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सिर्फ सेहत के ही नहीं अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी है मोटापा, इतना बढ़ रहा खर्च
LIFESTYLE
ग्लोबल ओबेसिटी ऑब्जर्वेटरी के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, देश में 50 प्रतिशत लोग लो फिजिकल एक्टिविटी करते हैं.मोटापा बढ़ने से सिर्फ सेहत ही नहीं अर्थव्यवस्था को भी गंभीर तौर पर नुकसान पहुंच सकता है.
भारत में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है. इसकी वजह से कई खतरनाक बीमारियां जन्म ले रही हैं. इससे सिर्फ सेहत को ही नुकसान नहीं है, बल्कि जेब पर बोझ भी बढ़ रहा है. मतलब मोटापा अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरनाक है. एक नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. इसके अनुसार, 2030 तक भारत में मोटापे का आर्थिक बोझ बढ़कर 6.7 लाख करोड़ रुपए सालाना हो जाएगा. मतलब हर इंसान पर 4,700 रुपए का खर्च आएगा. यह टोटल खर्च देश की GDP का 1.57% है.
खतरनाक होता जा रहा मोटापा
नई रिपोर्ट में बताया गया है कि मोटापा आर्थिक तौर पर भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है. ग्लोबल ओबेसिटी ऑब्जर्वेटरी के आंकड़ों के अनुसार, मोटापे का आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता ही जा रहा है. यह 2019 में 2.4 लाख करोड़ रुपए था, जो करीब 1,800 रुपए प्रति व्यक्ति थी. 2030 तक यह बढ़कर 6.7 लाख करोड़ रुपए हो सकता है. यह बताता है कि अगर समय रहते इसे नहीं रोका गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है.
2060 तक मोटापे का खर्च बढ़ जाएगा
इस रिपोर्ट के अनुसार, 2060 तक यह आंकड़ा बढ़कर 69.6 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है, जो प्रति व्यक्ति 44,200 रुपए तक हो जाएगा. तब कुल खर्च जीडीपी का 2.5% हो जाएगा. स्टडी बताती है कि मोटापे पर होने वाला खर्च अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने भी हाल ही में 'मन की बात' में मोटापा कम करने की अपील कि और इसे एक मुहिम की तरह लेने को कहा. पीएम मोदी ने इसे सेहत के लिए खतरनाक बताया है.
भारत में कितना मोटापा है
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के अनुसार, भारत में 44% पुरुष और 41% महिलाएं ज्याद वजन या मोटापे की शिकार हैं. पिछले सर्वे में 37.7% पुरुष और 36% महिलाएं इसकी चपेट में थीं. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना हैकि मोटापे का आर्थिक असर इतना अधिक हो सकता है कि हेल्थ सिस्टम और इकोनॉमी दोनों पर भारी दबाव पड़ेगा. इसका असर व्यक्तिगत तौर और राष्ट्रीय स्तर पर भी पड़ेगा.
भारत में क्यों बढ़ता जा रहा मोटापा
ग्लोबल ओबेसिटी ऑब्जर्वेटरी के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, देश में 50 प्रतिशत लोग लो फिजिकल एक्टिविटी करते हैं. महिलाओं में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है, क्योंकि करीब 60 प्रतिशत महिलाएं शारीरिक तौर से कम सक्रिय हैं. खराब लाइफस्टाइल, खानपान मोटापे (Obesity) को बढ़ावा दे रहा है.
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सिर्फ सेहत के ही नहीं अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी है मोटापा, इतना बढ़ रहा खर्च
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भारत में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है. इसकी वजह से कई खतरनाक बीमारियां जन्म ले रही हैं. इससे सिर्फ सेहत को ही नुकसान नहीं है, बल्कि जेब पर बोझ भी बढ़ रहा है. मतलब मोटापा अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरनाक है. एक नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. इसके अनुसार, 2030 तक भारत में मोटापे का आर्थिक बोझ बढ़कर 6.7 लाख करोड़ रुपए सालाना हो जाएगा. मतलब हर इंसान पर 4,700 रुपए का खर्च आएगा. यह टोटल खर्च देश की GDP का 1.57% है.
खतरनाक होता जा रहा मोटापा
नई रिपोर्ट में बताया गया है कि मोटापा आर्थिक तौर पर भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है. ग्लोबल ओबेसिटी ऑब्जर्वेटरी के आंकड़ों के अनुसार, मोटापे का आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता ही जा रहा है. यह 2019 में 2.4 लाख करोड़ रुपए था, जो करीब 1,800 रुपए प्रति व्यक्ति थी. 2030 तक यह बढ़कर 6.7 लाख करोड़ रुपए हो सकता है. यह बताता है कि अगर समय रहते इसे नहीं रोका गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है.
2060 तक मोटापे का खर्च बढ़ जाएगा
इस रिपोर्ट के अनुसार, 2060 तक यह आंकड़ा बढ़कर 69.6 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है, जो प्रति व्यक्ति 44,200 रुपए तक हो जाएगा. तब कुल खर्च जीडीपी का 2.5% हो जाएगा. स्टडी बताती है कि मोटापे पर होने वाला खर्च अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने भी हाल ही में 'मन की बात' में मोटापा कम करने की अपील कि और इसे एक मुहिम की तरह लेने को कहा. पीएम मोदी ने इसे सेहत के लिए खतरनाक बताया है.
भारत में कितना मोटापा है
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के अनुसार, भारत में 44% पुरुष और 41% महिलाएं ज्याद वजन या मोटापे की शिकार हैं. पिछले सर्वे में 37.7% पुरुष और 36% महिलाएं इसकी चपेट में थीं. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना हैकि मोटापे का आर्थिक असर इतना अधिक हो सकता है कि हेल्थ सिस्टम और इकोनॉमी दोनों पर भारी दबाव पड़ेगा. इसका असर व्यक्तिगत तौर और राष्ट्रीय स्तर पर भी पड़ेगा.
भारत में क्यों बढ़ता जा रहा मोटापा
ग्लोबल ओबेसिटी ऑब्जर्वेटरी के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, देश में 50 प्रतिशत लोग लो फिजिकल एक्टिविटी करते हैं. महिलाओं में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है, क्योंकि करीब 60 प्रतिशत महिलाएं शारीरिक तौर से कम सक्रिय हैं. खराब लाइफस्टाइल, खानपान मोटापे (Obesity) को बढ़ावा दे रहा है.
