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22 साल बाद होने जा रहे हैं छात्र संघ चुनाव, NSUI और ABVP ने कसी कमर
JAGRAN DESK
मध्य प्रदेश में सरकार छात्रसंघ चुनाव कराने जा रही है. ये चुनाव 22 साल बाद प्रत्यक्ष प्रणाली से होने जा रहे हैं. नए साल के शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए चुनाव की तैयारियां सरकार ने शुरू कर दी हैं.
मध्य प्रदेश के दो प्रमुख छात्र संगठन NSUI और ABVP ने भी कमर कस ली है. NSUI जीत का दावा कर रही है. वहीं ABVP भी पूरी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है. NSUI को मजबूत दावेदार न मानते हुए भी जीत का दावा कर रही है.
2017 में हुए आखरी बार चुनाव
मध्य प्रदेश में आखरी बार छात्र संघ के चुनाव 2017 में हुए थे. इसके बाद चुनाव पर रोक लगा दी गई. 2023 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की सरकार थी, तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री, अब के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा चुनाव कराने पर प्रस्ताव लाया भी गया था लेकिन विधानसभा चुनाव आने से प्रस्ताव टल गया. अब डॉ. मोहन यादव खुद मुख्यमंत्री है. उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार द्वारा चुनाव कराने के लिए मसौदा तैयार किया है. ऐसे में छात्रों की उम्मीद और बढ़ गई है.
छात्र संघ चुनाव पर विद्यार्थियों की राय
बीए तृतीय वर्ष के छात्र अमन ठाकुर कहते हैं कि, जब से कॉलेज में आया हूं चुनाव नहीं देखे. छात्रों की कई समस्याएं है, लेकिन लीडर नहीं होने से सुनवाई नहीं होती. चुनाव होने चाहिए. छात्र हित के लिए यह बेहद जरूरी है. एमएम इंग्लिश लिटरेचर के छात्र विवेक कड़ोले बताते है कि, गत 6 से 7 साल हो गए हैं, चुनाव नहीं हुए है. इस साल भी नवंबर दिसंबर में चुनाव कराने का आश्वासन मिला था, लेकिन नहीं हुए. कॉलेज में विद्यार्थियों को कोई समस्या होती है तो वह सीधे फैकल्टी से बात नहीं कर पाते हैं. लीडर होगा तो दमदारी से बात रख पाएंगे.
कॉलेज फैकल्टी की मनमानी बंद होगी
छात्रा निकिता यादव और सपना ने कहा कि, चुनाव होता है तो छात्राओं की समस्याओं का भी निराकरण होगा. कॉलेज में बाहरी व्यक्ति आते हैं, परेशान भी करते हैं. संगठन होगा, लीडर होगा तो यह सब भी बंद हो जाएगा. कॉलेज में फैकल्टी की मनमानी नहीं चल पाएगी. छात्र हित में निर्णय लिए जाएंगे.
चुनाव से विद्यार्थी की बढ़ती है समझ
वहीं, राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. कपिल खरे ने कहां कि, स्कूल से कॉलेज में पहुंचने पर विद्यार्थियों को चुनाव और मतदान का अनुभव नहीं रहता है. छात्र संघ चुनाव के जरिए बच्चे जागरूक होते हैं, और चुनाव को करीब से जानते है समझते है. इसका फायदा उन्हें विधानसभा, लोकसभा जैसे चुनावों में बेहतर नेता का चुनाव करने में मिलता है. छात्र जीवन में चुनाव से उन्हें यह भी समझ आती है कि समस्या क्या है, कहां इसका निदान होगा. साथ ही राजनीतिक में इंट्रेस्ट रखने वाले युवाओं के लिए यह पहली सीढ़ी मानी जाती है.
चुनाव होने तक जारी रहेगी मांग
बरहाल, खरगोन समेत मध्य प्रदेश तमाम कॉलेजों में 2017 के बाद से विद्यार्थी शासन के आदेश की राह देख रहे है. NSUI ओर ABVP दोनों की संगठन से जुड़े पदाधिकारी तथा कॉलेज विद्यार्थियों ने कई आंदोलन किए, ज्ञापन दिए, पर एक बार भी चुनाव नहीं हुए. साल 2025 में चुनाव होंगे या नहीं यह तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पद निर्भर करता है. लेकिन, विद्यार्थियों का यही कहना है कि चुनाव होना चाहिए, जब तक नहीं होगा, मांग जारी रहेगी.
