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दिल्ली पुलिस ने NEET प्रदर्शनकारियों पर दर्ज 13 FIR रद्द करने की मांग की
Digital Desk
दिल्ली पुलिस ने NEET-UG प्रदर्शन से जुड़ी 13 FIR खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। केंद्र के आवेदन पर 1 सितंबर को सुनवाई होगी।
दिल्ली पुलिस ने जुलाई में हुए NEET-UG प्रदर्शन से जुड़े 13 मामलों को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। पुलिस ने कहा है कि वह इन FIR को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। केंद्र की ओर से दायर संबंधित आवेदन पर सुप्रीम कोर्ट 1 सितंबर को सुनवाई करेगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कॉकroach जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को दिल्ली में फिर प्रदर्शन मार्च निकालने का ऐलान किया है। संगठन का दावा है कि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने को लेकर दिए गए आश्वासनों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।
13 FIR खत्म करने की मांग
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल आवेदन में 13 FIR को समाप्त करने की मांग की है। ये मामले 20 से 25 जुलाई के बीच हुए CJP के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों से जुड़े हैं।
प्रदर्शन NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में आयोजित किए गए थे। पुलिस ने अब इन मामलों में आगे कार्रवाई नहीं करने की इच्छा जताई है।
पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इन कार्यवाहियों को समाप्त करने का अनुरोध किया है।
पुलिस बोली, आगे कार्रवाई नहीं
दिल्ली पुलिस ने अपने आवेदन में कहा है कि वह इन 13 FIR को लेकर “अब आगे कार्रवाई नहीं करना चाहती”।
यह कदम केंद्र सरकार के 25 जुलाई के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें व्यापक स्तर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अभियोजन से पीछे हटने की बात कही गई थी। हालांकि, इसमें संबंधित लोगों के आपराधिक पूर्ववृत्त को लेकर शर्तें रखी गई थीं।
अब 13 मामलों को औपचारिक रूप से समाप्त करने के लिए मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने है।
2,873 लोगों पर नई FIR का प्रस्ताव
दिल्ली पुलिस ने 13 FIR खत्म करने की मांग के साथ-साथ 2,873 ऐसे लोगों से संबंधित नई FIR दर्ज करने की अनुमति भी मांगी है, जिनके बारे में पुलिस ने गंभीर आपराधिक पूर्ववृत्त होने का आरोप लगाया है।
पुलिस के अनुसार, प्रस्तावित जांच में यह देखा जाएगा कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद इन लोगों में से किसी की भूमिका चोट पहुंचाने या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे अपराधों में थी या नहीं।
इस तरह पुलिस ने आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं रखने वाले प्रदर्शनकारियों और कथित आपराधिक पूर्ववृत्त वाले लोगों को अलग-अलग देखने का प्रस्ताव रखा है।
सुप्रीम कोर्ट ने मार्च नहीं रोका
31 अगस्त को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने CJP के प्रस्तावित 5 सितंबर के मार्च पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया।
अदालत ने कहा कि उस समय ऐसी कोई बाध्यकारी परिस्थिति नहीं थी, जिसके आधार पर यह माना जाए कि प्रदर्शन हिंसक हो जाएगा।
हालांकि, अदालत ने कानून-व्यवस्था से जुड़े तत्काल इंतजामों का जिम्मा प्रशासन पर छोड़ा और प्रदर्शन के आयोजकों, प्रतिभागियों तथा अधिकारियों से शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहने की अपेक्षा जताई।
5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च
CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में एक नए विरोध मार्च की घोषणा की है।
आयोजकों के अनुसार, प्रदर्शन में सरकार की ओर से पहले दिए गए आश्वासनों, खासकर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को वापस लेने से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे।
प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर निकाले जाने की बात कही गई है। आयोजकों ने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन बताया है और कहा है कि जुलाई के प्रदर्शनों से प्रभावित छात्रों के परिवार तथा अन्य लोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
यह मार्च इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसके करीब एक सप्ताह बाद 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन होना है।
केंद्र का आवेदन भी लंबित
केंद्र सरकार ने भी NEET-UG पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज FIR को समाप्त करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
केंद्र के आवेदन पर 1 सितंबर को सुनवाई प्रस्तावित है।
यह कदम उन पिछली न्यायिक कार्यवाहियों के बाद आया है, जिनमें आपराधिक पूर्ववृत्त नहीं रखने वाले कुछ छात्र प्रदर्शनकारियों को राहत दी गई थी।
जुलाई के प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें भी हुई थीं। खासकर 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हुई थी। निर्धारित प्रदर्शन क्षेत्र से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।
पहले भी मिली थी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं रखने वाले कुछ छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई से बचने का निर्देश दिया था।
अदालत ने ऐसे नाबालिगों को रिहा करने का भी आदेश दिया था, जिनका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था।
दिल्ली सरकार ने भी पहले NEET-UG प्रदर्शनों से जुड़ी 13 FIR वापस लेने को मंजूरी दी थी। हालांकि, आपराधिक पूर्ववृत्त रखने वाले लोगों को इस राहत से बाहर रखने की बात कही गई थी।
अब दिल्ली पुलिस ने इन मामलों को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत समाप्त करने की मांग सीधे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी है।
1 सितंबर की सुनवाई अहम
1 सितंबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई 13 FIR के भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।
अदालत यह तय कर सकती है कि इन मामलों को किन शर्तों के साथ समाप्त किया जा सकता है। साथ ही 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च से जुड़े व्यापक कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर भी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने 5 सितंबर के मार्च पर रोक नहीं लगाई है। वहीं दिल्ली पुलिस ने 13 प्रदर्शन संबंधी FIR को आगे नहीं बढ़ाने की मांग की है।
2,873 लोगों से जुड़े प्रस्तावित नए मामले को इन 13 FIR से अलग रखा गया है। इसका संबंध उन लोगों की कथित आपराधिक पृष्ठभूमि और प्रदर्शन के दौरान संभावित आपराधिक भूमिका की जांच से है।
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