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एलन मस्क की गैस टर्बाइन योजना से AI बूम को मिलेगी रफ्तार, प्रदूषण का खतरा भी
Digital Desk
स्पेसएक्स AI बिजली की कमी दूर करने के लिए गैस टर्बाइन पुर्जों की इन-हाउस फाउंड्री विकसित कर रही है, लेकिन इससे प्रदूषण बढ़ने की चिंता है।
स्पेसएक्स महत्वपूर्ण गैस टर्बाइन पुर्जों के निर्माण के लिए अपनी फाउंड्री विकसित कर रही है। इससे AI डेटा सेंटरों को तेजी से बिजली मिल सकती है, लेकिन उत्सर्जन और सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं।
एलन मस्क आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उद्योग की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक पर्याप्त बिजली की उपलब्धता को दूर करने के लिए गैस टर्बाइन के महत्वपूर्ण पुर्जों का उत्पादन अपनी कंपनी के भीतर करने की योजना पर काम कर रहे हैं।
मस्क ने हाल ही में पुष्टि की कि स्पेसएक्स अमेरिका के टेक्सास स्थित बैस्ट्रॉप में एक गुप्त फाउंड्री विकसित कर रही है। इसके साथ ही कंपनी सौर ऊर्जा के उत्पादन की क्षमता तेजी से बढ़ाने की योजना पर भी काम कर रही है।
मस्क के मुताबिक, आने वाले कुछ वर्षों तक सौर ऊर्जा के साथ प्राकृतिक गैस की जरूरत बनी रहेगी। उनका दावा है कि टर्बाइन के ब्लेड और वेन जैसे महत्वपूर्ण पुर्जों की इन-हाउस ढलाई से गैस टर्बाइन की तैनाती में 18 महीने तक की तेजी लाई जा सकती है।
यह योजना ऐसे समय सामने आई है जब टेक कंपनियां अत्यधिक बिजली खपत वाले AI डेटा सेंटर बनाने की होड़ में हैं। AI उद्योग में अब तक उन्नत चिप की कमी सबसे बड़ी आपूर्ति चुनौती मानी जाती रही है, लेकिन बिजली की उपलब्धता तेजी से एक नई बाधा बन रही है।
AI डेटा सेंटर को ज्यादा बिजली
जनरेटिव AI और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के विस्तार से दुनिया में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि 2030 तक डेटा सेंटरों की बिजली खपत दोगुनी हो सकती है। इससे पहले से दबाव झेल रहे पावर ग्रिड और बिजली उत्पादन क्षमता पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
इसी वजह से कई टेक कंपनियां पारंपरिक ग्रिड कनेक्शन का इंतजार करने के बजाय डेटा सेंटरों के पास ही बिजली उत्पादन की व्यवस्था तलाश रही हैं। अमेरिका के कुछ हिस्सों में नए ग्रिड कनेक्शन में कई साल लग सकते हैं।
अमेजन, गूगल, मेटा, ओपनएआई और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां डेटा सेंटरों के लिए गैस आधारित बिजली उत्पादन से जुड़े विकल्प तलाश चुकी हैं।
ऐसी व्यवस्था उन क्षेत्रों में अपेक्षाकृत तेज समाधान दे सकती है, जहां बिजली ग्रिड नई मांग के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं।
स्पेसएक्स बनाएगी टर्बाइन पुर्जे
मस्क ने बताया कि स्पेसएक्स गैस टर्बाइन में इस्तेमाल होने वाले सबसे मुश्किल पुर्जों के लिए अपनी विनिर्माण क्षमता विकसित कर रही है।
उन्होंने X पर लिखा कि प्राकृतिक गैस टर्बाइन उत्पादन में सबसे बड़ी बाधा ब्लेड और वेन की कास्टिंग है। मस्क के अनुसार, स्पेसएक्स के भीतर इन पुर्जों की ढलाई करने से गैस टर्बाइन की तैनाती 18 महीने तक तेज हो सकती है।
यह योजना मस्क की व्यापक ऊर्जा रणनीति से भी जुड़ी है। इसमें जल्द से जल्द हर साल 100 गीगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य शामिल है।
मस्क के अनुसार, सौर क्षमता बढ़ने तक प्राकृतिक गैस पूरक ऊर्जा स्रोत के रूप में काम कर सकती है।
अगर यह योजना सफल रहती है तो स्पेसएक्स को बिजली उत्पादन से जुड़े बुनियादी ढांचे पर अधिक नियंत्रण मिल सकता है और विशेष टर्बाइन निर्माताओं पर निर्भरता घट सकती है।
टर्बाइन पुर्जे बनाना मुश्किल
गैस टर्बाइन के ब्लेड और वेन आधुनिक बिजली उत्पादन प्रणाली के सबसे जटिल इंजीनियरिंग पुर्जों में शामिल हैं।
टर्बाइन के सबसे गर्म हिस्सों में काम करने वाले इन पुर्जों को करीब 3,000 से 3,600 डिग्री फारेनहाइट तक के तापमान का सामना करना पड़ सकता है। यह तापमान उन धातु मिश्रधातुओं के गलनांक से भी कई सौ डिग्री अधिक है जिनसे ये पुर्जे बनाए जाते हैं।
इस अत्यधिक तापमान से बचाने के लिए इंजीनियर विशेष मिश्रधातुओं, थर्मल-बैरियर कोटिंग और अंदरूनी कूलिंग चैनलों का इस्तेमाल करते हैं।
इन पुर्जों की निर्माण प्रक्रिया भी बेहद जटिल होती है और मामूली खामी लंबे समय में टर्बाइन की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है।
सिंगल-क्रिस्टल कास्टिंग चुनौती
