सद्गुरु ने कहा- 'मां-बाप को बंद करना होगा सख्त पेरेंट्स बनना, एक और गलती की; तो खत्‍म हो जाएगा बचपन’

LIFESTYLE

य‍दि आप भी सोच रहे हैं कि आपको अपने बच्‍चे के लिए पेरेंट ही बने रहना चाहिए, तो आप एक बार सद्गुरु की बताई बात जरूर जान लें। सद्गुरु तो कहते हैं कि मां-बाप को पेरेंट्स बनना बंद कर देना चाहिए। इसके बजाय उन्‍हें बच्‍चों का दोस्‍त बनने पर ध्‍यान देना चाहिए।

अगर आप भी एक पेरेंट हैं तो अपनी इस जर्नी में आपको भी कभी न कभी कोई परेशानी या चुनौती तो आई ही होगी। उस समय आपको लगा कि काश कोई होता जो आपको सही सलाह दे सकता। यदि आप एक पेरेंट हैं और आप सोच रहे हैं कि अपने बच्‍चे को पालने का सही तरीका क्‍या है, तो इस काम में सद्गुरु आपकी मदद कर सकते हैं।

सद्गुरु का कहना है कि माता-पिता को पेरेंट बनना बंद कर देना चाहिए बल्कि उन्‍हें अपने बच्‍चे का दोस्‍त बनना चाहिए। सद्गुरु ने कहा कि 8 से 10 साल की उम्र के बाद बच्‍चों को पेरेंट्स की जरूरत नहीं होती है। तो फिर क्‍या करें पेरेंट्स?

पेरेंट के बजाय किसकी होती है जरूरत

पेरेंट के बजाय किसकी होती है जरूरत

सद्गुरु ने कहा कि 8 से 10 साल के बाद बच्‍चे को माता-पिता की नहीं बल्कि एक दोस्‍त की जरूरत होती है जिससे वो अपने मन की बात कह सके, अपनी परेशानियों को शेयर कर सके। ये काम दोस्‍त ही कर सकते हैं इसलिए आप अपने बच्‍चे के बेस्‍ट फ्रेंड बनने की कोशिश करें।

आप खुद दोस्‍त के पास जाते हैं

आप खुद दोस्‍त के पास जाते हैं

पेरेंट्स से सद्गुरु का कहना है कि जब आपको खुद कोई कंफ्यूजन या परेशानी होती है, तब आप खुद अपने दोस्‍त के पास सलाह लेने के लिए जाते हैं। बच्‍चे के साथ भी कुछ ऐसा ही है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्‍चा आपसे हर एक बात और प्रॉब्‍लम को शेयर करे, तो आपको उससे दोस्‍ती करनी होगी।

 

बच्‍चे के साथ दोस्‍ती कैसे करें

बच्‍चे के साथ दोस्‍ती कैसे करें

nurturey.com के अनुसार हर बच्‍चे को खेलना पसंद होता है। अगर आपके बच्‍चे को कोई ऐसा गेम खेलना है जिसमें एक और पार्टनर की जरूरत हो, तो आप उसका पार्टनर बन सकते हैं। इससे आपके रिश्‍ते की दूरियां कम हो सकती हैं और आप दोनों एक-दूसरे के साथ कंफर्टेबल हो सकते हैं।

डराकर न रखें

डराकर न रखें

जो पेरेंट्स अपने बच्‍चों को डराकर रखते हैं, वहां पर बच्‍चे कभी भी अपने मन की बात शेयर करने की हिम्‍मत नहीं दिखा पाते हैं। अगर आपको अपने बच्‍चे का दोस्‍त बनना है, तो आपको उसे डराना बंद करना होगा, तभी वो आपके पास आ पाएगा।

दोस्‍त बनने का क्‍या है फायदा

दोस्‍त बनने का क्‍या है फायदा

Harpersbazaar की वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में बताया गया है कि दोस्‍त बनने से पेरेंट्स और बच्‍चे के बीच का भावनात्‍मक रिश्‍ता मजबूत होता है और बच्‍चे को सुरक्षित माहौल मिल पाता है। बच्‍चा खुलकर अपने विचारों को व्‍यक्‍त कर पाता है। इससे बच्‍चे और पेरेंट्स के बीच विश्‍वास पनपता है।

