यूएबल एनर्जी के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए बड़ी पहल की है। 2 GW की क्षमता के साथ हम भारत में अपने समकक्ष समूहों में आगे हैं और हमारी क्षमता दूसरों की तुलना में पांच गुना तक अधिक है। वैश्विक स्तर पर भी हम अपने समकक्षों में टॉप 2-3 कंपनियों में शामिल हैं। लोगों का कहना था कि इतनी ज्यादा ऊर्जा की जरूरत वाले 24x7 चलने वाले प्लांट्स को रिन्यूएबल एनर्जी से चलाना संभव नहीं है। लेकिन वेदांता की सहयोगी कंपनी Serentica के साथ मिलकर हमने अपने इनोवेशन के जरिए दिखाया है कि यह पूरी तरह संभव है। एल्युमिनियम और जिंक में हमारे नए ग्रीन उत्पादों की दुनियाभर में अच्छी मांग है। हमारे शेयरधारक भी उस दिशा से बेहद खुश हैं, जिसे हमने चुना है। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारा भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बनेगा, जो ग्रीन रहते हुए आर्थिक रूप से समृद्ध बनेगा।”
वेदांता का रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो भारत की अन्य मेटल्स और माइनिंग कंपनियों की तुलना में काफी बड़ा है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब 2 GW की क्षमता के साथ वेदांता की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता Hindalco की 470 MW क्षमता से लगभग पांच गुना, JSW Steel की करीब 1 GW क्षमता से लगभग दोगुनी है। वहीं, यह NALCO की करीब 198 MW और SAIL की 24.6 MW की चालू क्षमता से भी काफी ज्यादा है। वेदांता की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता वैश्विक कंपनियों के मुकाबले भी मजबूत है। दुनिया की प्रमुख मेटल्स और माइनिंग कंपनियों में सार्वजनिक रूप से बताई गई रिन्यूएबल एनर्जी और डीकार्बोनाइजेशन क्षमता के आधार पर वेदांता टॉप 2-3 कंपनियों में शामिल है। वेदांता से करीब चार गुना बड़ी कंपनी Rio Tinto के पास लगभग 2.8 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता है। वहीं, आकार में वेदांता से थोड़ी बड़ी Fortescue Metals के पास करीब 1.4 GW की क्षमता है।
यह उपलब्धि वेदांता के कारोबार की प्रकृति को देखते हुए खास तौर पर महत्वपूर्ण है। एल्युमिनियम, जिंक और अन्य धातुओं का उत्पादन सबसे ज्यादा ऊर्जा की जरूरत वाले औद्योगिक कामों में शामिल है और इनके लिए लगातार 24x7 बिजली की जरूरत होती है। इसके बावजूद, वेदांता अपनी सहयोगी कंपनी Serentica के साथ मिलकर ऐसे रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस विकसित कर रहा है, जो इतनी अधिक ऊर्जा की जरूरत वाले प्लांट्स को भी बिजली उपलब्ध करा सकें।
वेदांता के एनर्जी ट्रांजिशन का असर उसके रिन्यूएबल एनर्जी के वास्तविक इस्तेमाल में भी साफ दिखाई दे रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में वेदांता का रिन्यूएबल एनर्जी उपयोग साल-दर-साल 52% बढ़कर 4 अरब यूनिट हो गया। यह करीब 3 करोड़ भारतीय परिवारों की सालाना बिजली खपत के बराबर है। पिछले पांच वर्षों में वेदांता ने नेट-जीरो ट्रांजिशन से जुड़ी पहलों में 1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश किया है। इसमें रिन्यूएबल एनर्जी, कम-कार्बन वाले ईंधन, ऊर्जा दक्षता और तकनीक आधारित उपाय शामिल हैं।
इन प्रयासों और डीकार्बोनाइजेशन से जुड़े अन्य उपायों की मदद से वेदांता ने वित्त वर्ष 2021 से अब तक करीब 3.6 करोड़ टन CO₂e उत्सर्जन को कम करने में मदद की है। वहीं, वित्त वर्ष 2020-21 के आधार वर्ष की तुलना में उसके मेटल्स और माइनिंग उत्पादन में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की तीव्रता करीब 14% कम हुई है, जबकि इसी अवधि में उत्पादन भी लगातार बढ़ा है। वेदांता का लक्ष्य 2030 तक 2.5 GW की चौबीसों घंटे रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करना है। यह दिखाता है कि कंपनी अपने औद्योगिक कारोबार में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को और बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
यह बदलाव उन उत्पादों में भी दिखाई दे रहा है, जिन्हें वेदांता वैश्विक बाजारों में उपलब्ध करा रहा है। वेदांता एल्युमिनियम के रेस्टोरा और रेस्टोरा अल्ट्रा तथा हिंदुस्तान जिंक के EcoZen कम-कार्बन वाले ‘ग्रीन’ मेटल्स हैं। इन्हें ऐसे ग्राहकों की बढ़ती जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो कम कार्बन फुटप्रिंट वाले मेटल्स का इस्तेमाल करना चाहते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में EcoZen का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों ने करीब 8,268 टन CO₂e उत्सर्जन को कम करने में मदद की। यह दिखाता है कि ऐसे उत्पाद कंपनी के अपने कारोबार से आगे बढ़कर पूरी वैल्यू चेन में कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद कर सकते हैं।
वेदांता का रिन्यूएबल एनर्जी पर बढ़ता फोकस ऐसे समय में है, जब भारत में क्लीन एनर्जी से जुड़ी अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी मेटल्स और सामग्रियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। एल्युमिनियम, कॉपर, जिंक, सिल्वर और अन्य मेटल्स रिन्यूएबल पावर उत्पादन, ट्रांसमिशन नेटवर्क, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, एनर्जी स्टोरेज और विद्युतीकरण के लिए बेहद जरूरी हैं। इससे एनर्जी ट्रांजिशन में वेदांता की दोहरी भूमिका बनती है। कंपनी एक ओर ग्रीन इकोनॉमी के निर्माण के लिए जरूरी मेटल्स की आपूर्ति कर रही है, वहीं दूसरी ओर इन मेटल्स के उत्पादन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए भी काम कर रही है।
वेदांता का बढ़ता रिन्यूएबल एनर्जी पोर्टफोलियो दिखाता है कि भारत के ऊर्जा-गहन उद्योगों के लिए स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ना अब केवल पर्यावरण से जुड़ा लक्ष्य नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर औद्योगिक विकास और प्रतिस्पर्धा का अवसर बन रहा है।
स्रो त:SAIL: https://www.sail.co.in/en/plants/environment-management-division
Recommended for You
दैनिक जागरण से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:

