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न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 62 साल होगी, सुप्रीम कोर्ट का 7 राज्यों को निर्देश
मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत सात राज्यों को दो महीने में नियम बदलने को कहा; 60 की उम्र के बाद हाईकोर्ट करेगा योग्यता और प्रदर्शन का आकलन
जिला न्यायपालिका में काम करने वाले न्यायिक अधिकारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, सिक्किम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल को न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने के लिए सेवा नियमों में संशोधन का निर्देश दिया है। यह निर्देश 1 सितंबर 2026 के आदेश के तहत दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित राज्यों से नियमों में बदलाव जल्द से जल्द करने और संभव हो तो दो महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी करने को कहा है।
फिलहाल नियमों में संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने तक भी इन सात राज्यों में 60 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके न्यायिक अधिकारी केवल उम्र के आधार पर रिटायर नहीं होंगे। 62 वर्ष तक सेवा जारी रखने के लिए संबंधित हाईकोर्ट को उनकी उपयुक्तता और प्रदर्शन का आकलन करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च 2026 या उसके बाद सेवानिवृत्त हुए न्यायिक अधिकारियों के लिए भी विशेष व्यवस्था की है। ऐसे अधिकारी दोबारा न्यायिक सेवा में लौटने का विकल्प चुन सकते हैं, लेकिन शर्त यह है कि रिटायरमेंट के बाद उन्होंने कोई दूसरी नौकरी या केंद्र अथवा राज्य सरकार के अधीन लाभ का पद स्वीकार न किया हो।
दोबारा सेवा में आने वाले अधिकारियों के मामले में भी अंतिम निर्णय संबंधित हाईकोर्ट के आकलन पर निर्भर रहेगा। उपयुक्त पाए जाने पर उन्हें वेतन, वरिष्ठता और सेवा की निरंतरता से जुड़े परिणामी लाभ दिए जाने का प्रावधान रखा गया है। पहले से मिले सेवानिवृत्ति लाभों को लेकर भी आदेश में आवश्यक समायोजन की बात कही गई है। यह मामला All India Judges Association से जुड़ी कार्यवाही के दौरान सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने जिला न्यायपालिका में स्वीकृत पदों और कार्यरत अधिकारियों के बीच बने अंतर को भी अपने विचार में रखा। अदालत के समक्ष यह बात सामने आई कि अधीनस्थ न्यायपालिका में बड़ी संख्या में पद खाली हैं और अनुभवी अधिकारियों को बनाए रखने से इस कमी को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
मध्य प्रदेश के लिए इसका क्या मतलब है?
मध्य प्रदेश उन सात राज्यों में शामिल है, जिन्होंने न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के प्रस्ताव पर सहमति दी है। सुप्रीम कोर्ट के जुलाई 2026 के आदेश में भी दर्ज है कि राज्य सरकार 62 वर्ष की आयु तक सेवा विस्तार के पक्ष में थी और हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने भी न्यायिक अधिकारियों की सुपरएनुएशन आयु 60 से 62 वर्ष करने के प्रस्ताव को बहुमत से मंजूरी दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक सेवा को सामान्य सरकारी सेवा के समान नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि जिला न्यायपालिका में अनुभवी अधिकारियों को बनाए रखने की जरूरत और न्यायिक पदों की रिक्तियों को देखते हुए इस मुद्दे पर अलग दृष्टिकोण जरूरी है। जिन राज्यों ने अभी 60 से 62 वर्ष की आयु बढ़ाने पर सहमति नहीं दी है, उन्हें भी सुप्रीम कोर्ट ने अपने रुख पर दोबारा विचार करने को कहा है। इन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर निर्णय लेकर अनुपालन रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2026 को होगी।
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