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कार्तिक मास 2025: जानिए भगवान विष्णु से जुड़ी मान्यता और इस महीने मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार
Dharam, Desk
कार्तिक मास 2025 की शुरुआत मंगलवार से हो गई है। हिंदू धर्म में यह महीना बेहद खास माना जाता है, क्योंकि यह भगवान विष्णु का प्रिय मास है।
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास दान, स्नान और पूजा-अर्चना का समय होता है। मान्यता है कि इस महीने में भगवान विष्णु जल में वास करते हैं और उनकी उपासना करने से सुख, समृद्धि और भाग्य में वृद्धि होती है।
कार्तिक मास की शुरुआत शरद पूर्णिमा से होती है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण त्योहार आते हैं, जो धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं।
प्रमुख त्योहार और व्रत:
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करवा चौथ: कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत करती हैं। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूरा किया जाता है।
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धनतेरस: कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था। लोग सोना-चांदी, धातु के बर्तन खरीदते हैं और लक्ष्मी-कुबेर की पूजा करते हैं।
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नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली): धनतेरस के अगले दिन। इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था। भक्त दीपदान और स्नान करते हैं।
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दीपावली: कार्तिक अमावस्या को मनाई जाती है। यह दिन भगवान राम के अयोध्या लौटने के अवसर पर मनाया जाता है। लोग माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं।
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गोवर्धन पूजा और भाई दूज: दीपावली के अगले दिन। गोवर्धन पूजा में गोवर्धन पर्वत की पूजा होती है और भाई दूज में भाई-बहन का संबंध मजबूत होता है।
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छठ पूजा, गोपाष्टमी, प्रबोधिनी एकादशी, कार्तिक पूर्णिमा और गुरुनानक जयंती भी कार्तिक मास में आते हैं।
भगवान विष्णु का योगनिद्रा से जागना:
कार्तिक मास में भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं। देवशयनी एकादशी से उनकी चातुर्मासीन निद्रा शुरू होती है और देवउठनी एकादशी पर वे जागते हैं। इस दिन उनकी पूजा-अर्चना करने से जीवन में खुशहाली और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
इसलिए कार्तिक मास को धर्म और आस्था के दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
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पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास दान, स्नान और पूजा-अर्चना का समय होता है। मान्यता है कि इस महीने में भगवान विष्णु जल में वास करते हैं और उनकी उपासना करने से सुख, समृद्धि और भाग्य में वृद्धि होती है।
कार्तिक मास की शुरुआत शरद पूर्णिमा से होती है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण त्योहार आते हैं, जो धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं।
प्रमुख त्योहार और व्रत:
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करवा चौथ: कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत करती हैं। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूरा किया जाता है।
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धनतेरस: कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था। लोग सोना-चांदी, धातु के बर्तन खरीदते हैं और लक्ष्मी-कुबेर की पूजा करते हैं।
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नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली): धनतेरस के अगले दिन। इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था। भक्त दीपदान और स्नान करते हैं।
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दीपावली: कार्तिक अमावस्या को मनाई जाती है। यह दिन भगवान राम के अयोध्या लौटने के अवसर पर मनाया जाता है। लोग माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं।
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गोवर्धन पूजा और भाई दूज: दीपावली के अगले दिन। गोवर्धन पूजा में गोवर्धन पर्वत की पूजा होती है और भाई दूज में भाई-बहन का संबंध मजबूत होता है।
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छठ पूजा, गोपाष्टमी, प्रबोधिनी एकादशी, कार्तिक पूर्णिमा और गुरुनानक जयंती भी कार्तिक मास में आते हैं।
भगवान विष्णु का योगनिद्रा से जागना:
कार्तिक मास में भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं। देवशयनी एकादशी से उनकी चातुर्मासीन निद्रा शुरू होती है और देवउठनी एकादशी पर वे जागते हैं। इस दिन उनकी पूजा-अर्चना करने से जीवन में खुशहाली और शुभ फल की प्राप्ति होती है।
इसलिए कार्तिक मास को धर्म और आस्था के दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
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