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नवरात्रि में साबूदाना खाना पड़ सकता है भारी, जानिए नुकसान और हेल्दी विकल्प
Navratri food
व्रत में एनर्जी के लिए साबूदाना तो सही है, लेकिन रोजाना सेवन से हो सकती है कब्ज, गैस और पेट भारीपन जैसी समस्याएं। जानिए इसके नुकसान और कुछ हेल्दी फलाहारी विकल्प
शारदीय नवरात्रि के व्रत में साबूदाना सबसे ज्यादा खाया जाने वाला फलाहारी फूड है। इसकी खिचड़ी, पकौड़े, डंपलिंग जैसी कई चीजें बनती हैं जो व्रत के लिए झटपट और टेस्टी विकल्प मानी जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि साबूदाना रोजाना खाने से सेहत को नुकसान भी हो सकता है?
क्या है साबूदाना?
साबूदाना टैपिओका या कसावा की जड़ से बनता है, जो मुख्यतः स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट्स का स्रोत होता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर या अन्य पोषक तत्व लगभग नहीं के बराबर होते हैं।
रोजाना खाने से क्या हो सकता है नुकसान?
न्यूट्रिशनिस्ट गीतिका चोपड़ा बताती हैं कि साबूदाना में फाइबर की कमी होती है, जिससे रोजाना सेवन करने पर कब्ज, पेट में भारीपन और गैस की समस्या हो सकती है। साथ ही, यह ब्लड शुगर लेवल भी तेजी से बढ़ा सकता है, जो डायबिटिक लोगों के लिए खतरे का संकेत है।
सही तरीका क्या है साबूदाना खाने का?
-
हफ्ते में 2-3 बार ही खाएं
-
खिचड़ी में पालक, टमाटर, बीन्स जैसी फाइबर वाली सब्जियां मिलाएं
-
साथ में दही या छाछ लें, जिससे डाइजेशन बेहतर हो
-
खूब पानी पीएं, नारियल पानी, नींबू पानी या छाछ को रूटीन में शामिल करें
हेल्दी अल्टरनेटिव क्या हैं?
रोज साबूदाना खाने की बजाय आप ये हेल्दी विकल्प चुन सकते हैं:
-
कुट्टू या सिंघाड़े के आटे का चीला
-
लौकी की खीर या रायता
-
मखाना और खीरे का रायता
-
शकरकंद या कद्दू की सब्जी
-
नट्स और सीड्स (जैसे फ्लैक्ससीड्स, बादाम, अखरोट)
-
पपीता और नाशपाती जैसे फाइबर रिच फल
पपीता की दही के साथ स्मूदी बनाकर उसमें फ्लैक्स सीड्स डालकर पीना कब्ज से राहत देता है और एनर्जी भी देता है।
व्रत में इन चीजों से बचें
-
तली-भुनी चीजें
-
तीखे मसाले
-
पैक्ड फूड्स
इनसे पेट में गैस, मितली और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है।
साबूदाना एनर्जी का अच्छा स्रोत जरूर है, लेकिन व्रत में इसे सीमित मात्रा में और सही तरीके से खाना जरूरी है। इसके साथ हेल्दी विकल्पों को शामिल कर व्रत को सेहतमंद बनाया जा सकता है।
सेहतमंद व्रत, बेहतर ऊर्जा!
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शारदीय नवरात्रि के व्रत में साबूदाना सबसे ज्यादा खाया जाने वाला फलाहारी फूड है। इसकी खिचड़ी, पकौड़े, डंपलिंग जैसी कई चीजें बनती हैं जो व्रत के लिए झटपट और टेस्टी विकल्प मानी जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि साबूदाना रोजाना खाने से सेहत को नुकसान भी हो सकता है?
क्या है साबूदाना?
साबूदाना टैपिओका या कसावा की जड़ से बनता है, जो मुख्यतः स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट्स का स्रोत होता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर या अन्य पोषक तत्व लगभग नहीं के बराबर होते हैं।
रोजाना खाने से क्या हो सकता है नुकसान?
न्यूट्रिशनिस्ट गीतिका चोपड़ा बताती हैं कि साबूदाना में फाइबर की कमी होती है, जिससे रोजाना सेवन करने पर कब्ज, पेट में भारीपन और गैस की समस्या हो सकती है। साथ ही, यह ब्लड शुगर लेवल भी तेजी से बढ़ा सकता है, जो डायबिटिक लोगों के लिए खतरे का संकेत है।
सही तरीका क्या है साबूदाना खाने का?
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हफ्ते में 2-3 बार ही खाएं
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खिचड़ी में पालक, टमाटर, बीन्स जैसी फाइबर वाली सब्जियां मिलाएं
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साथ में दही या छाछ लें, जिससे डाइजेशन बेहतर हो
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खूब पानी पीएं, नारियल पानी, नींबू पानी या छाछ को रूटीन में शामिल करें
हेल्दी अल्टरनेटिव क्या हैं?
रोज साबूदाना खाने की बजाय आप ये हेल्दी विकल्प चुन सकते हैं:
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कुट्टू या सिंघाड़े के आटे का चीला
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लौकी की खीर या रायता
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मखाना और खीरे का रायता
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शकरकंद या कद्दू की सब्जी
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नट्स और सीड्स (जैसे फ्लैक्ससीड्स, बादाम, अखरोट)
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पपीता और नाशपाती जैसे फाइबर रिच फल
पपीता की दही के साथ स्मूदी बनाकर उसमें फ्लैक्स सीड्स डालकर पीना कब्ज से राहत देता है और एनर्जी भी देता है।
व्रत में इन चीजों से बचें
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तली-भुनी चीजें
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तीखे मसाले
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पैक्ड फूड्स
इनसे पेट में गैस, मितली और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है।
साबूदाना एनर्जी का अच्छा स्रोत जरूर है, लेकिन व्रत में इसे सीमित मात्रा में और सही तरीके से खाना जरूरी है। इसके साथ हेल्दी विकल्पों को शामिल कर व्रत को सेहतमंद बनाया जा सकता है।
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