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सर्दियों में फेफड़ों की सेहत पर संकट, अस्थमा मरीजों को बरतनी होगी सावधानी
लाइफ स्टाइल
ठंडी हवा, प्रदूषण और संक्रमण से बिगड़ सकती है सांस की बीमारी, डॉक्टरों ने बताए बचाव के जरूरी उपाय
सर्दियों के मौसम में अस्थमा, एलर्जी और ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोगों की परेशानियां तेजी से बढ़ जाती हैं। ठंडी हवा, धुंध, प्रदूषण और वायरल संक्रमण सांस की नलियों को संकुचित कर देते हैं, जिससे सांस फूलना, खांसी, सीने में जकड़न और घरघराहट जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। देश के कई हिस्सों में डॉक्टरों के पास इन बीमारियों से जुड़े मरीजों की संख्या नवंबर से फरवरी के बीच दोगुनी तक हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में हवा शुष्क और ठंडी हो जाती है, जो फेफड़ों की नलियों को संवेदनशील बना देती है। इसके अलावा प्रदूषण, पराग कण, धूल और स्मॉग एलर्जी को ट्रिगर करते हैं। बंद कमरों में रहने से वायरस जल्दी फैलते हैं, जिससे ब्रोंकाइटिस और सांस के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
बच्चे, बुजुर्ग, धूम्रपान करने वाले, पहले से अस्थमा या एलर्जी के मरीज और कमजोर इम्युनिटी वाले लोग सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं।
लगातार खांसी, रात में सांस लेने में दिक्कत, सीने में भारीपन, बलगम का बढ़ना और बार-बार जुकाम होना चेतावनी संकेत हो सकते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
कैसे रखें अपना ख्याल
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ठंडी हवा से बचाव: सुबह-शाम बाहर निकलते समय नाक और मुंह को स्कार्फ या मास्क से ढकें।
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दवाइयों में लापरवाही न करें: अस्थमा इनहेलर या डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं नियमित लें।
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घर के अंदर साफ हवा: कमरे को हवादार रखें, धूल और फफूंद से बचाव करें।
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धूम्रपान से दूरी: सिगरेट और धुएं से एलर्जी और ब्रोंकाइटिस दोनों बिगड़ते हैं।
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गर्म तरल पदार्थ: गुनगुना पानी, सूप और हर्बल काढ़ा गले और फेफड़ों को राहत देता है।
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टीकाकरण: डॉक्टर फ्लू वैक्सीन और निमोनिया वैक्सीन की सलाह देते हैं, खासकर बुजुर्गों के लिए।
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व्यायाम और प्राणायाम: हल्का योग और श्वास अभ्यास फेफड़ों की क्षमता बनाए रखते हैं।
फेफड़ा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में लक्षण दिखते ही स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श जरूरी है। समय पर जांच से अस्थमा अटैक और गंभीर ब्रोंकाइटिस को रोका जा सकता है।
मौसम के बदलते मिजाज और बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। नियमित दिनचर्या, सही खानपान और चिकित्सकीय सलाह से सर्दियों में भी अस्थमा, एलर्जी और ब्रोंकाइटिस को नियंत्रित रखा जा सकता है।
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सर्दियों के मौसम में अस्थमा, एलर्जी और ब्रोंकाइटिस से पीड़ित लोगों की परेशानियां तेजी से बढ़ जाती हैं। ठंडी हवा, धुंध, प्रदूषण और वायरल संक्रमण सांस की नलियों को संकुचित कर देते हैं, जिससे सांस फूलना, खांसी, सीने में जकड़न और घरघराहट जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। देश के कई हिस्सों में डॉक्टरों के पास इन बीमारियों से जुड़े मरीजों की संख्या नवंबर से फरवरी के बीच दोगुनी तक हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में हवा शुष्क और ठंडी हो जाती है, जो फेफड़ों की नलियों को संवेदनशील बना देती है। इसके अलावा प्रदूषण, पराग कण, धूल और स्मॉग एलर्जी को ट्रिगर करते हैं। बंद कमरों में रहने से वायरस जल्दी फैलते हैं, जिससे ब्रोंकाइटिस और सांस के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
बच्चे, बुजुर्ग, धूम्रपान करने वाले, पहले से अस्थमा या एलर्जी के मरीज और कमजोर इम्युनिटी वाले लोग सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं।
लगातार खांसी, रात में सांस लेने में दिक्कत, सीने में भारीपन, बलगम का बढ़ना और बार-बार जुकाम होना चेतावनी संकेत हो सकते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
कैसे रखें अपना ख्याल
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ठंडी हवा से बचाव: सुबह-शाम बाहर निकलते समय नाक और मुंह को स्कार्फ या मास्क से ढकें।
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दवाइयों में लापरवाही न करें: अस्थमा इनहेलर या डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं नियमित लें।
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घर के अंदर साफ हवा: कमरे को हवादार रखें, धूल और फफूंद से बचाव करें।
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धूम्रपान से दूरी: सिगरेट और धुएं से एलर्जी और ब्रोंकाइटिस दोनों बिगड़ते हैं।
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गर्म तरल पदार्थ: गुनगुना पानी, सूप और हर्बल काढ़ा गले और फेफड़ों को राहत देता है।
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टीकाकरण: डॉक्टर फ्लू वैक्सीन और निमोनिया वैक्सीन की सलाह देते हैं, खासकर बुजुर्गों के लिए।
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व्यायाम और प्राणायाम: हल्का योग और श्वास अभ्यास फेफड़ों की क्षमता बनाए रखते हैं।
फेफड़ा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में लक्षण दिखते ही स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श जरूरी है। समय पर जांच से अस्थमा अटैक और गंभीर ब्रोंकाइटिस को रोका जा सकता है।
मौसम के बदलते मिजाज और बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। नियमित दिनचर्या, सही खानपान और चिकित्सकीय सलाह से सर्दियों में भी अस्थमा, एलर्जी और ब्रोंकाइटिस को नियंत्रित रखा जा सकता है।
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