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बारिश के मौसम में Gut Health का देसी फॉर्मूला: कांजी, दही और Kombucha कितने फायदेमंद?
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Fermented Foods में मौजूद कुछ जीवित सूक्ष्मजीव आंतों के माइक्रोबायोम को सपोर्ट कर सकते हैं, लेकिन हर fermented food को probiotic मानना सही नहीं
बारिश और उमस के मौसम में पाचन से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में दही, कांजी और अन्य खमीर उठे खाद्य पदार्थ भोजन का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। इनमें मौजूद कुछ जीवित सूक्ष्मजीव आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीव समुदाय को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं।
दही सबसे आसान विकल्प
दही में मौजूद जीवित लाभकारी जीवाणु पाचन तंत्र के लिए उपयोगी हो सकते हैं। नियमित और संतुलित मात्रा में दही का सेवन आंतों की सेहत के लिए मददगार माना जाता है।
कांजी और खमीर उठे खाद्य पदार्थ
कांजी जैसे पारंपरिक पेय खमीर उठने की प्रक्रिया से तैयार होते हैं। इस दौरान इनमें अलग-अलग तरह के सूक्ष्मजीव और प्राकृतिक यौगिक बनते हैं। हालांकि, हर खमीर उठे खाद्य पदार्थ में लाभकारी जीवाणुओं की मात्रा और प्रकार एक जैसे नहीं होते। इसलिए इन्हें किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जा सकता।
कोम्बुचा कितना फायदेमंद?
कोम्बुचा भी एक खमीर उठाया हुआ पेय है। इसके संभावित स्वास्थ्य लाभों पर शोध जारी है, लेकिन मनुष्यों पर हुए अध्ययनों के प्रमाण अभी सीमित हैं। इसलिए इसे पानी या किसी दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
आंत और रोग प्रतिरोधक क्षमता का संबंध
आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीव समुदाय पाचन के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता से भी जुड़ा है। संतुलित भोजन, पर्याप्त रेशेदार आहार और उचित मात्रा में खमीर उठे खाद्य पदार्थ आंतों के स्वास्थ्य को सहारा दे सकते हैं।
घर पर बनाते समय रखें सावधानी
घर पर कांजी या अन्य खमीर उठे खाद्य पदार्थ बनाते समय साफ बर्तन, साफ पानी और सही प्रक्रिया का ध्यान रखना जरूरी है। अगर खाद्य पदार्थ में फफूंद, असामान्य रंग या खराब गंध दिखाई दे, तो उसे खाने से बचना चाहिए। बहुत अधिक नमक या चीनी वाले खमीर उठे खाद्य पदार्थों का सेवन भी रोजाना ज्यादा मात्रा में नहीं करना चाहिए।
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