टर्बाइन के सबसे गर्म हिस्सों में इस्तेमाल होने वाले ब्लेड में अक्सर सिंगल-क्रिस्टल संरचना की जरूरत होती है। इसका मतलब है कि पुर्जे में ऐसी क्रिस्टल सीमाएं नहीं होतीं, जो अत्यधिक तापमान और दबाव के दौरान कमजोर बिंदु बन सकती हैं।
इसके लिए वैक्यूम फर्नेस में क्रिस्टल के विकास को बेहद नियंत्रित तरीके से संचालित करना पड़ता है।
निर्माण के दौरान बहुत छोटी खामी भी पुर्जे को कमजोर कर सकती है और बाद में उसके संचालन के दौरान उसमें दरार पड़ने का जोखिम बढ़ा सकती है।
विशेषज्ञ कंपनियां पहले से इन पुर्जों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करती हैं, लेकिन गैस आधारित बिजली उत्पादन की बढ़ती मांग ने टर्बाइन आपूर्ति क्षमता पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
टर्बाइन की कमी से AI प्रभावित
GE Vernova ने संकेत दिया है कि उसकी गैस टर्बाइन उत्पादन क्षमता 2030 तक लगभग पूरी तरह बुक है। इससे इस क्षेत्र में मौजूद आपूर्ति बाधा के पैमाने का अंदाजा लगाया जा सकता है।
AI कंपनियों के लिए समस्या सिर्फ प्राकृतिक गैस उपलब्ध होने की नहीं है। ईंधन मौजूद होने के बावजूद कंपनियों को पर्याप्त संख्या में ऐसे टर्बाइन हासिल करने में मुश्किल हो सकती है, जो जल्द बिजली उत्पादन शुरू कर सकें।
मस्क की योजना इसी बाधा को दूर करने की कोशिश है। स्पेसएक्स टर्बाइन के ब्लेड और वेन जैसे महत्वपूर्ण पुर्जों का उत्पादन अपने नियंत्रण में लाकर नए बिजली संयंत्रों की स्थापना की समयसीमा घटाना चाहती है।
अगर कंपनी इन पुर्जों का तेज और बड़े पैमाने पर उत्पादन करने में सफल होती है, तो AI डेटा सेंटरों के लिए नई बिजली उत्पादन क्षमता अपेक्षाकृत जल्दी उपलब्ध हो सकती है।
गैस बिजली से प्रदूषण का खतरा
मस्क की योजना के साथ एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौती भी जुड़ी है।
प्राकृतिक गैस से चलने वाले टर्बाइन अपेक्षाकृत विश्वसनीय बिजली देते हैं और कोयले की तुलना में आम तौर पर कम कार्बन उत्सर्जन करते हैं। लेकिन गैस जलाने से भी कार्बन डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे प्रदूषक निकलते हैं।
AI डेटा सेंटरों के पास तेजी से गैस आधारित बिजली संयंत्र बनाने से उन इलाकों में उत्सर्जन बढ़ सकता है, जहां पहले से औद्योगिक गतिविधियों का दबाव है।
स्थानीय समुदायों के सामने वायु गुणवत्ता के अलावा शोर, पानी की खपत और बड़े बिजली संयंत्रों के दूसरे पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
AI की बिजली दौड़ तेज
मस्क की योजना दिखाती है कि AI क्रांति अब केवल चिप और कंप्यूटिंग क्षमता की दौड़ नहीं रह गई है। यह तेजी से ऊर्जा और बिजली बुनियादी ढांचे की दौड़ में बदल रही है।
AI डेटा सेंटरों में बड़ी संख्या में उन्नत कंप्यूटिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जिन्हें लगातार भारी मात्रा में विश्वसनीय बिजली की जरूरत होती है।
नई ट्रांसमिशन लाइन, ग्रिड विस्तार और बिजली संयंत्र विकसित करने में वर्षों लग सकते हैं। ऐसे में मस्क की रणनीति तेज टर्बाइन निर्माण और दीर्घकालिक सौर विस्तार को एक साथ जोड़ने की कोशिश करती है।
हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्पेसएक्स अत्यधिक जटिल टर्बाइन पुर्जों को बड़े पैमाने पर विश्वसनीय तरीके से बनाने में कितना सफल होता है।
बिजली बढ़ेगी, कीमत भी होगी
अगर मस्क की विनिर्माण योजना सफल रहती है तो अतिरिक्त गैस आधारित बिजली उत्पादन क्षमता तेजी से उपलब्ध हो सकती है। इससे बिजली के लिए बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच स्पेसएक्स और उससे जुड़े AI कारोबार को फायदा मिल सकता है।
लेकिन गैस टर्बाइन की तैनाती तेज करने से टेक उद्योग की जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता भी बढ़ सकती है। यह उस समय हो रहा है जब सरकारें और कंपनियां कार्बन उत्सर्जन घटाने के दबाव में हैं।
AI की बढ़ती बिजली जरूरतों और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य के बीच संतुलन बनाना आने वाले वर्षों की बड़ी चुनौती होगी।
फिलहाल मस्क की रणनीति सौर ऊर्जा विस्तार और प्राकृतिक गैस आधारित बैकअप के संयोजन पर केंद्रित दिखाई देती है। यह व्यवस्था केवल एक संक्रमणकालीन समाधान साबित होगी या AI की ऊर्जा व्यवस्था का स्थायी हिस्सा बनेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अक्षय ऊर्जा, बिजली ग्रिड और ऊर्जा भंडारण तकनीक कितनी तेजी से विस्तार करती हैं।
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