- Hindi News
- लाइफ स्टाइल
- बारिश में प्यास कम लगे तो भी पानी पीना जरूरी, ऐसे रखें शरीर हाइड्रेट
बारिश में प्यास कम लगे तो भी पानी पीना जरूरी, ऐसे रखें शरीर हाइड्रेट
लाइफ स्टाइल
मॉनसून में उमस और कम प्यास के कारण पानी कम पीने की आदत पड़ सकती है, जानें रोज की हाइड्रेशन जरूरत पूरी करने के आसान तरीके
बारिश के मौसम में तापमान भले ही गर्मियों के मुकाबले कम महसूस हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शरीर को पानी की जरूरत कम हो गई है। बादल, ठंडी हवा और लगातार बारिश के कारण कई लोगों को प्यास कम लगती है और इसी वजह से दिनभर पानी पीने का ध्यान नहीं रहता। खासकर ऑफिस में लंबे समय तक बैठने वाले या घर में रहने वाले लोगों के साथ ऐसा ज्यादा देखा जाता है। शरीर सांस लेने, पेशाब और पसीने के जरिए लगातार पानी खोता रहता है। पर्याप्त तरल न मिलने पर थकान, सिरदर्द, चक्कर, मुंह सूखना और पेशाब का रंग गहरा होना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। NHS के अनुसार नियमित अंतराल पर पानी और दूसरे स्वस्थ तरल लेते रहना डिहाइड्रेशन से बचने में मदद करता है।
यहां एक बात साफ समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति के लिए रोज ठीक 2.5 या 3 लीटर पानी पीना कोई एक जैसा मेडिकल नियम नहीं है। पानी की जरूरत उम्र, शरीर, मौसम, शारीरिक मेहनत, खान-पान और स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करती है। WHO के एक दस्तावेज में वयस्क के लिए 2.5 से 3 लीटर प्रतिदिन का आंकड़ा बुनियादी पानी की जरूरत के संदर्भ में दिया गया है और इसमें जलवायु व व्यक्ति की स्थिति के अनुसार बदलाव की बात कही गई है। दूसरी ओर NHS आम तौर पर 6 से 8 कप या गिलास तरल लेने को एक सामान्य गाइड मानता है, जिसमें खाने से मिलने वाला पानी भी अलग से योगदान देता है। इसलिए बारिश में खुद को जबरन बहुत ज्यादा पानी पिलाने के बजाय पूरे दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में तरल लेते रहना ज्यादा व्यावहारिक तरीका है।
सबसे आसान तरीका है पानी को प्यास से जोड़ने के बजाय अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेना। सुबह उठने के बाद एक गिलास पानी से दिन शुरू करें। नाश्ते के कुछ समय बाद दोबारा पानी लें और ऑफिस या पढ़ाई की जगह पर एक बोतल हमेशा सामने रखें। हर बार फोन देखने या किसी मीटिंग के खत्म होने के बाद कुछ घूंट पानी पीने की आदत भी बनाई जा सकती है। अगर एक साथ ज्यादा पानी पीना मुश्किल लगता है तो बोतल में दिन के अलग-अलग समय के निशान लगा लें। मसलन, सुबह तक एक हिस्सा, दोपहर तक दूसरा और शाम तक बाकी पानी खत्म करने का लक्ष्य रखा जा सकता है। इस तरीके से आखिरी समय में बहुत सारा पानी पीने की जरूरत नहीं पड़ेगी। WHO भी नियमित रूप से पानी पीने की सलाह देता है, खासकर ऐसी परिस्थितियों में जहां शरीर से तरल ज्यादा निकल रहा हो।
जिन लोगों को सादा पानी पीना पसंद नहीं है, वे नींबू या लाइम की स्लाइस डालकर इसका स्वाद बदल सकते हैं। बिना ज्यादा चीनी वाला नींबू पानी, सूप, दूध और पानी से भरपूर फल-सब्जियां भी कुल तरल सेवन में योगदान देती हैं। NHS के मुताबिक पानी के अलावा दूध, कुछ बिना चीनी वाले पेय, चाय-कॉफी और कई खाद्य पदार्थ भी शरीर को तरल देते हैं। हालांकि मीठे शीतल पेय और बहुत ज्यादा चीनी वाले ड्रिंक को हाइड्रेशन का मुख्य जरिया बनाना सही विकल्प नहीं है। फलों का रस भी सीमित मात्रा में लेना बेहतर है। बारिश के मौसम में घर के बाहर मिलने वाला खुला पानी या संदिग्ध स्रोत का पानी पीने से बचना भी उतना ही जरूरी है। WHO के मुताबिक दूषित पानी से डायरिया, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस ए जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