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21 Feb 2025 By दैनिक जागरण

सद्गुरु ने कहा- 'मां-बाप को बंद करना होगा सख्त पेरेंट्स बनना, एक और गलती की; तो खत्‍म हो जाएगा बचपन’

LIFESTYLE

अगर आप भी एक पेरेंट हैं तो अपनी इस जर्नी में आपको भी कभी न कभी कोई परेशानी या चुनौती तो आई ही होगी। उस समय आपको लगा कि काश कोई होता जो आपको सही सलाह दे सकता। यदि आप एक पेरेंट हैं और आप सोच रहे हैं कि अपने बच्‍चे को पालने का सही तरीका क्‍या है, तो इस काम में सद्गुरु आपकी मदद कर सकते हैं।

सद्गुरु का कहना है कि माता-पिता को पेरेंट बनना बंद कर देना चाहिए बल्कि उन्‍हें अपने बच्‍चे का दोस्‍त बनना चाहिए। सद्गुरु ने कहा कि 8 से 10 साल की उम्र के बाद बच्‍चों को पेरेंट्स की जरूरत नहीं होती है। तो फिर क्‍या करें पेरेंट्स?

पेरेंट के बजाय किसकी होती है जरूरत

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सद्गुरु ने कहा कि 8 से 10 साल के बाद बच्‍चे को माता-पिता की नहीं बल्कि एक दोस्‍त की जरूरत होती है जिससे वो अपने मन की बात कह सके, अपनी परेशानियों को शेयर कर सके। ये काम दोस्‍त ही कर सकते हैं इसलिए आप अपने बच्‍चे के बेस्‍ट फ्रेंड बनने की कोशिश करें।

आप खुद दोस्‍त के पास जाते हैं

आप खुद दोस्‍त के पास जाते हैं

पेरेंट्स से सद्गुरु का कहना है कि जब आपको खुद कोई कंफ्यूजन या परेशानी होती है, तब आप खुद अपने दोस्‍त के पास सलाह लेने के लिए जाते हैं। बच्‍चे के साथ भी कुछ ऐसा ही है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्‍चा आपसे हर एक बात और प्रॉब्‍लम को शेयर करे, तो आपको उससे दोस्‍ती करनी होगी।

 

बच्‍चे के साथ दोस्‍ती कैसे करें

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nurturey.com के अनुसार हर बच्‍चे को खेलना पसंद होता है। अगर आपके बच्‍चे को कोई ऐसा गेम खेलना है जिसमें एक और पार्टनर की जरूरत हो, तो आप उसका पार्टनर बन सकते हैं। इससे आपके रिश्‍ते की दूरियां कम हो सकती हैं और आप दोनों एक-दूसरे के साथ कंफर्टेबल हो सकते हैं।

डराकर न रखें

डराकर न रखें

जो पेरेंट्स अपने बच्‍चों को डराकर रखते हैं, वहां पर बच्‍चे कभी भी अपने मन की बात शेयर करने की हिम्‍मत नहीं दिखा पाते हैं। अगर आपको अपने बच्‍चे का दोस्‍त बनना है, तो आपको उसे डराना बंद करना होगा, तभी वो आपके पास आ पाएगा।

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Harpersbazaar की वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में बताया गया है कि दोस्‍त बनने से पेरेंट्स और बच्‍चे के बीच का भावनात्‍मक रिश्‍ता मजबूत होता है और बच्‍चे को सुरक्षित माहौल मिल पाता है। बच्‍चा खुलकर अपने विचारों को व्‍यक्‍त कर पाता है। इससे बच्‍चे और पेरेंट्स के बीच विश्‍वास पनपता है।

https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/sadhguru-said-parents-will-have-to-stop-strict-parents-if/article-11033

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