- Hindi News
- बिजनेस
- क्या महंगा होगा सोयाबीन का तेल? बाजार के इशारे बता रहे हैं ये गणित
क्या महंगा होगा सोयाबीन का तेल? बाजार के इशारे बता रहे हैं ये गणित
Business News
नेफेड ने सोयाबीन की अगली बुवाई तक सोयाबीन बिक्री पर रोक लगा दी है. इससे सोयाबीन के किसानों को अब सोयाबीन के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद बढ़ने लगी है जिसका हाजिर दाम अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे चल रहा था.
सोयाबीन की अगली बिजाई तक सहकारी संस्था नेफेड के बिकवाली रोकने और मांग में आई तेजी के बीच किसानों द्वारा अपनी तिलहन ऊपज की आवक घटाने से देश के तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को सोयाबीन तेल-तिलहन के साथ कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन और बिनौला तेल के दाम मजबूत बंद हुए. सुस्त कारोबार के बीच सरसों एवं मूंगफली तेल-तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे.
किसानों ने सोयाबीन बेचना किया बंद
बाजार सूत्रों ने कहा कि नेफेड ने सोयाबीन की अगली बुवाई तक सोयाबीन बिक्री पर रोक लगा दी है. इससे सोयाबीन के किसानों को अब सोयाबीन के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद बढ़ने लगी है जिसका हाजिर दाम अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे चल रहा था. किसानों ने अच्छे दाम की उम्मीद में आवक भी लानी कम कर दी है. उधर आगामी त्योहारों और शादी विवाह के मौसम की मांग धीरे-धीरे बढ़ने लगी है. इस स्थिति में सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम में सुधार आया.
उन्होंने कहा कि मलेशिया में कच्चे पामतेल और सीपीओ के बस दाम ऊंचा बोले जा रहे हैं पर असल में इस भाव पर लिवाल का मिलना मुश्किल है. दाम ऊंचा बोले जाने से पाम, पामोलीन में भी सुधार है. बिनौले की उपलब्धता और मंडियों में उसकी आवक कमजोर है जिस वजह से बिनौला तेल के दाम में सुधार है.
आगे महंगा होने की है ये उम्मीद
सूत्रों ने कहा कि वार्षिक लेखाबंदी के कारण सुस्त कारोबार के बीच सरसों और मूंगफली तेल-तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे. अगले कुछ दिनों में इन तेलों के कारोबार का रुख तय होगा. वैसे बाजार में मांग बनी हुई है और नवरात्र के त्योहार और शादी-विवाह के मौसम को देखते हुए आगे मांग बढ़ने की उम्मीद की जा रही है. फिलहाल सरसों एवं मूंगफली तेल-तिलहन के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे.
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में बिनौले का विकल्प माने जाने वाले सूरजमुखी और पामोलीन के दाम काफी अधिक हैं. इस ऊंचे दाम के कारण सूरजमुखी और पामोलीन के लिवाल कम हैं. इस स्थिति के कारण भी बिनौला तेल कीमत में सुधार आया.
-----------------
हमारे आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स से जुड़ें –
🔴 व्हाट्सएप चैनल: https://whatsapp.com/channel/0029VbATlF0KQuJB6tvUrN3V
🔴 फेसबुक: Dainik Jagran MP/CG Official
🟣 इंस्टाग्राम: @dainikjagranmp.cg
🔴 यूट्यूब: Dainik Jagran MPCG Digital
📲 सोशल मीडिया पर जुड़ें और बने जागरूक पाठक।
👉 आज ही जुड़िए
क्या महंगा होगा सोयाबीन का तेल? बाजार के इशारे बता रहे हैं ये गणित
Business News
सोयाबीन की अगली बिजाई तक सहकारी संस्था नेफेड के बिकवाली रोकने और मांग में आई तेजी के बीच किसानों द्वारा अपनी तिलहन ऊपज की आवक घटाने से देश के तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को सोयाबीन तेल-तिलहन के साथ कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन और बिनौला तेल के दाम मजबूत बंद हुए. सुस्त कारोबार के बीच सरसों एवं मूंगफली तेल-तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे.
किसानों ने सोयाबीन बेचना किया बंद
बाजार सूत्रों ने कहा कि नेफेड ने सोयाबीन की अगली बुवाई तक सोयाबीन बिक्री पर रोक लगा दी है. इससे सोयाबीन के किसानों को अब सोयाबीन के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद बढ़ने लगी है जिसका हाजिर दाम अपने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे चल रहा था. किसानों ने अच्छे दाम की उम्मीद में आवक भी लानी कम कर दी है. उधर आगामी त्योहारों और शादी विवाह के मौसम की मांग धीरे-धीरे बढ़ने लगी है. इस स्थिति में सोयाबीन तेल-तिलहन के दाम में सुधार आया.
उन्होंने कहा कि मलेशिया में कच्चे पामतेल और सीपीओ के बस दाम ऊंचा बोले जा रहे हैं पर असल में इस भाव पर लिवाल का मिलना मुश्किल है. दाम ऊंचा बोले जाने से पाम, पामोलीन में भी सुधार है. बिनौले की उपलब्धता और मंडियों में उसकी आवक कमजोर है जिस वजह से बिनौला तेल के दाम में सुधार है.
आगे महंगा होने की है ये उम्मीद
सूत्रों ने कहा कि वार्षिक लेखाबंदी के कारण सुस्त कारोबार के बीच सरसों और मूंगफली तेल-तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे. अगले कुछ दिनों में इन तेलों के कारोबार का रुख तय होगा. वैसे बाजार में मांग बनी हुई है और नवरात्र के त्योहार और शादी-विवाह के मौसम को देखते हुए आगे मांग बढ़ने की उम्मीद की जा रही है. फिलहाल सरसों एवं मूंगफली तेल-तिलहन के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे.
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में बिनौले का विकल्प माने जाने वाले सूरजमुखी और पामोलीन के दाम काफी अधिक हैं. इस ऊंचे दाम के कारण सूरजमुखी और पामोलीन के लिवाल कम हैं. इस स्थिति के कारण भी बिनौला तेल कीमत में सुधार आया.
