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नासिक TCS केस में 1500 पन्नों की चार्जशीट हुई दाखिल, चैट्स और मेडिकल रिपोर्ट भी शामिल
नेशनल डेस्क
नासिक TCS उत्पीड़न केस में SIT ने 1500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। WhatsApp चैट, मेडिकल रिपोर्ट और 17 गवाहों के बयान शामिल।
महाराष्ट्र के नासिक में चर्चित TCS उत्पीड़न और कथित धर्मांतरण मामले में अब जांच में बड़ा मोड़ आया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने इस मामले में पहली चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है, जिसमें करीब 1500 पन्ने हैं। इस चार्जशीट में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे डिजिटल सबूत, WhatsApp चैट, मेडिकल रिपोर्ट, बैंक रिकॉर्ड और गवाहों के बयान शामिल हैं। मामला अप्रैल 2026 में तब सामने आया जब कुछ महिला कर्मचारियों ने Tata Consultancy Services के नासिक BPO यूनिट में यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप लगाए थे। शुरुआती शिकायतों के बाद मामला तेजी से बढ़ा और पुलिस ने विशेष जांच टीम का गठन किया। अब तक इस केस में कुल 9 FIR दर्ज की जा चुकी हैं, हालांकि अभी तक पहली चार्जशीट सिर्फ एक ही मामले में प्रस्तुत की गई है। नासिक पुलिस के अनुसार, जांच अभी भी जारी है और आगे सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है।
चार्जशीट में चार आरोपियों के नाम शामिल हैं: दानिश शेख, तौसिफ बिलाल अख्तर, निदा इजाज खान और मदीन मजीद पटेल। बताया जाता है कि HR मैनेजर रहीं निदा खान फिलहाल फरार हैं, और पुलिस उनकी तलाश कर रही है। प्रारंभिक जांच में कुछ महिला कर्मचारियों ने यह आरोप लगाया था कि कार्यालय के अंदर मानसिक दबाव डाला जाता था और शिकायत करने पर नौकरी पर प्रभाव डालने की धमकी दी जाती थी। कुछ पीड़िताओं ने शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और धार्मिक दबाव डालने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इस मामले में SC/ST एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। SIT ने जांच के दौरान 17 गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए हैं। पुलिस के सूत्रों के अनुसार, डिजिटल डेटा की जांच में कई बातचीत और दस्तावेज मिले हैं, जिन्हें अब कोर्ट रिकॉर्ड में शामिल किया गया है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया है, जिसमें बलात्कार, यौन उत्पीड़न, आपराधिक साजिश, धोखे से संबंध बनाना और धार्मिक भावनाओं को आहत करने जैसी धाराएं शामिल हैं। जांच अधिकारियों के मुताबिक, कथित घटनाएं 2022 से 2026 के बीच हुई हैं। इस दौरान कई पीड़िताओं ने अलग-अलग समय पर शिकायतें दीं। मामला सामने आने के बाद यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना, और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर काफी बहस हुई। SIT का दावा है कि जांच में कुछ संगठित गतिविधियों के संकेत मिले हैं, लेकिन इस पर अंतिम निष्कर्ष कोर्ट की प्रक्रिया के बाद ही साफ होगा। फिलहाल, सभी आरोपियों को जमानत नहीं मिली है और पुलिस बाकी मामलों की जांच में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में और खुलासे होने की भी संभावना जताई जा रही है।
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नासिक TCS केस में 1500 पन्नों की चार्जशीट हुई दाखिल, चैट्स और मेडिकल रिपोर्ट भी शामिल
नेशनल डेस्क
महाराष्ट्र के नासिक में चर्चित TCS उत्पीड़न और कथित धर्मांतरण मामले में अब जांच में बड़ा मोड़ आया है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने इस मामले में पहली चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है, जिसमें करीब 1500 पन्ने हैं। इस चार्जशीट में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे डिजिटल सबूत, WhatsApp चैट, मेडिकल रिपोर्ट, बैंक रिकॉर्ड और गवाहों के बयान शामिल हैं। मामला अप्रैल 2026 में तब सामने आया जब कुछ महिला कर्मचारियों ने Tata Consultancy Services के नासिक BPO यूनिट में यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप लगाए थे। शुरुआती शिकायतों के बाद मामला तेजी से बढ़ा और पुलिस ने विशेष जांच टीम का गठन किया। अब तक इस केस में कुल 9 FIR दर्ज की जा चुकी हैं, हालांकि अभी तक पहली चार्जशीट सिर्फ एक ही मामले में प्रस्तुत की गई है। नासिक पुलिस के अनुसार, जांच अभी भी जारी है और आगे सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है।
चार्जशीट में चार आरोपियों के नाम शामिल हैं: दानिश शेख, तौसिफ बिलाल अख्तर, निदा इजाज खान और मदीन मजीद पटेल। बताया जाता है कि HR मैनेजर रहीं निदा खान फिलहाल फरार हैं, और पुलिस उनकी तलाश कर रही है। प्रारंभिक जांच में कुछ महिला कर्मचारियों ने यह आरोप लगाया था कि कार्यालय के अंदर मानसिक दबाव डाला जाता था और शिकायत करने पर नौकरी पर प्रभाव डालने की धमकी दी जाती थी। कुछ पीड़िताओं ने शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और धार्मिक दबाव डालने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। इस मामले में SC/ST एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। SIT ने जांच के दौरान 17 गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए हैं। पुलिस के सूत्रों के अनुसार, डिजिटल डेटा की जांच में कई बातचीत और दस्तावेज मिले हैं, जिन्हें अब कोर्ट रिकॉर्ड में शामिल किया गया है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया है, जिसमें बलात्कार, यौन उत्पीड़न, आपराधिक साजिश, धोखे से संबंध बनाना और धार्मिक भावनाओं को आहत करने जैसी धाराएं शामिल हैं। जांच अधिकारियों के मुताबिक, कथित घटनाएं 2022 से 2026 के बीच हुई हैं। इस दौरान कई पीड़िताओं ने अलग-अलग समय पर शिकायतें दीं। मामला सामने आने के बाद यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना, और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर काफी बहस हुई। SIT का दावा है कि जांच में कुछ संगठित गतिविधियों के संकेत मिले हैं, लेकिन इस पर अंतिम निष्कर्ष कोर्ट की प्रक्रिया के बाद ही साफ होगा। फिलहाल, सभी आरोपियों को जमानत नहीं मिली है और पुलिस बाकी मामलों की जांच में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में और खुलासे होने की भी संभावना जताई जा रही है।
