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ठंड में बढ़ती डैंड्रफ की समस्या: सर्दियों में रूखी स्कैल्प बन रही वजह, डॉक्टरों ने बताए बचाव के उपाय
लाइफ स्टाइल
ठंडी हवा, कम नमी और गलत हेयर-केयर रूटीन के कारण सर्दियों में डैंड्रफ के मामले बढ़े; विशेषज्ञों का कहना—समय पर देखभाल से रोकी जा सकती है समस्या
सर्दियों की शुरुआत के साथ ही देश के कई हिस्सों में डैंड्रफ यानी रूसी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार ठंड के मौसम में हवा में नमी कम हो जाती है, जिससे स्कैल्प रूखी हो जाती है और मृत त्वचा की परतें झड़ने लगती हैं। यही परतें डैंड्रफ का रूप ले लेती हैं। अस्पतालों और क्लीनिकों में खुजली, सफेद पपड़ी और बाल झड़ने की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या पिछले कुछ हफ्तों में बढ़ी है।
डैंड्रफ कोई संक्रामक रोग नहीं है, लेकिन यह असहजता और आत्मविश्वास की कमी का कारण बन सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि नवंबर से फरवरी के बीच तापमान गिरने, गर्म पानी से बार-बार नहाने और टोपी-स्कार्फ के अधिक इस्तेमाल से स्कैल्प की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है। इससे फंगल ग्रोथ और स्किन फ्लेक्स बढ़ जाते हैं।
त्वचा विशेषज्ञों के मुताबिक ठंड में लोग बालों को कम धोते हैं या बहुत गर्म पानी का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा पोषण की कमी, तनाव और नींद की अनियमितता भी डैंड्रफ को बढ़ावा देती है। लगातार तेल लगाकर देर तक छोड़ना भी कई मामलों में समस्या को बढ़ा देता है।
डॉक्टरों की सलाह है कि हफ्ते में दो से तीन बार माइल्ड या एंटी-डैंड्रफ शैम्पू से बाल धोए जाएं। शैम्पू को सीधे स्कैल्प पर हल्के हाथों से लगाकर कुछ मिनट छोड़ना फायदेमंद रहता है। बहुत गर्म पानी से बचें और गुनगुने पानी का उपयोग करें।
तेल लगाना पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है, लेकिन सीमित मात्रा में और सही अंतराल पर लगाएं। नारियल या बादाम का हल्का गुनगुना तेल बेहतर माना जाता है। घरेलू उपायों में एलोवेरा जेल, नीम का पानी और दही का उपयोग कुछ लोगों को राहत देता है, हालांकि गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ से सलाह जरूरी है।
पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन-B, जिंक और ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी भी डैंड्रफ से जुड़ी हो सकती है। हरी सब्जियां, फल, नट्स और पर्याप्त पानी पीना स्कैल्प हेल्थ के लिए जरूरी है। तनाव कम करना और पर्याप्त नींद लेना भी उतना ही अहम है।
अगर डैंड्रफ के साथ तेज खुजली, लालपन, घाव या असामान्य बाल झड़ना हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में यह सेबोरिक डर्मेटाइटिस या अन्य त्वचा रोग का संकेत हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सही जानकारी और नियमित देखभाल से सर्दियों में डैंड्रफ की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
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सर्दियों की शुरुआत के साथ ही देश के कई हिस्सों में डैंड्रफ यानी रूसी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार ठंड के मौसम में हवा में नमी कम हो जाती है, जिससे स्कैल्प रूखी हो जाती है और मृत त्वचा की परतें झड़ने लगती हैं। यही परतें डैंड्रफ का रूप ले लेती हैं। अस्पतालों और क्लीनिकों में खुजली, सफेद पपड़ी और बाल झड़ने की शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या पिछले कुछ हफ्तों में बढ़ी है।
डैंड्रफ कोई संक्रामक रोग नहीं है, लेकिन यह असहजता और आत्मविश्वास की कमी का कारण बन सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि नवंबर से फरवरी के बीच तापमान गिरने, गर्म पानी से बार-बार नहाने और टोपी-स्कार्फ के अधिक इस्तेमाल से स्कैल्प की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है। इससे फंगल ग्रोथ और स्किन फ्लेक्स बढ़ जाते हैं।
त्वचा विशेषज्ञों के मुताबिक ठंड में लोग बालों को कम धोते हैं या बहुत गर्म पानी का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा पोषण की कमी, तनाव और नींद की अनियमितता भी डैंड्रफ को बढ़ावा देती है। लगातार तेल लगाकर देर तक छोड़ना भी कई मामलों में समस्या को बढ़ा देता है।
डॉक्टरों की सलाह है कि हफ्ते में दो से तीन बार माइल्ड या एंटी-डैंड्रफ शैम्पू से बाल धोए जाएं। शैम्पू को सीधे स्कैल्प पर हल्के हाथों से लगाकर कुछ मिनट छोड़ना फायदेमंद रहता है। बहुत गर्म पानी से बचें और गुनगुने पानी का उपयोग करें।
तेल लगाना पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है, लेकिन सीमित मात्रा में और सही अंतराल पर लगाएं। नारियल या बादाम का हल्का गुनगुना तेल बेहतर माना जाता है। घरेलू उपायों में एलोवेरा जेल, नीम का पानी और दही का उपयोग कुछ लोगों को राहत देता है, हालांकि गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ से सलाह जरूरी है।
पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन-B, जिंक और ओमेगा-3 फैटी एसिड की कमी भी डैंड्रफ से जुड़ी हो सकती है। हरी सब्जियां, फल, नट्स और पर्याप्त पानी पीना स्कैल्प हेल्थ के लिए जरूरी है। तनाव कम करना और पर्याप्त नींद लेना भी उतना ही अहम है।
अगर डैंड्रफ के साथ तेज खुजली, लालपन, घाव या असामान्य बाल झड़ना हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में यह सेबोरिक डर्मेटाइटिस या अन्य त्वचा रोग का संकेत हो सकता है।
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