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सर्दी के मौसम में चने की भाजी का कमाल, खून की कमी से लेकर पाचन तक फायदेमंद
लाइफ स्टाइल
ठंड के मौसम में पोषण का देसी विकल्प, डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ भी कर रहे सलाह
सर्दियों के मौसम में बदलती दिनचर्या और ठंड के असर से लोग अक्सर सर्दी-खांसी, कमजोरी और पाचन संबंधी समस्याओं से जूझते हैं। ऐसे में चने की भाजी, जिसे आम भाषा में चना साग भी कहा जाता है, एक बार फिर देसी रसोई में अपनी जगह बना रही है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में उपलब्ध यह हरी सब्जी शरीर को गर्म रखने के साथ-साथ इम्युनिटी मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।
चना भाजी दरअसल चने के पौधे की हरी पत्तियां होती हैं, जो खासतौर पर सर्दियों में खेतों में आसानी से उपलब्ध होती हैं। यह सब्जी आयरन, फाइबर, कैल्शियम और विटामिन C जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मौसम के अनुसार स्थानीय और मौसमी भोजन करना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है।
डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के मौसम में जिन लोगों को खून की कमी, जोड़ों का दर्द या कमजोर पाचन की शिकायत रहती है, उनके लिए चने की भाजी फायदेमंद साबित हो सकती है। पटना के एक निजी अस्पताल में कार्यरत डाइटीशियन के अनुसार, “चना भाजी की तासीर गर्म होती है, जिससे शरीर को अंदर से ऊर्जा मिलती है और ठंड का असर कम होता है।”
बीते कुछ वर्षों में लोगों के बीच फिर से देसी और पारंपरिक खानपान की ओर रुझान बढ़ा है। कोविड के बाद इम्युनिटी को लेकर बढ़ी जागरूकता के चलते सर्दियों में चने की भाजी, सरसों साग और बथुआ जैसी सब्जियों की मांग बाजारों में बढ़ी है। सब्जी विक्रेताओं के मुताबिक, ठंड के मौसम में चना साग जल्दी बिक जाता है।
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, चने की भाजी में मौजूद फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है, जबकि आयरन हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से थकान कम होती है और त्वचा व बालों की सेहत भी बेहतर रहती है। हालांकि, अत्यधिक सेवन से गैस की समस्या हो सकती है, इसलिए संतुलन जरूरी बताया गया है।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि चने की भाजी को अच्छी तरह धोकर और पकाकर ही सेवन करें। गर्भवती महिलाएं और पेट संबंधी गंभीर समस्या वाले लोग इसे खाने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। आने वाले समय में स्वास्थ्य विभाग भी लोगों को मौसमी और स्थानीय सब्जियों को आहार में शामिल करने के लिए जागरूक करने की तैयारी में है।
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सर्दियों के मौसम में बदलती दिनचर्या और ठंड के असर से लोग अक्सर सर्दी-खांसी, कमजोरी और पाचन संबंधी समस्याओं से जूझते हैं। ऐसे में चने की भाजी, जिसे आम भाषा में चना साग भी कहा जाता है, एक बार फिर देसी रसोई में अपनी जगह बना रही है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों में उपलब्ध यह हरी सब्जी शरीर को गर्म रखने के साथ-साथ इम्युनिटी मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।
चना भाजी दरअसल चने के पौधे की हरी पत्तियां होती हैं, जो खासतौर पर सर्दियों में खेतों में आसानी से उपलब्ध होती हैं। यह सब्जी आयरन, फाइबर, कैल्शियम और विटामिन C जैसे पोषक तत्वों से भरपूर होती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मौसम के अनुसार स्थानीय और मौसमी भोजन करना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है।
डॉक्टरों का कहना है कि ठंड के मौसम में जिन लोगों को खून की कमी, जोड़ों का दर्द या कमजोर पाचन की शिकायत रहती है, उनके लिए चने की भाजी फायदेमंद साबित हो सकती है। पटना के एक निजी अस्पताल में कार्यरत डाइटीशियन के अनुसार, “चना भाजी की तासीर गर्म होती है, जिससे शरीर को अंदर से ऊर्जा मिलती है और ठंड का असर कम होता है।”
बीते कुछ वर्षों में लोगों के बीच फिर से देसी और पारंपरिक खानपान की ओर रुझान बढ़ा है। कोविड के बाद इम्युनिटी को लेकर बढ़ी जागरूकता के चलते सर्दियों में चने की भाजी, सरसों साग और बथुआ जैसी सब्जियों की मांग बाजारों में बढ़ी है। सब्जी विक्रेताओं के मुताबिक, ठंड के मौसम में चना साग जल्दी बिक जाता है।
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, चने की भाजी में मौजूद फाइबर पाचन को दुरुस्त रखता है, जबकि आयरन हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से थकान कम होती है और त्वचा व बालों की सेहत भी बेहतर रहती है। हालांकि, अत्यधिक सेवन से गैस की समस्या हो सकती है, इसलिए संतुलन जरूरी बताया गया है।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि चने की भाजी को अच्छी तरह धोकर और पकाकर ही सेवन करें। गर्भवती महिलाएं और पेट संबंधी गंभीर समस्या वाले लोग इसे खाने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। आने वाले समय में स्वास्थ्य विभाग भी लोगों को मौसमी और स्थानीय सब्जियों को आहार में शामिल करने के लिए जागरूक करने की तैयारी में है।
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