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सर्दियों में सेहत का भरोसेमंद साथी: रोजाना खाएं गोंद के लड्डू, जानें पारंपरिक नानी वाली रेसिपी
Lifestyle
ठंड में शरीर को गर्म रखने, इम्यूनिटी बढ़ाने और हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए गोंद के लड्डू फायदेमंद; जानें कैसे बनाएं दादी-नानी की देसी रेसिपी।
सर्दियों में ऊर्जा और गर्माहट देने वाले खाद्य पदार्थों की खोज बढ़ जाती है। इसी मौसम में भारत के कई प्रदेशों में गोंद के लड्डू पारंपरिक रूप से खूब पसंद किए जाते हैं। देसी गोंद से बने ये लड्डू न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि शरीर को गर्म रखने, इम्यूनिटी बढ़ाने और हड्डियों को मजबूत करने में भी मदद करते हैं। आज की ताज़ा ख़बरों और पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरीज़ में इस पारंपरिक रेसिपी की चर्चा ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया का हिस्सा बनी हुई है।
गोंद के लड्डू का सेवन विशेष रूप से नवंबर से लेकर जनवरी तक अधिक किया जाता है। पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक, गोंद की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे ठंड के मौसम के लिए आदर्श भोजन माना जाता है। दादी-नानी की रेसिपी से तैयार किए गए लड्डू में गेहूं का आटा, देसी घी, ड्राई फ्रूट्स और बूरा मिलाकर इसे और पौष्टिक बनाया जाता है। यह संयोजन शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करता है।
क्यों और कैसे फायदेमंद हैं गोंद के लड्डू
गोवा के ‘ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा’ के एसोसिएट प्रोफेसर वैद्य संजय खेडकर के अनुसार, गोंद में प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेट्री और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। ये गुण जोड़ों के दर्द, गठिया और हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याओं में राहत देते हैं। सर्दियों में आमतौर पर कई लोगों को थकान और सुस्ती महसूस होती है। गोंद के लड्डू इस समस्या को दूर कर शरीर में गर्माहट और ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ इन्हें विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए लाभकारी बताते हैं।
नानी की रेसिपी: घर पर कैसे बनाएं गोंद के लड्डू
गोंद के लड्डू बनाने के लिए 1 कप गेहूं का आटा, 1 कप बूरा, तीन-चौथाई कप घी, करीब 100 ग्राम गोंद, 10–12 काजू और दो टेबल स्पून खरबूजे के बीज की जरूरत होती है।
सबसे पहले गोंद को छोटे टुकड़ों में तोड़ लिया जाता है। गर्म घी में इसे धीमी आंच पर तब तक भुना जाता है, जब तक यह फूलकर हल्का कुरकुरा न हो जाए। इसके बाद बचे घी में आटा भूनकर अलग रख दिया जाता है। ड्राई फ्रूट्स और बीजों को हल्का रोस्ट करने के बाद आटे में मिला लें। भुने हुए गोंद को बेलन की मदद से बारीक कर मिश्रण में मिलाया जाता है। अंत में बूरा डालकर घी की मदद से लड्डू बनाए जाते हैं और सेट होने के लिए लगभग एक घंटे तक खुली हवा में छोड़ दिए जाते हैं।
बदलती जीवनशैली में देसी रेसिपी का महत्व
तेजी से बदलती जीवनशैली में जहां पैकेज्ड फूड की ओर रुझान बढ़ा है, वहीं देसी रेसिपियों की ओर वापसी भी दिखाई दे रही है। पारंपरिक खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के साथ, गोंद के लड्डू राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार अपडेट में भी अपनी जगह बना रहे हैं। विशेषज्ञ इसे सर्दियों की डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं ताकि शरीर प्राकृतिक रूप से मजबूत बने।
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सर्दियों में ऊर्जा और गर्माहट देने वाले खाद्य पदार्थों की खोज बढ़ जाती है। इसी मौसम में भारत के कई प्रदेशों में गोंद के लड्डू पारंपरिक रूप से खूब पसंद किए जाते हैं। देसी गोंद से बने ये लड्डू न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि शरीर को गर्म रखने, इम्यूनिटी बढ़ाने और हड्डियों को मजबूत करने में भी मदद करते हैं। आज की ताज़ा ख़बरों और पब्लिक इंटरेस्ट स्टोरीज़ में इस पारंपरिक रेसिपी की चर्चा ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया का हिस्सा बनी हुई है।
गोंद के लड्डू का सेवन विशेष रूप से नवंबर से लेकर जनवरी तक अधिक किया जाता है। पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक, गोंद की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे ठंड के मौसम के लिए आदर्श भोजन माना जाता है। दादी-नानी की रेसिपी से तैयार किए गए लड्डू में गेहूं का आटा, देसी घी, ड्राई फ्रूट्स और बूरा मिलाकर इसे और पौष्टिक बनाया जाता है। यह संयोजन शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करता है।
क्यों और कैसे फायदेमंद हैं गोंद के लड्डू
गोवा के ‘ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेदा’ के एसोसिएट प्रोफेसर वैद्य संजय खेडकर के अनुसार, गोंद में प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेट्री और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। ये गुण जोड़ों के दर्द, गठिया और हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याओं में राहत देते हैं। सर्दियों में आमतौर पर कई लोगों को थकान और सुस्ती महसूस होती है। गोंद के लड्डू इस समस्या को दूर कर शरीर में गर्माहट और ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं। आयुर्वेदिक विशेषज्ञ इन्हें विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए लाभकारी बताते हैं।
नानी की रेसिपी: घर पर कैसे बनाएं गोंद के लड्डू
गोंद के लड्डू बनाने के लिए 1 कप गेहूं का आटा, 1 कप बूरा, तीन-चौथाई कप घी, करीब 100 ग्राम गोंद, 10–12 काजू और दो टेबल स्पून खरबूजे के बीज की जरूरत होती है।
सबसे पहले गोंद को छोटे टुकड़ों में तोड़ लिया जाता है। गर्म घी में इसे धीमी आंच पर तब तक भुना जाता है, जब तक यह फूलकर हल्का कुरकुरा न हो जाए। इसके बाद बचे घी में आटा भूनकर अलग रख दिया जाता है। ड्राई फ्रूट्स और बीजों को हल्का रोस्ट करने के बाद आटे में मिला लें। भुने हुए गोंद को बेलन की मदद से बारीक कर मिश्रण में मिलाया जाता है। अंत में बूरा डालकर घी की मदद से लड्डू बनाए जाते हैं और सेट होने के लिए लगभग एक घंटे तक खुली हवा में छोड़ दिए जाते हैं।
बदलती जीवनशैली में देसी रेसिपी का महत्व
तेजी से बदलती जीवनशैली में जहां पैकेज्ड फूड की ओर रुझान बढ़ा है, वहीं देसी रेसिपियों की ओर वापसी भी दिखाई दे रही है। पारंपरिक खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के साथ, गोंद के लड्डू राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार अपडेट में भी अपनी जगह बना रहे हैं। विशेषज्ञ इसे सर्दियों की डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं ताकि शरीर प्राकृतिक रूप से मजबूत बने।
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