हाइड्रेशन का अंदाजा सिर्फ इस बात से नहीं लगाना चाहिए कि आज कितने गिलास पानी पिए। पेशाब का रंग भी एक आसान संकेत हो सकता है। आम तौर पर हल्का या पीला रंग पर्याप्त हाइड्रेशन की तरफ इशारा करता है, जबकि बहुत गहरा पीला और तेज गंध वाला पेशाब शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है। इसके साथ अगर मुंह सूख रहा है, सामान्य से कम पेशाब हो रहा है, कमजोरी या चक्कर महसूस हो रहे हैं तो तरल सेवन पर ध्यान देना चाहिए। उल्टी या दस्त होने पर पानी के साथ शरीर से नमक और दूसरे इलेक्ट्रोलाइट भी निकलते हैं। ऐसे मामलों में केवल सादा पानी पर्याप्त न हो सकता है और ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन की जरूरत पड़ सकती है। NHS भी ऐसी स्थिति में फार्मासिस्ट या डॉक्टर की सलाह से ORS लेने की बात कहता है।
बारिश में बाहर निकलने वालों के लिए पानी की बोतल साथ रखना सबसे आसान हैक है। उमस ज्यादा हो, पैदल चलना हो, एक्सरसाइज करनी हो या लंबे समय तक बाहर रहना हो तो सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा तरल की जरूरत पड़ सकती है। वहीं किडनी, हार्ट या दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को अपनी मर्जी से 3 लीटर पानी का लक्ष्य तय नहीं करना चाहिए, क्योंकि कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में डॉक्टर तरल की मात्रा सीमित करने की सलाह दे सकते हैं। इसी तरह बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों में डिहाइड्रेशन का जोखिम अलग हो सकता है। रोज पानी पीने की आदत का सबसे अच्छा तरीका यही है कि प्यास का इंतजार न करें, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी भी न पिएं। दिनभर छोटे-छोटे अंतराल पर पानी और दूसरे स्वस्थ तरल लेते रहें और शरीर के संकेतों पर नजर रखें।
बारिश में प्यास कम लगे तो भी पानी पीना जरूरी, ऐसे रखें शरीर हाइड्रेट
लाइफ स्टाइल
बारिश के मौसम में तापमान भले ही गर्मियों के मुकाबले कम महसूस हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शरीर को पानी की जरूरत कम हो गई है। बादल, ठंडी हवा और लगातार बारिश के कारण कई लोगों को प्यास कम लगती है और इसी वजह से दिनभर पानी पीने का ध्यान नहीं रहता। खासकर ऑफिस में लंबे समय तक बैठने वाले या घर में रहने वाले लोगों के साथ ऐसा ज्यादा देखा जाता है। शरीर सांस लेने, पेशाब और पसीने के जरिए लगातार पानी खोता रहता है। पर्याप्त तरल न मिलने पर थकान, सिरदर्द, चक्कर, मुंह सूखना और पेशाब का रंग गहरा होना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। NHS के अनुसार नियमित अंतराल पर पानी और दूसरे स्वस्थ तरल लेते रहना डिहाइड्रेशन से बचने में मदद करता है।
यहां एक बात साफ समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति के लिए रोज ठीक 2.5 या 3 लीटर पानी पीना कोई एक जैसा मेडिकल नियम नहीं है। पानी की जरूरत उम्र, शरीर, मौसम, शारीरिक मेहनत, खान-पान और स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करती है। WHO के एक दस्तावेज में वयस्क के लिए 2.5 से 3 लीटर प्रतिदिन का आंकड़ा बुनियादी पानी की जरूरत के संदर्भ में दिया गया है और इसमें जलवायु व व्यक्ति की स्थिति के अनुसार बदलाव की बात कही गई है। दूसरी ओर NHS आम तौर पर 6 से 8 कप या गिलास तरल लेने को एक सामान्य गाइड मानता है, जिसमें खाने से मिलने वाला पानी भी अलग से योगदान देता है। इसलिए बारिश में खुद को जबरन बहुत ज्यादा पानी पिलाने के बजाय पूरे दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में तरल लेते रहना ज्यादा व्यावहारिक तरीका है।
