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एपल की नौकरी छोड़ शुरू किया अपना काम, आज 9,000 करोड़ की कंपनी के मालिक
Jagran Desk
निर्मित पारेख ने एपल की नौकरी छोड़कर 'अपना' नाम का एक प्लेटफॉर्म शुरू किया। यह प्लेटफॉर्म ब्लू-कॉलर जॉब ढूंढने में मदद करता है। उन्होंने यह प्लेटफॉर्म कोविड-19 महामारी से ठीक पहले शुरू किया था। आज भारत की कई बड़ी कंपनियां इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करती हैं।
मायानगरी मुंबई के एक साधारण से परिवार में जन्मे निर्मित पारेख ने एपल जैसी बड़ी कंपनी में नौकरी छोड़कर 9,000 करोड़ रुपये का बिजनेस खड़ा किया है। उन्होंने Apna नाम का एक प्लेटफॉर्म बनाया है। यह ब्लू-कॉलर जॉब ढूंढने वालों और कंपनियों को जोड़ता है। अपनी शुरुआत से यह स्टार्टअप सिर्फ 22 महीनों में 1.1 अरब डॉलर (लगभग 9,016 करोड़ रुपये) का हो गया है। आज 'अपना' पर 1,50,000 से भी ज्यादा कंपनियां रजिस्टर्ड हैं। इनमें अनअकैडमी, बिगबास्केट, लिसियस, वाइटहैट जूनियर, फ्लिपकार्ट, जोमैटो, डेल्हीवेरी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। आइए, यहां निर्मित पारेख की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।
बचपन से ही थी कुछ अलग करने की चाहत
निर्मित पारेख को बचपन से ही कुछ अलग करने का जुनून था। सिर्फ 7 साल की उम्र में उन्होंने एक डिजिटल घड़ी बनाई थी। फिर 13 साल की उम्र तक रोबोटिक्स की प्रोग्रामिंग सीख ली थी। निर्मित ने गुजरात के निरमा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बी.टेक किया। 21 साल की उम्र में अपने पहले स्टार्टअप की शुरुआत की। इसका नाम Incone Technologies था। यह कंपनी बाढ़ प्रबंधन के लिए समाधान तैयार करती थी।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए
इसके बाद निर्मित ने Cruxbox नाम से एक और कंपनी शुरू की। इसे बाद में उन्होंने Intel को बेच दिया। फिर वह Intel में डेटा एनालिटिक्स के डायरेक्टर के रूप में काम करने लगे। इस दौरान उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए भी किया। एमबीए करने के बाद पारेख एपल के साथ जुड़ गए। वहां वह आईफोन की प्रोडक्ट और स्ट्रैटेजी टीम का हिस्सा बने।
ऐसे हुई 'अपना' की शुरुआत
हालांकि, भारत में ब्लू-कॉलर जॉब सेक्टर की समस्याओं को देखते हुए निर्मित पारेख ने एपल की नौकरी छोड़ने का फैसला किया और वापस भारत आ गए। उनका मकसद एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना था जो असंगठित ब्लू-कॉलर सेक्टर के कामगारों को नियोक्ताओं से जोड़ सके। कोरोना की महामारी से ठीक पहले उन्होंने 'अपना' की शुरुआत की। ब्लू-कॉलर जॉब उन नौकरियों को कहा जाता है जो शारीरिक श्रम पर आधारित होती हैं।
22 महीनों में यूनिकॉर्न का दर्जा
अपनी शुरुआत से सिर्फ 22 महीनों में 'अपना' भारत का सबसे युवा यूनिकॉर्न बन गया। इसकी कीमत 1.1 अरब डॉलर (9,016 करोड़ रुपये) है। दो सालों में 125% के शानदार रेट से बढ़ते हुए अपना का इस्तेमाल अब भारत में 150,000 से ज्यादा कंपनियां कर रही हैं। इनमें Unacademy, BigBasket, Licious, WhiteHat Jr, Flipkart, Shadowfax, Zomato, Delhivery, G4S Global और Burger King जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
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एपल की नौकरी छोड़ शुरू किया अपना काम, आज 9,000 करोड़ की कंपनी के मालिक
Jagran Desk
मायानगरी मुंबई के एक साधारण से परिवार में जन्मे निर्मित पारेख ने एपल जैसी बड़ी कंपनी में नौकरी छोड़कर 9,000 करोड़ रुपये का बिजनेस खड़ा किया है। उन्होंने Apna नाम का एक प्लेटफॉर्म बनाया है। यह ब्लू-कॉलर जॉब ढूंढने वालों और कंपनियों को जोड़ता है। अपनी शुरुआत से यह स्टार्टअप सिर्फ 22 महीनों में 1.1 अरब डॉलर (लगभग 9,016 करोड़ रुपये) का हो गया है। आज 'अपना' पर 1,50,000 से भी ज्यादा कंपनियां रजिस्टर्ड हैं। इनमें अनअकैडमी, बिगबास्केट, लिसियस, वाइटहैट जूनियर, फ्लिपकार्ट, जोमैटो, डेल्हीवेरी जैसे बड़े नाम शामिल हैं। आइए, यहां निर्मित पारेख की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।
बचपन से ही थी कुछ अलग करने की चाहत
निर्मित पारेख को बचपन से ही कुछ अलग करने का जुनून था। सिर्फ 7 साल की उम्र में उन्होंने एक डिजिटल घड़ी बनाई थी। फिर 13 साल की उम्र तक रोबोटिक्स की प्रोग्रामिंग सीख ली थी। निर्मित ने गुजरात के निरमा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बी.टेक किया। 21 साल की उम्र में अपने पहले स्टार्टअप की शुरुआत की। इसका नाम Incone Technologies था। यह कंपनी बाढ़ प्रबंधन के लिए समाधान तैयार करती थी।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए
इसके बाद निर्मित ने Cruxbox नाम से एक और कंपनी शुरू की। इसे बाद में उन्होंने Intel को बेच दिया। फिर वह Intel में डेटा एनालिटिक्स के डायरेक्टर के रूप में काम करने लगे। इस दौरान उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए भी किया। एमबीए करने के बाद पारेख एपल के साथ जुड़ गए। वहां वह आईफोन की प्रोडक्ट और स्ट्रैटेजी टीम का हिस्सा बने।
ऐसे हुई 'अपना' की शुरुआत
हालांकि, भारत में ब्लू-कॉलर जॉब सेक्टर की समस्याओं को देखते हुए निर्मित पारेख ने एपल की नौकरी छोड़ने का फैसला किया और वापस भारत आ गए। उनका मकसद एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाना था जो असंगठित ब्लू-कॉलर सेक्टर के कामगारों को नियोक्ताओं से जोड़ सके। कोरोना की महामारी से ठीक पहले उन्होंने 'अपना' की शुरुआत की। ब्लू-कॉलर जॉब उन नौकरियों को कहा जाता है जो शारीरिक श्रम पर आधारित होती हैं।
22 महीनों में यूनिकॉर्न का दर्जा
अपनी शुरुआत से सिर्फ 22 महीनों में 'अपना' भारत का सबसे युवा यूनिकॉर्न बन गया। इसकी कीमत 1.1 अरब डॉलर (9,016 करोड़ रुपये) है। दो सालों में 125% के शानदार रेट से बढ़ते हुए अपना का इस्तेमाल अब भारत में 150,000 से ज्यादा कंपनियां कर रही हैं। इनमें Unacademy, BigBasket, Licious, WhiteHat Jr, Flipkart, Shadowfax, Zomato, Delhivery, G4S Global और Burger King जैसे बड़े नाम शामिल हैं।
