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गुड फ्राइडे: ईसा मसीह के 7 वचनों में छिपा जीवन जीने का संदेश
जीवन के मंत्र
आज भी मानवता, क्षमा और आशा का मार्गदर्शन करता है ईसा मसीह का उपदेश
गुड फ्राइडे के अवसर पर ईसा मसीह के संदेश आज भी दुनिया को जीवन की राह दिखाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन यीशू ने क्रॉस पर अपने सात वचन कहे थे, जिनमें क्षमा, आशा, अपनापन, वेदना, मानवता, पूर्णता और समर्पण का महत्व दर्शाया गया।
विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के अनुसार, ये वचन आज भी मानव जीवन के संघर्ष और चुनौतियों से निपटने के लिए प्रेरणा देते हैं। मानव जीवन में परेशानियां आती-जाती रहती हैं, लेकिन ईश्वर पर विश्वास रखने से संकट का अंधकार समाप्त होता है और चारों ओर प्रकाश फैलता है।
7 वचनों का महत्व
क्षमा: “हे परम पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं।”
क्रूस पर चढ़ाने वालों के लिए क्षमा की यह प्रार्थना यह सिखाती है कि संकट के समय भी दूसरों को माफ करना ईश्वरीय गुण है।
आशा: “मैं तुझसे सच कहता हूं, आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।”
यह वचन एक अपराधी को आश्वासन देता है और बताता है कि ईश्वरीय प्रेम किसी को नहीं ठुकराता।
अपनापन: “हे नारी, देख, यह तेरा पुत्र है।”
दुःख में भी रिश्तों को जोड़ने और एकजुट रहने का संदेश।
वेदना: “हे मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया।”
इंसानी पीड़ा और ईश्वर से मिलन की तड़प का प्रतीक।
मानवता: “मैं प्यासा हूं।”
शारीरिक पीड़ा और मानव जीवन में सभी को मिलती कठिनाइयों की अभिव्यक्ति।
पूर्णता: “यह पूरा हुआ।”
पाप से मुक्ति और उद्धार का उद्देश्य पूरा होना, परम पिता की आज्ञा का पालन।
समर्पण: “हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूं।”
आत्मा के अस्तित्व और ईश्वर के प्रति पूर्ण विश्वास का संदेश।
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जीवन के मंत्र
गुड फ्राइडे के अवसर पर ईसा मसीह के संदेश आज भी दुनिया को जीवन की राह दिखाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन यीशू ने क्रॉस पर अपने सात वचन कहे थे, जिनमें क्षमा, आशा, अपनापन, वेदना, मानवता, पूर्णता और समर्पण का महत्व दर्शाया गया।
विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के अनुसार, ये वचन आज भी मानव जीवन के संघर्ष और चुनौतियों से निपटने के लिए प्रेरणा देते हैं। मानव जीवन में परेशानियां आती-जाती रहती हैं, लेकिन ईश्वर पर विश्वास रखने से संकट का अंधकार समाप्त होता है और चारों ओर प्रकाश फैलता है।
7 वचनों का महत्व
क्षमा: “हे परम पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं।”
क्रूस पर चढ़ाने वालों के लिए क्षमा की यह प्रार्थना यह सिखाती है कि संकट के समय भी दूसरों को माफ करना ईश्वरीय गुण है।
आशा: “मैं तुझसे सच कहता हूं, आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।”
यह वचन एक अपराधी को आश्वासन देता है और बताता है कि ईश्वरीय प्रेम किसी को नहीं ठुकराता।
अपनापन: “हे नारी, देख, यह तेरा पुत्र है।”
दुःख में भी रिश्तों को जोड़ने और एकजुट रहने का संदेश।
वेदना: “हे मेरे परमेश्वर, तूने मुझे क्यों छोड़ दिया।”
इंसानी पीड़ा और ईश्वर से मिलन की तड़प का प्रतीक।
मानवता: “मैं प्यासा हूं।”
शारीरिक पीड़ा और मानव जीवन में सभी को मिलती कठिनाइयों की अभिव्यक्ति।
पूर्णता: “यह पूरा हुआ।”
पाप से मुक्ति और उद्धार का उद्देश्य पूरा होना, परम पिता की आज्ञा का पालन।
समर्पण: “हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूं।”
आत्मा के अस्तित्व और ईश्वर के प्रति पूर्ण विश्वास का संदेश।
