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NEET-SS कटऑफ पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से फिर विचार करने को कहा, 2 हजार तक सीटें खाली रहने की आशंका
Digital Desk
दो चरणों की काउंसलिंग के बाद बड़ी संख्या में सुपर-स्पेशियलिटी सीटें खाली; अगली सुनवाई 17 सितंबर को
सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आयोजित NEET-SS 2025 की काउंसलिंग में बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से अपने रुख पर पुनर्विचार करने को कहा है। अदालत ने कहा कि बड़ी संख्या में सीटों का खाली रहना कटऑफ प्रतिशत में कमी पर दोबारा विचार करने का मजबूत आधार है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अलोक अराधे की पीठ ने की। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय, मेडिकल काउंसलिंग कमेटी और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से विचार-विमर्श के बाद इस वर्ष कटऑफ कम नहीं करने का फैसला लिया गया है।
1,800 से 2,000 सीटें खाली रहने का मामला
रिपोर्टों के अनुसार, दो चरणों की काउंसलिंग के बाद 4,000 से अधिक सुपर-स्पेशियलिटी सीटों में करीब 1,800 सीटें खाली थीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि यदि कटऑफ में कमी नहीं की गई तो खाली सीटों की संख्या करीब 2,000 तक पहुंच सकती है। इन सीटों में कार्डियोलॉजी, न्यूरोसर्जरी और ऑन्कोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण सुपर-स्पेशियलिटी पाठ्यक्रम भी शामिल बताए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इन सीटों का खाली रहना चिकित्सा शिक्षा में उपलब्ध प्रशिक्षण अवसरों का नुकसान है।
केंद्र ने कटऑफ नहीं घटाने का फैसला लिया
केंद्र ने अदालत को बताया कि इस वर्ष कटऑफ प्रतिशत में कमी करने के बजाय खाली सीटों को भरने के लिए विशेष स्ट्रे राउंड आयोजित करने का फैसला किया गया है। सरकार ने यह निर्णय संबंधित संस्थाओं से परामर्श के बाद लिया है। पिछले वर्ष सुपर-स्पेशियलिटी दाखिले के लिए कटऑफ में बड़ी कमी किए जाने को लेकर विवाद हुआ था। इस बार केंद्र ने उसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए कटऑफ कम नहीं करने का रुख अपनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार पर दिया जोर
सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी संख्या में सीटों के खाली रहने को गंभीरता से लेते हुए केंद्र को अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। अदालत के रुख से अब यह स्पष्ट है कि खाली सुपर-स्पेशियलिटी सीटों को लेकर केंद्र और चिकित्सा शिक्षा नियामक संस्थाओं को फिर से विकल्पों पर विचार करना होगा। हालांकि, कटऑफ घटाने का अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।
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