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22 साल बाद होने जा रहे हैं छात्र संघ चुनाव, NSUI और ABVP ने कसी कमर
JAGRAN DESK
मध्य प्रदेश के दो प्रमुख छात्र संगठन NSUI और ABVP ने भी कमर कस ली है. NSUI जीत का दावा कर रही है. वहीं ABVP भी पूरी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है. NSUI को मजबूत दावेदार न मानते हुए भी जीत का दावा कर रही है.
2017 में हुए आखरी बार चुनाव
मध्य प्रदेश में आखरी बार छात्र संघ के चुनाव 2017 में हुए थे. इसके बाद चुनाव पर रोक लगा दी गई. 2023 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की सरकार थी, तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री, अब के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा चुनाव कराने पर प्रस्ताव लाया भी गया था लेकिन विधानसभा चुनाव आने से प्रस्ताव टल गया. अब डॉ. मोहन यादव खुद मुख्यमंत्री है. उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार द्वारा चुनाव कराने के लिए मसौदा तैयार किया है. ऐसे में छात्रों की उम्मीद और बढ़ गई है.
छात्र संघ चुनाव पर विद्यार्थियों की राय
बीए तृतीय वर्ष के छात्र अमन ठाकुर कहते हैं कि, जब से कॉलेज में आया हूं चुनाव नहीं देखे. छात्रों की कई समस्याएं है, लेकिन लीडर नहीं होने से सुनवाई नहीं होती. चुनाव होने चाहिए. छात्र हित के लिए यह बेहद जरूरी है. एमएम इंग्लिश लिटरेचर के छात्र विवेक कड़ोले बताते है कि, गत 6 से 7 साल हो गए हैं, चुनाव नहीं हुए है. इस साल भी नवंबर दिसंबर में चुनाव कराने का आश्वासन मिला था, लेकिन नहीं हुए. कॉलेज में विद्यार्थियों को कोई समस्या होती है तो वह सीधे फैकल्टी से बात नहीं कर पाते हैं. लीडर होगा तो दमदारी से बात रख पाएंगे.
कॉलेज फैकल्टी की मनमानी बंद होगी
छात्रा निकिता यादव और सपना ने कहा कि, चुनाव होता है तो छात्राओं की समस्याओं का भी निराकरण होगा. कॉलेज में बाहरी व्यक्ति आते हैं, परेशान भी करते हैं. संगठन होगा, लीडर होगा तो यह सब भी बंद हो जाएगा. कॉलेज में फैकल्टी की मनमानी नहीं चल पाएगी. छात्र हित में निर्णय लिए जाएंगे.
चुनाव से विद्यार्थी की बढ़ती है समझ
वहीं, राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. कपिल खरे ने कहां कि, स्कूल से कॉलेज में पहुंचने पर विद्यार्थियों को चुनाव और मतदान का अनुभव नहीं रहता है. छात्र संघ चुनाव के जरिए बच्चे जागरूक होते हैं, और चुनाव को करीब से जानते है समझते है. इसका फायदा उन्हें विधानसभा, लोकसभा जैसे चुनावों में बेहतर नेता का चुनाव करने में मिलता है. छात्र जीवन में चुनाव से उन्हें यह भी समझ आती है कि समस्या क्या है, कहां इसका निदान होगा. साथ ही राजनीतिक में इंट्रेस्ट रखने वाले युवाओं के लिए यह पहली सीढ़ी मानी जाती है.
चुनाव होने तक जारी रहेगी मांग
बरहाल, खरगोन समेत मध्य प्रदेश तमाम कॉलेजों में 2017 के बाद से विद्यार्थी शासन के आदेश की राह देख रहे है. NSUI ओर ABVP दोनों की संगठन से जुड़े पदाधिकारी तथा कॉलेज विद्यार्थियों ने कई आंदोलन किए, ज्ञापन दिए, पर एक बार भी चुनाव नहीं हुए. साल 2025 में चुनाव होंगे या नहीं यह तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पद निर्भर करता है. लेकिन, विद्यार्थियों का यही कहना है कि चुनाव होना चाहिए, जब तक नहीं होगा, मांग जारी रहेगी.