सबसे आसान तरीका है पानी को प्यास से जोड़ने के बजाय अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेना। सुबह उठने के बाद एक गिलास पानी से दिन शुरू करें। नाश्ते के कुछ समय बाद दोबारा पानी लें और ऑफिस या पढ़ाई की जगह पर एक बोतल हमेशा सामने रखें। हर बार फोन देखने या किसी मीटिंग के खत्म होने के बाद कुछ घूंट पानी पीने की आदत भी बनाई जा सकती है। अगर एक साथ ज्यादा पानी पीना मुश्किल लगता है तो बोतल में दिन के अलग-अलग समय के निशान लगा लें। मसलन, सुबह तक एक हिस्सा, दोपहर तक दूसरा और शाम तक बाकी पानी खत्म करने का लक्ष्य रखा जा सकता है। इस तरीके से आखिरी समय में बहुत सारा पानी पीने की जरूरत नहीं पड़ेगी। WHO भी नियमित रूप से पानी पीने की सलाह देता है, खासकर ऐसी परिस्थितियों में जहां शरीर से तरल ज्यादा निकल रहा हो।
जिन लोगों को सादा पानी पीना पसंद नहीं है, वे नींबू या लाइम की स्लाइस डालकर इसका स्वाद बदल सकते हैं। बिना ज्यादा चीनी वाला नींबू पानी, सूप, दूध और पानी से भरपूर फल-सब्जियां भी कुल तरल सेवन में योगदान देती हैं। NHS के मुताबिक पानी के अलावा दूध, कुछ बिना चीनी वाले पेय, चाय-कॉफी और कई खाद्य पदार्थ भी शरीर को तरल देते हैं। हालांकि मीठे शीतल पेय और बहुत ज्यादा चीनी वाले ड्रिंक को हाइड्रेशन का मुख्य जरिया बनाना सही विकल्प नहीं है। फलों का रस भी सीमित मात्रा में लेना बेहतर है। बारिश के मौसम में घर के बाहर मिलने वाला खुला पानी या संदिग्ध स्रोत का पानी पीने से बचना भी उतना ही जरूरी है। WHO के मुताबिक दूषित पानी से डायरिया, हैजा, टाइफाइड और हेपेटाइटिस ए जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
हाइड्रेशन का अंदाजा सिर्फ इस बात से नहीं लगाना चाहिए कि आज कितने गिलास पानी पिए। पेशाब का रंग भी एक आसान संकेत हो सकता है। आम तौर पर हल्का या पीला रंग पर्याप्त हाइड्रेशन की तरफ इशारा करता है, जबकि बहुत गहरा पीला और तेज गंध वाला पेशाब शरीर में पानी की कमी का संकेत हो सकता है। इसके साथ अगर मुंह सूख रहा है, सामान्य से कम पेशाब हो रहा है, कमजोरी या चक्कर महसूस हो रहे हैं तो तरल सेवन पर ध्यान देना चाहिए। उल्टी या दस्त होने पर पानी के साथ शरीर से नमक और दूसरे इलेक्ट्रोलाइट भी निकलते हैं। ऐसे मामलों में केवल सादा पानी पर्याप्त न हो सकता है और ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन की जरूरत पड़ सकती है। NHS भी ऐसी स्थिति में फार्मासिस्ट या डॉक्टर की सलाह से ORS लेने की बात कहता है।
बारिश में बाहर निकलने वालों के लिए पानी की बोतल साथ रखना सबसे आसान हैक है। उमस ज्यादा हो, पैदल चलना हो, एक्सरसाइज करनी हो या लंबे समय तक बाहर रहना हो तो सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा तरल की जरूरत पड़ सकती है। वहीं किडनी, हार्ट या दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को अपनी मर्जी से 3 लीटर पानी का लक्ष्य तय नहीं करना चाहिए, क्योंकि कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में डॉक्टर तरल की मात्रा सीमित करने की सलाह दे सकते हैं। इसी तरह बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों में डिहाइड्रेशन का जोखिम अलग हो सकता है। रोज पानी पीने की आदत का सबसे अच्छा तरीका यही है कि प्यास का इंतजार न करें, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी भी न पिएं। दिनभर छोटे-छोटे अंतराल पर पानी और दूसरे स्वस्थ तरल लेते रहें और शरीर के संकेतों पर नजर रखें।
Recommended for You
दैनिक जागरण से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
